Saturday, March 7, 2026
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खतरनाक हो सकती है शरीर में पानी की कमी

Sehat 3

गर्मी का मौसम आते ही डिहाइड्रेशन अर्थात शरीर में पानी की कमी का होना अधिक बढ़ जाता है। डिहाइड्रेशन चाहे हल्का-फुल्का हो या गंभीर, हर स्टेज में एहतियात बरतने की आवश्यकता होती है। थोड़ी-सी सतर्कता डिहाइड्रेशन की बड़ी परेशानी से बचा सकती है।

अधिक दस्त आना, उल्टी होना, अधिक पसीना बहना, फूड पॉयजनिंग का असर, तेज बुखार होना, लू लगना, अधिक शारीरिक श्रम, धूप में अधिक देर चलना आदि के कारणों से शरीर में जल की मात्रा कम हो जाती है तथा डिहाइड्रेशन की व्याधि शरीर को ग्रस्त कर लेती है।

डिहाइड्रेशन के तीन प्रकार होते हैं, जिन्हें माइल्ड डिहाइड्रेशन, मॉडरेट डिहाइड्रेशन तथा सीवियर डिहाइड्रेशन के नामों से जाना जाता है। माइल्ड डिहाइड्रेशन की स्थिति में रोगी के शरीर से लगभग तीन प्रतिशत पानी की कमी हो जाती है। रोगी को इस स्थिति में प्यास अधिक लगती है तथा अधिक कमजोरी महसूस होने लगती है। रोगी के हाथ-पैर झुनझुनाने लगते हैं तथा उसे नींद नहीं आती। यह स्थिति अधिक खतरनाक नहीं होती।

मॉडरेट डिहाइड्रेशन की स्थिति में रोगी के शरीर से लगभग दस प्रतिशत पानी की कमी हो जाती है। रोगी का मुंह सूखने लगता है तथा उसमें लगातार कमजोरी बढ़ने लगती है। पल्स रेट अधिक हो जाती है तथा रोगी को लगातार चक्कर आने लगते हैं। यह स्थिति रोगी के लिए काफी खतरनाक सिद्ध हो सकती है।

सीवियर डिहाइड्रेशन की स्थिति में रोगी के शरीर से लगभग 15 प्रतिशत तक पानी की कमी हो जाती है। रोगी का ब्लडप्रेशर कम हो जाता है तथा पल्स बहुत ही कमजोर पड़ जाती है। इस स्थिति में रोगी बेहोश भी हो सकता है। इसका असर उसके दिमाग तथा किडनी पर पड़ता है। यह इमरजेंसी की स्थिति बन जाती है। इस स्थिति में तुरन्त चिकित्सक के पास नहीं ले जाने से रोगी की मृत्यु तक हो सकती है।

शरीर में पानी की कमी से ब्लडप्रेशर कम हो जाता है तथा गुर्दा भी फेल हो सकता है। इससे दिमाग पर असर पड़ता है। शरीर में सोडियम एवं पोटेशियम की कमी हो जाती है। रोगी निरन्तर कमजोर होने लगता है तथा उसकी आंखों के सामने अंधेरा आने लगता है। शरीर में मरोड़ होने के साथ ही रोगी बेहोश भी हो जाता है। इनके अतिरिक्त भी रोगी अनेक शारीरिक परेशानियों से घिर जाता है।

गर्मी के मौसम में अधिक से अधिक नींबू पानी का सेवन करना चाहिए तथा गरिष्ठ भोजनों का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए। जहां तक संभव हो, तरल पदार्थों का ही सेवन करना चाहिए।

धूप में अधिक निकलने से परहेज करना चाहिए। अगर धूप में निकलना बहुत ही आवश्यक हो तो भरपेट पानी पीकर ही निकलना चाहिए। इससे धूप की तीव्रता का असर कम होता है और डिहाइड्रेशन की संभावना नहीं बनती।

गर्मी के मौसम में दूध या दूध से बने पदार्थ दही, लस्सी आदि का सेवन अधिकतर करते रहना चाहिए। ध्यान रहे कि सेवनीय पदार्थ बासी न हों। दिन में कम से कम एक बार नींबू पानी का सेवन अवश्य ही कर लेना चाहिए।

अगर आप घर में बैठे हों या आफिस में ही बैठकर काम क्यों न करते हों, फिर भी नींबू-पानी, लस्सी, आदि का प्रयोग अवश्य करें अन्यथा इस अवस्था में भी डिहाइड्रेशन का प्रकोप हो सकता है।ग्रीष्म ऋतु में अधिक देर तक खाना न खाना, उपवास करना, चाट-पकौड़ी खाना आदि के कारणों से भी शरीर में जलीय तत्व की कमी हो सकती है।

इस मौसम में महिलाओं को खासकर गर्भवती महिलाओं एवं मासिक धर्म (पीरिएड काल) में महिलाओं को गर्मी के कारण डिहाइड्रेशन का अधिक खतरा बना रहता है। अत: उन्हें नमक-पानी, ग्लूकोज या इलैक्ट्रॉल पाउडर का व्यवहार नियमित रूप से करते रहना चाहिए।

पूनम दिनकर

दैनिक जनवाणी किसी भी चिकित्सकीय परामर्श, सुझाव व शोध आधारित खबरों में प्रकाशित तथ्यों के उपयोगी होने की जिम्मेदारी नहीं लेता है।

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