Friday, March 20, 2026
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उदय कुंज में बना दी अवैध दुकानें

  • एमडीए के इंजीनियर अनजान, नहीं की कार्रवाई
  • करीब आधा दर्जन दुकानों का हो चुका निर्माण
  • दुकानों में डाल दिया गया लिंटर, की गई फर्निशिंग
  • अवैध कॉलोनी विकसित, नहीं है मानचित्र भी स्वीकृत
  • कार्रवाई न होने पर सवालों के घेरे में एमडीए

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: अवैध निर्माणों पर मेरठ विकास प्राधिकरण अंकुश नहीं लगा पा रहा है। पल्लवपुरम में स्थित उदय सिटी के पीछे अवैध तरीके से उदय कुंज नामक कॉलोनी विकसित की जा रही है। इसमें करीब 8 से 10 दुकानों का निर्माण कर दिया गया हैं, लेकिन मेरठ विकास प्राधिकरण की तरफ से कोई कार्रवाई अवैध निर्माण पर नहीं हुई है। उदय सिटी से सटकर यह अवैध कॉलोनी है, जिसका नाम उदय कुंज रखा गया है।

कॉलोनी भूमाफिया अनिल चौधरी की बताई गई है और अवैध कॉलोनी में बिल्डर ने सबसे पहले 8 से 10 दुकानों का निर्माण किया है और भी बड़ी तादाद में दुकानों का निर्माण किया जा रहा है। दुकानों के लिंटर भी डाल दिया गया है, जिनकी फर्निशिंग की जा रही है। वर्तमान में दुकानों से पीछे भी करीब पांच हजार वर्ग मीटर जमीन में प्लाटिंग की जा रही है।

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बताया गया कि अनिल चौधरी ने यह जमीन रविंद्र चौधरी से खरीदी है, जिसके बाद अवैध कॉलोनी विकसित की जा रही है। इसका तलपट मानचित्र एमडीए से स्वीकृत नहीं कराया हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि दुकान बनकर तैयार हो गई और मेरठ विकास प्राधिकरण ने इसमें कोई कार्रवाई नहीं की। भाजपा नेता विक्रांत चौधरी के अवैध कॉम्प्लेक्स को लेकर जहां बवाल मचा हुआ है, वही उदय कुंज कॉलोनी को लेकर मेरठ विकास प्राधिकरण के इंजीनियर शांत क्यों है?

इसमें कोई कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है? यह बड़ा सवाल है। मेरठ विकास प्राधिकरण की तरफ से पल्लवपुरम में दो दर्जन से ज्यादा अवैध निर्माण बड़े-बड़े किए जा रहे हैं, जिसमें कोई कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है? यह सवालों के घेरे में है। प्राधिकरण इंजीनियरों को उदय कुंज कॉलोनी में प्लाटिंग होती हुई नहीं दिखाई दे रही है। यही वजह है कि बिल्डरों का अवैध कॉलोनी काटते हुए हाथ नहीं काम रहे हैं।

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नहीं इनको कानून का डर है, जिसके चलते शहर भर में अवैध कालोनियों की बाढ़ आ गई है। ऐसा तब है जब मेरठ विकास प्राधिकरण की कमान वर्तमान में डीएम दीपक मीना संभाल रहे हैं। डीएम हाल ही में मीटिंग लेकर प्राधिकरण के इंजीनियर को स्पष्ट कर चुके हैं कि अवैध निर्माण कतई नहीं होना चाहिए। फिर भी अवैध निर्माण हो रहे हैं और उन पर कार्रवाई के नाम परखानापूर्ति की जा रही है।

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