Friday, March 27, 2026
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नहीं हो रहा शुगर का हीमोग्लोबिन टेस्ट

  • जिला अस्पताल में 15 दिन से टेस्टिंग बंद
  • डेढ़ महीने से शासन को भेजी गई डिमांड

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: अगर आप प्यारे लाल शर्मा जिला अस्पताल में शुगर का HBA1C टेस्ट कराना चाहते हैं तो फिलहाल आपको निराश होना पड़ेगा। 15 दिन से केमिकल न होने से टेस्ट नहीं हो पा रहे हैं। अस्पताल के पैथालाजी विभाग ने डेढ़ महीने पहले शासन को डिमांड भी भेज दी है, लेकिन अभी तक सप्लाई नहीं हुई है।

जिला अस्पताल की कमरा नंबर 19 में चलने वाली पैथालाजी विभाग में शुगर के टेस्ट होते हैं। इनमें तीन महीने के शुगर लेवल को जांचने वाले HBA1C टेस्ट भी शामिल है। इस टेस्ट को लेकर मारामारी मची हुई है, लेकिन अस्पताल में 15 दिन से केमिकल न होने के कारण लोगों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है। प्राइवेट पैथालाजी में इस टेस्टिंग के अच्छे खासे पैसे लगते हैं।

पैथालाजी विभाग ने इस टेस्ट में प्रयोग होने वाले केमिकल की डिमांड के लिये डेढ़ महीने पहले आवेदन किया था। नई व्यवस्था के तहत बिना कमेटी के एप्रुवल के शासन दवाइयों की सप्लाई नहीं करता है। इसके लिये सीएमओ आफिस, डफरिन अस्पताल, प्रशासन और जिला अस्पताल के प्रतिनिधि कमेटी में बैठकर एप्रुवल शासन को भेजते हैं। लखनऊ स्थित एक कंपनी इस केमिकल की सप्लाई करती है।

बताया जाता है कि एक किट की कीमत करीब 60 हजार रुपये होती है और एक किट से करीब तीन सौ लोगों की HBA1C टेस्ट हो जाती है। हालांकि अस्पताल में शुगर की नार्मल जांच हो रही है। 15 दिन से लोग अस्पताल से निराश होकर लौट रहे हैं और उनको सही स्थिति बताने वाला कोई नहीं है।

क्या होता है HBA1C टेस्ट?

तीन महीने के अंतराल पर एक टेस्ट कराया जाता है, जिसे HBA1C टेस्ट के नाम से जाना जाता है। इसका मतलब हीमोग्लोबिन HBA1C है। यह टेस्ट खाने के बाद और बिना खाना खाए ब्लड शुगर लेवल की जांच के लिए किए जाने वाले टेस्ट से अलग होता है। यह टेस्ट ब्लड शुगर लेवल की जांच करने के लिए बिना खाना खाए और खाना खाने के बाद किए जाने वाले टेस्ट से अलग है।

यह उन टेस्ट के मुकाबले ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है जिनसे सिर्फ खाने से ठीक पहले या बाद में ब्लड शुगर लेवल की जानकारी मिलती है। HBA1C से लंबे समय के दौरान ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव की जानकारी मिलती है। हीमोग्लोबिन का संबंध आपके आयरन लेवल और अनीमिया से है, लेकिन यह डायबिटीज से किस तरह जुड़ा है? जब आपके खून में शुगर लेवल बढ़ता है तो ग्लूकोज, हीमोग्लोबिन के साथ मिलकर ग्लाइकेटेड हीमोग्लोबिन तैयार करता है।

HBA1C टेस्ट जिसे ग्लाइकेटेड हीमोग्लोबिन टेस्ट भी कहते हैं, इस ग्लूकोज से जुड़े हीमोग्लोबिन की मात्रा नापता है। इस टेस्ट के लिए अंगुली की बजाय, नसों से निकाले गए खून के सैंपल का इस्तेमाल किया जाता है। जब आप खुद ब्लड शुगर लेवल की जांच करते हैं तो इससे सिर्फ टेस्ट के वक्त का ब्लड ग्लूकोज लेवल पता चलता है।

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