विकलांग बेटी की उपलब्धि पर गांव में जश्न
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ/किठौर: प्रतिभा हालात की मोहताज नही होती, वह खुद को सिद्ध करने के लिए अवसर तलाश करती है। यह साबित कर दिखाया किठौर के राधना गांव निवासी विकलांग फातिमा ने। इस होनहार बिटिया ने मेहनत से पढ़ाई कर न सिर्फ विद्युत विभाग में स्टेनोग्राफर की नौकरी प्राप्त की बल्कि सड़क दुर्घटना में गंभीर घायल फातिमा पर ठीक होने के बाद खेल का ऐसा खुमार चढ़ा कि विकट परिस्थितियां भी उसका रास्ता नही रोक पाईं। नौकरी के साथ खेल में किस्मत आजमाने निकली तो उत्तरी अफ्रीका के मोरक्को में कांस्य पदक जा झटका। बेटी की इस उपलब्धि पर पूरा गांव
गदगद है।
किठौर के राधना इनायतपुर में 05 फरवरी 1992 को ट्रक चालक मुहम्मद कामिल के घर जन्मी फातिमा की प्राथमिक शिक्षा गांव के चैपाल वाले स्कूल में हुई। स्टार अल-फलाह और गफूरी इंटर काॅलेज से पढ़ाई करने के बाद फातिमा आगे की पढ़ाई के लिए मेरठ चली गईं। बचपन से विकलांग होने के चलते 2014 में इन्हें मेरठ विद्युत विभाग में आरक्षित कोटे से स्टेनोग्राफर की नौकरी मिली।
नौकरी प्राप्ति के लगभग आठ महीने बाद किठौर स्थित आरके काॅलेज के पास रोड एक्सीडेंट में फातिमा गंभीर घायल हो गईं। बहन इशरत जहां ने बताया कि फातिमा छह महीने कोमा में रही और उसको 188 टांके आए लेकिन शुक्र कि जिंदगी बच गई। दो वर्ष बैड पर बिताने के बाद व्हील चेयर उसका सहारा बनी।

2017 में फातिमा पर खेल का खुमार चढ़ा और कुछ अलग कर दिखाने के जज्बे के साथ उसने मेहनत शुरु कर दी। नतीजा शुक्रवार को उत्तरी अफ्रीका के मोरक्को में आयोजित ग्रेंडप्रिक्स में फातिमा ने 17.65 मीटर चक्का फेंककर कांस्य पदक झटक लिया। जबकि भाला फेंक में उसको 15 मीटर के साथ चौथा स्थान प्राप्त हुआ। बेटी की इस उपलब्धि में पूरे गांव में खुशी का महौल है।
प्रैक्टिस से रोका गया
मोरक्को से जनवाणी से फोन पर बातचीत में दिव्यांग फातिमा ने बताया कि शहर के कैलाश प्रकाश स्टेडियम में क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी योगेंद्रपाल सिंह ने उसे प्रैक्टिस की इजाजत नही दी। मन्नतें करने पर भी दिव्यांग बेटी के साथ क्रीड़ा अधिकारी का दिल नही पसीजा। नतीजा 10-12 दिन की प्रैक्टिस प्रभावित हुई। अगर प्रैक्टिस निरंतर चली होती तो भाला फेंक में भी फातिमा का पदक आवश्य आता। लेकिन दुर्भाग्य कि 25 सेमी. से कांस्य पदक रह गया।
सबसे छोटी इशरत जहां ने बताया कि फातिमा चार बहनों में तीसरे नंबर की है। उसके चार भाईयों में समीर व आमिर ड्राईवर, मुशीर लैब टेक्निशियन और मुनीर खेतीबाड़ी करता है। मां नसीम उर्फ मासो गृहणी है। बताया कि फातिमा फिलहाल विभाग से मिले क्वार्टर में मेरठ रहती है वह आज रविवार को अफ्रीका से दिल्ली के लिए रवाना होगी।

