यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भले ही जीरो टोलरेंस की बात करें, लेकिन नगर निगम में सिंडीकेट बनाकर भ्रष्टाचार किया जा रहा हैं। जीरो टोलरेंस की नीति पर नगर निगम में काम नहीं हो रहा हैं। मौके पर तीन सौ मीटर सड़क और छह सौ मीटर की सड़क का भुगतान किया जा रहा था। इसका पहले ही खुलासा हो गया, जिसके बाद नगर निगम और अन्य अधिकारी अलर्ट हो गए। आनन-फानन में इसकी जांच कराई गयी, जिसमें 10 अभियंताओं को दोषी माना गया हैं। इन अभियंताओं पर कभी भी गाज गिर सकती हैं। अब देखना यह है कि भ्रष्ट अभियंताओं की सम्पत्ति जब्त करने के लिए यूपी सरकार क्या कदम उठती हैं या फिर इस बड़े भ्रष्टाचार के मामले में लीपापोती कर दी जाएगी। ईमानदार कमिश्नर ने इसकी जांच रिपोर्ट तलब कर ली हैं। अब माना जा रहा है कि इसमें गाज गिरना तय है।
- दोषी अभियंताओं की होनी चाहिए सम्पत्ति जब्त
- सांसद राजेंद्र अग्रवाल बोले-सस्पेंड और तबादला कोई सजा नहीं संपत्ति होनी चाहिए कुर्क
- कमिश्नर ने तलब की भ्रष्टाचार के मामले की फाइल
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: सिंडिकेट बनाकर नगर निगम में सड़क घोटाला हुआ है। ये तथ्य भी सामने आ रहा हैं। क्योंकि एक्शन विकास कुरील, एई नानक और जेई राजेंद्र इन सभी अफसरों का सिंडिकेट था। उन्होंने यह घपला किया है। चीफ इंजीनियर यशवंत का नाम भी इसमें सामने आ रहा हैं। हालांकि इसमें कुछ ऐसे इंजीनियर है, जिनका तबादला हो चुके हैं, लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि भाजपा सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने कहा है कि तबादला और सस्पेंड करना कोई सजा नहीं है, बल्कि जो भ्रष्टाचार में लिप्त इंजीनियर है, उनकी संपत्ति जब्त होनी चाहिए।
उन पर एफआईआर कराई जाए। वास्तविक सजा सस्पेंड और तबादला नहीं होता। चार साल के दौरान जो कार्यकाल इन इंजीनियरों का रहा है, उस दौरान की तमाम सड़कों की जांच होनी चाहिए। क्योंकि उसमें भ्रष्टाचार यदि हुआ होगा तो वह सामने आ जाएगा। सांसद राजेंद्र अग्रवाल इस सड़क घोटाले को लेकर पहले ही चिट्ठी लिख चुके हैं। इसकी जांच चल रही है और जीरो टोलरेंस पर सरकार काम कर रही है।

ऐसा उनका दावा है, लेकिन स्थान में जो अधिकारी इस भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। उन पर बड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। अब महत्वपूर्ण बात यह है कि इस सड़क निर्माण घोटाले में 10 अभियंताओं की भूमिका दोषपूर्ण रही है। ऐसा कहा जा रहा है, लेकिन अभी इसकी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है। नेशनल पीपी रियल कॉम कंपनी को यह टेंडर दिया गया था, जिसमें एडवांस 50 लाख का भुगतान भी किया गया।
इसमें कभी भी इंजीनियर पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। शासन इसको लेकर गंभीर है। 600 मीटर का टेंडर हुआ और 300 मीटर सड़क का निर्माण कराया गया था। कमिश्नर सुरेन्द्र सिंह इस घोटाले में दोषी पीडब्लयूडी और नगर निगम के इंजीनियरों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सांसद ने तो इनकी सम्पत्ति जब्त करने की मांग कर डाली हैं, जिसमें बड़ी कार्रवाई संभव हो सकती हैं।

