- एंटी करप्शन में शिकायत पहुंचते ही जाल में फंस रहे कर्मचारी
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: चौधरी चरण सिंह कारागार में उन सरकारी कर्मचारियों की संख्या ज्यादा बढ़ रही है जो मोटी तनख्वाह पाने के बाद भी रिश्वत के आरोप में जेल की हवा खा रहे हैं। एंटी करप्शन की टीमें मेरठ समेत 28 जनपदों से रिश्वतखोरों को पकड़ कर ला रही है। इस वक्त जेल में रिश्वत के आरोप में दो दर्जन से अधिक लोग बंद है जो जमानत न मिलने के कारण रिहाई का इंतजार कर रहे हैं।
जब से एंटी करप्शन की मेरठ यूनिट ने सटीक अभियान चलाना शुरु किया है तभी से रिश्वत के आरोपियों की संख्या में इजाफा होने लगा है। ग्रेटर नोएडा के इकोटेक थाने में तैनात प्रशिक्षु दारोगा गुलाब सिंह राजपूत को चार लाख की रिश्वत लेते हुए एंटी करप्शन मेरठ की टीम ने गिरफ्तार कर लिया। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने गुलाब सिंह को सेवा से बर्खास्त कर दिया। वहीं दारोगा को जेल में डाल दिया गया है।
आरोपी ने सेवानिवृत्त कमांडर राजीव सरदाना से साल 2019 में निर्माणाधीन एएमआर मॉल में सात करोड़ के सामान चोरी होने के केस की जांच के लिए 15 लाख रुपये मांगे थे। बाद में 13 लाख रुपये देने की बात तय हुई थी। पहली किस्त के तौर पर आरोपी चार लाख लेने पहुंचा था, तभी उसे गिरफ्तार कर लिया गया। गत वर्ष सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच गाजियाबाद की टीम ने सोमवार को कैंट बोर्ड के सैनिटरी सुपरवाइजर संजय को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया था।
बताया गया है कि कैंट बोर्ड में 80 सफाईकर्मियों की नियुक्ति चल रही है। आरोपी कर्मचारी नियुुक्ति के लिए ही रिश्वत मांग रहा था। एंटी करप्शन टीम ने गंगानगर थाना क्षेत्र से इंस्पेक्टर नवल सिंह राघव पुत्र स्व. उदयवीर सिंह निवासी गंगानगर को पांच हजार रुपये की घूस लेते हुए गिरफ्तार किया था। हाउस टैक्स सेटलमेंट कराने के लिए पांच हजार रुपये रिश्वत ली थी। एंटी करप्शन टीम ने सहारनपुर के सीएचसी बेहट में डॉ. नितिन कंडवाल को उनके आॅफिस में रिश्वत लेकर रंगे हाथ पकड़ लिया।
आरटीओ के बाबू मुंशी लाल को रिश्वत लेते हुए एंटी करप्शन की टीम ने पकड़ लिया था। रजिस्ट्रेशन के नाम पर ई रिक्शा के डिस्ट्रीब्यूटर पर दबाव बना रहा था। जिला कारागार में रिश्वत के आरोपियों के अलावा जीएसटी चोरी के एक दर्जन से अधिक लोग बंद है, लेकिन रिश्वतखोरों के जेल में दाखिल होते ही बंदियों में चर्चाएं शुरु हो जाती है कि मोटा वेतन लेने के बाद भी कर्मचारी पैसा खाने से बाज नहीं आ रहे हैं। इन कर्मचारियों को जमानत के लिये लंबा इंतजार करना पड़ रहा है क्योंकि हाईकोर्ट भी इनको जल्द जमानत देने में रुचि नहीं ले रहा है। यही कारण है कि रिश्वत के एक दो मामले सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे हैं।

