- बाबूजी कल्याण सिंह ग्राम उन्नति योजना चढ़ी परवान
- पांचों विधायकों से मांगे चार-चार गांवों के नाम
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: बाबू जी कल्याण सिंह ग्राम उन्नति योजना के अंतर्गत पहले चरण में मेरठ जनपद के 20 गांवों के रास्तों को सौर ऊर्जा के जरिये रोशन किया जाएगा। इसके लिए महानगर की दोनों विधानसभाओं को छोड़कर सभी पांच विधायकों से अपने-अपने क्षेत्र के चार ऐसे गांवों के नाम मांगे गए हैं, जिनको वे सबसे पहले इस योजना से लाभान्वित कराना चाहते हैं।
यूपीनेडा के परियोजना अधिकारी प्रमोद भूषण ने ‘जनवाणी’ से बातचीत के दौरान बताया कि प्रदेश सरकार ने बाबू जी कल्याण सिंह ग्राम उन्नति योजना के अंतर्गत पहली किस्त में 1500 गांवों में सोलर लाइट लगाए जाने की योजना बनाई है। इसके लिए हर जिले के 20 गांवों का चयन करने के लिए शासनादेश जारी किया गया है।
जिसमें जिलाधिकारी की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति बनाई गई है। जिसमें सीडीओ और डीपीआरओ सदस्य, जबकि यूपीनेडा पीओ सदस्य सचिव बनाए गए हैं। योजना में हर विधानसभा क्षेत्र से बराबर-बराबर ग्राम पंचायतों का चयन किया जाना है। मेरठ जिले के देहात से संबंधित पांचों विधायकों से विधान सभावार चार-चार गांवों के नामों के प्रस्ताव मांगे गए हैं। इनमें चार विधायकों की ओर से नाम मिल गए हैं, जबकि एक विधायक के नामों की प्रतीक्षा की जा रही है।
हर विधानसभा से नाम मिलने के बाद जिलाधिकारी द्वारा ग्राम पंचायतों का चयन करने के बाद यूपीनेडा को सूची उपलब्ध करानी है। इसके बाद 30 सितंबर तक यूपीनेडा अनुबंधित फर्म को वर्क आर्डर जारी करने और एक अक्टूबर से जनवरी 2023 तक संयंत्रों की स्थापना का कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है।
अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी द्वारा प्रदेश के सभी जिला अधिकारियों को भेजे गए पत्र के हवाले से परियोजना अधिकारी प्रमोद भूषण शर्मा ने बताया कि चयनित ग्राम पंचायत में 30 घर पर एक लाइट का औसत मानक रखा गया है, जिससे कि रास्तों में प्रकाश की समुचित व्यवस्था हो सके। एक ग्राम पंचायत में 10 सोलर लाइटें लगाई जाएंगी। किसी निजी भूमि अथवा बाउंड्री के अंदर सोलर लाइट न लगे, यह भी ध्यान रखा जाएगा।

छाया रहित सार्वजनिक स्थलों का ही चिंह्नाकन किया जाएगा। इन सोलर लाइटों का पांच वर्ष तक रख-रखाव भी कार्यदायी संस्था ही करेगी। इसी आधार पर उस संस्था से अनुबंध होगा। वारंटी अवधि के बाद भी ग्राम पंचायत संयंत्रों की क्रियाशीलता पर ध्यान देगा। वारंटी अवधि में संयंत्रों के निष्क्रिय होने की स्थिति में शिकायत करने के लिए टोल फ्री नम्बर पर संपर्क किया जा सकेगा।
पीएम कुसुम योजना के पहले चरण में 32 उपकेन्द्र चिन्हित
पीएम कुसुम योजना के अंतर्गत पहले चरण में जनपद के 32 उपकेन्द्रों को चिन्हित कर लिया गया है। अब इन बिजलीघरों के पांच किमी दायरे में भूमि की तलाश का काम शुरू किया गया है। यूपीनेडा के परियोजना अधिकारी प्रमोद भूषण शर्मा ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत पहले चरण में ऐसे बिजलीघर चिन्हित किए जाते हैं, जहां सौर ऊर्जा संयंत्र से बनने वाली बिजली की खपत की जा सके।
दूसरे चरण में एक मेगावाट बिजली का सोलर प्लांट लगाने के लिए 25 बीघा भूमि की आवश्यकता होती है। इसके लिए भू-स्वामी से 25 साल के लिए एग्रीमेंट किया जाता है। जबकि तीसरे और अंतिम चरण में प्लांट लगाने के लिए प्रति मेगावाट साढेÞ तीन से चार करोड़ रुपये की लागत लगाने वाले निवेशक की जरूरत होती है। इस प्लांट से पैदा होने वाली बिजली को ऊर्जा निगम तीन रुपये 10 पैसे प्रति यूनिट की दर से खरीदता है।
परियोजना अधिकारी ने बताया कि पश्चिमांचल के प्रबंध निदेशक स्तर से उपलब्ध कराई गई सूची के अनुसार मेरठ जनपद में 32 ऐसे बिजली उपकेन्द्र हैं, जहां सौर ऊर्जा से बनने वाली बिजली की खपत की जा सकेगी। इनमें अगवानपुर, बना, बटजेवरा, बहसूमा, गगोल, गोटका, हर्रा, जमालपुर, कैथवाड़ी, कपसाड़, करनावल, खजूरी, खरखौदा न्यू, माछरा, महादेव, नानू, नारंगपुर, फलावदा, पीपलीखेड़ा, पूठखास, रासना, सकौती, सरधना नहर, सीना, सादुल्लापुर, सिसौली, सिवाया, सियाल शामिल हैं।
बागपत जिले में 39 बिजली उपकेन्द्र सौर ऊर्जा से निर्मित बिजली की खपत के लिए चिन्हित किए हैं। इनमें दाहा में साढ़े तीन मेगावाट और किरठल में एक मेगावाट संयंत्र लगाने की स्वीकृति मिल गई। परियोजना अधिकारी यूपीनेडा का कहना है कि उपरोक्त सूची में शामिल सभी बिजलीघरों से कृषक फीडर अलग कर दिए गए हैं। जिनसे नलकूपों को चलाने के लिए अब दिन में बिजली की सप्लाई दी जाएगी।
उनका कहना है कि इन बिजलीघरों के जरिये बनाए अलग कृषक फीडरों का एक उद्देश्य किसानों को निर्बाध रूप से बिजली की आपूर्ति करना है। आने वाले दिनों में सरकार की ओर से इन फीडरों के माध्यम से किसानों को निशुल्क बिजली दिए जाने के संकेत हैं, हालांकि इसकी अभी तक अधीकृत घोषणा नहीं की गई है।

