Friday, April 24, 2026
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जलनीति के साथ जनसंख्या पर भी बने नीति: मोहन भागवत

  • आरएसएस प्रमुख संघसर संचालक मोहन भागवत नीर फाउंडेशन द्वारा आयोजित संगोष्ठी को किया संबोधित
  • कृषि विवि में किया गया पुस्तक का विमोचन

जनवाणी संवाददाता |

मोदीपुरम: राष्ट्रीय स्वयं सेवा संघ के प्रमुख मोहन भागवत सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विवि के सभागार में आयोजित संगोष्ठी के दौरान केंद्र सरकार को जलनीति के साथ-साथ जनसंख्या नीति को साधने का ऐसा गुरु मंत्र दे गए। जिसके अपनाने से देश की अनेक बड़ी समस्याएं स्वत: हल हो जाएगी। जिनमें मुख्य रूप से प्राकृतिक आपदाओं का आना देश का जल भू संकट बढ़ता आतंकवाद और कानून की गिरती अवस्था सभी कुछ शामिल हो।

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विवि के पशु चिकित्सा सभागार में रमन त्यागी के नीर फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी भारत के जल संसाधन मुददे चुनौतियां एवं समाधान एवं पुस्तक विमोचन पर मुख्य अतिथि के रूप में कहा कि देश को देना सीखो लेना नहीं। सरकारों पर आश्रित मत बनो। आत्म निर्भर बनो। आज अगर देश में जल संकट बढ़ रहा है तो उसके जिम्मेदार हम स्वंय है। हमें अगर जल संकट को दूर करना है तो मरती हुई नदियों खत्म होते जंगलों और गांव से हो रहे पलायन को रोकना होगा।

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हमें किसानी को ही खेती की प्रयोगशाला ही बनाना होगा। उन्होंने कहा कि देश पर छाया जल संकट और बढ़ता जन संख्या संकट एक समान है। इन दोनों को साधने के लिए सरकार को एक देश एक नीति अपनानी होगी। तभी इन संकटों पर पार पाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बंद कमरों में संगोष्ठी करने से नहीं बल्कि जंगलों खेतों देहात और नदियों के मुहानों पर जाना होगा।

जब तक हम किसान का बहता हुआ पसीना नहीं रोकेंगे और नदियों में पानी नहीं बहाएंगे, तब तक हमारे मुद्दे चुनौतियां बने रहेगें और समाधान हाथ नहीं आएगा। हम विकल्प के स्थान पर संकल्प धारण करे। इसके लिए विकल्प के रूप में हम अगर नदी पर बांध तैयार करते हैं तो कुछ स्थानों को पानी मिलता है तो कुछ स्थान सूखे रह जाते हैं और कभी बांध टूटते हैं तो जल प्रलय की स्थिति पैदा होती है।

इन सबसे बचने के लिए हमें नदियों के संकट पर बात करनी चाहिए ना कि नदियों के जल बंटवारे पर नदियों को न बांटे बल्कि जल संकट को बांटे और अपना-अपना दायित्व ईमानदारी के साथ निभाए। आज जिस पुस्तक जल दिग्दर्शिका का विमोचन किया जा रहा है। यह मार्ग दर्शक बने। इसके लिए आवश्यक है कि इसका वितरण दूरदराज तक हो गांव-गांव तक हो। जल संकट से उबरने के लिए आवश्यक है कि हम गांव देहात तक पहुंचे।

परमार्थ निकेतन के संस्थापक स्वामी चिदानंद ने कहा कि विवेकानंद जी कहते थे, अपनी सोच को बदलो। सोच प्रदूषित है तो सबकुछ प्रदूषित है। सोच को बदलो सितारे बदल जाएंगे। हमने 70 वर्षों में भी देखा देश में क्या हुआ, लेकिन आज सबकुछ बदल रहा है। स्वामी विवेकानंद के शिकागों धर्म सम्मेलन में दिए गए संबोधन का भी उन्होने उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हमें अपनी संस्कृति वातावरण और अपने परिवेश के अनुकुल नीतियां बनानी चाहिए। नदियां जीवित रहेगी तो सभ्यताएं जीवित रहेगी। हमें अपने शास्त्रों का अध्ययन करना चाहिए। जिनमें लिखा कि नदियों के किनारे ही सभ्यताएं और संस्कृति बनती थी। आज नदियां भी मर रही है संस्कार और संस्कृति भी मर रही है।

कृषि विवि में अतिथियों का किया स्वागत

सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विवि के पशु चिकित्सा सभागार में नीर फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी भारत के जल संसाधन मुद्दे चुनौतियां एवं समाधान एवं पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंचालक मोहन भागवत एवं परमार्थ निकेतन के संस्थापक स्वामी चिदानंद ने अध्यक्ष के रूप में शामिल हुए।

जबकि विशिष्ट अतिथि के रुप में चौधरी चरण सिंह विवि के पूर्व कुलपति प्रो. एनके तनेजा एवं सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विवि के कुलपति प्रो. आरके मित्तल शामिल हुए। कार्यक्रम के आयोजन नीर फाउंडेशन के संस्थापक रमन कांत द्वारा सभी अतिथियों को गमछा ओढाकर एवं जल प्रहरी देकर स्वागत और सम्मान किया। कार्यक म में नवीन प्रधान, शुभम कौशिक आदि मौजूद रहे।

सुरक्षा व्यवस्था के रहे पुख्ता बंदोबस्त

कार्यक्रम में सुरक्षा व्यवस्था के भी कड़े बंदोबस्त रहे। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था में लगे रहे। कार्यक्रम में सांसद राजेंद्र अग्रवाल, राज्यमंत्री सुनील भराला, एमएलसी धर्मेंद्र भारद्वाज समेत विभिन्न जनप्रतिनिधि पहुंचे। इसके अलावा स्वयं सेवक संघ के भी पदाधिकारी एवं कार्यक र्ता कार्यक्रम में शामिल हुए। सर संघ संचालक ने सभी से मिलकर उनक हाल जाना।

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