Thursday, March 26, 2026
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फरियादी की पीली पर्चियां हुई बेअसर, थानेदार कर रहे दरकिनार

  • फरियादी पीली पर्ची को हाथ में थामे काट रहे पुलिस थानों के चक्कर

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: थानों से दुत्कार दिये जाने और कार्रवाई न होने पर पीड़ित लोग अपनी समस्याओं को लेकर पुलिस आॅफिस पर इस आस में जाते हैं कि अब उन्हें कप्तान के दरबार से न्याय मिल पायेगा। पुलिस कप्तान तमाम फरियादियों की शिकायत पर थानेदारों को मामले की जांच कर उनके निस्तारण के आदेश जारी करते हैं। फरियादियों को हाथ मे पीली पर्ची थमाकर कहा जाता है कि जाइये आप थानेदार से मिलिये।

उन्हें पीली पर्ची दिखाये, आपकी समस्या का निस्तारण हो जायेगा, लेकिन थानेदार हैं कि पुलिस आॅफिस से आदेश के रुप में निकली इन पीली पर्चियों से कार्रवाई करना तो दूर इनकी तरफ देखते भी नहीं। फरियादी इन पीली पर्चियों को हाथ में थामे थानों के चक्कर काटते नजर आते हैं।

वर्ष 2020 में एसएसपी प्रभाकर चौधरी के कार्यकाल में पीड़ितों की थानों पर सुनवाई न होने और पुलिस आॅफिस पर शिकायतों का दबाव बढ़ा तो पीली पर्ची के रूप में नई प्रक्रिया अपनाई गई। पूर्व में पुलिस आॅफिस पर अक्सर देखा जाता था कि एसएसपी ने फरियादियों के प्रार्थनापत्र पर कार्रवाई के आदेश जारी कर दिये, लेकिन जब फरियादी अपनी समस्या से संबंधित उक्त प्रार्थनापत्र की स्थिति जानने के लिए थाने जाता, तो वहां उसे यह कहकर टाल दिया जाता कि आपका प्रार्थनापत्र नहीं मिला है।

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फरियादियों की इस समस्या को दूर करने के लिए तत्कालीन एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने पीली पर्ची का चलन शुरू किया। फरियादी से प्रार्थनापत्र लेने के बाद एक पीली पर्ची इस बात के लिए दी जाने लगी कि आपकी शिकायत दर्ज कर ली गई है। उक्त पीली पर्ची पर वादी का प्रारम्भिक ब्योरा, थाने का नंबर और शिकायत का नंबर देकर उन्हें थाना प्रभारी से मिलने के लिए कहा जाने लगा। करीब दो वर्ष से ज्यादा पीली पर्ची को फरियादियों के हाथोें में थमाई जा रही है,

लेकिन थानेदारों पर इन पीली पर्ची का कोई प्रभाव नहीं दिखाई दे रहा। कई फरियादियों को तो पीली पर्ची दिये जाने के बाद एसएसपी के यहां कई बार शिकायत के लिए आना पड़ा। उन्हें चार बार पीली पर्ची थमाई गई, लेकिन थाने पर कोई सुनवाई नहीं हुई। पुलिस आॅफिस पर प्रतिदिन 50 से 100 के बीच फरियादी आते हैं और उन्हें पीली पर्ची दी जाती है, लेकिन थानेदार हैं इन पीली पर्चियों की अहमियत नहीं समझ पा रहे। एसएसपी आॅफिस से निकली इन पर्चियों पर भी लोगों ने सवाल करना शुरु कर दिया है।

  • केस-1

परतापुर थाना शताब्दी नगर की एक अनुसूचित जाति की महिला रमा सागर ने एसएसपी आॅफिस के यहां अपनी समस्या के लिए चार बार शिकायत की। उसे चार बार पीली पर्ची थमाकर यही कहा गया कि परतापुर थाने जाओ। कार्रवाई की जायेगी, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। उनके घर में घुसकर पार्षद पति सहित कई लोगों ने बेटे से मारपीट कर घायल कर दिया था। पुलिस ने सांठगांठ कर मामूली धारा में चालान कर दिया।

  • केस-2

लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र जाकिर कालोनी निवासी दिलदार ने एसएसपी के यहां कई बार शिकायत की। उसने कहा कि थाना पुलिस ने उसे झूठे दुष्कर्म का आरोपी बनाकर जेल में डाल दिया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है।

  • केस-3

नौचंदी थाना क्षेत्र जैदी फार्म निवासी शकील ने बताया कि एसएसपी के यहां से उसे पीली पर्ची दी गई और कहा गया कि थाने जाओ, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं कीगई है।

  • केस-4

भावनपुर थाना क्षेत्र अरविन्द के पिता ने मारपीट की तहरीर थाना पुलिस को दी, लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं होने पर एसएसपी से शिकायत की। उसे पीली पर्ची देकर कहा गया कि थाने पर जाकर मिलो। कार्रवाई जरूर होगी, लेकिन पीली पर्ची का कोई फायदा नहीं हुआ।

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