Friday, May 22, 2026
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क्या यही हैं ‘राष्ट्रभक्ति’ के मापदंड?

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Tanveer Jafriकांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गत दिनों ब्रिटेन के प्रतिष्ठित एवं विश्व विख्यात शिक्षण संस्थान, कैंब्रिज विश्वविद्यालय तथा हाउस आॅफ कॉमन्स परिसर में स्थित ग्रैंड कमेटी रूम में लेबर पार्टी के भारतीय मूल के सांसद वीरेंद्र शर्मा की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान आमंत्रित अतिथि की हैसियत से दो अलग अलग व्याख्यान दिए। यहां उन्होंने अंतरराष्ट्रीय राजनीति के संबंध में जहां तमाम बातें कीं, वहीं उन्होंने यह भी कहा, ‘हर कोई जानता है और यह खबरों में भी है कि भारतीय लोकतंत्र दबाव में है और इस पर हमला हो रहा है…लोकतंत्र के लिए जरूरी ढांचे, मसलन संसद, स्वतंत्र प्रेस, न्यायपालिका सभी पर नियंत्रण हो रहा है, इसलिए हम भारतीय लोकतंत्र के बुनियादी ढांचे पर ही हमले का सामना कर रहे हैं।’ उन्होंने यह भी कहा कि भारत की लोकसभा में विपक्ष के लिए माइक अकसर ‘खामोश’ करा दिए जाते हैं। यहां राहुल ने इजरायली स्पाइवेयर ‘पेगासस’ का इस्तेमाल किए जाने का भी जिक्र किया। जिसके द्वारा विपक्षी नेताओं, अनेक पत्रकारों व प्रतिष्ठित लोगों की जासूसी करने का आरोप लगाया था।

राहुल गांधी ने इसी व्याख्यान में कन्याकुमारी से कश्मीर तक निकाली गयी अपनी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ का जिक्र करते हुए यह भी कहा कि ‘जब लोकतांत्रिक ढांचे पर हमला हो रहा है तो विपक्ष के तौर पर हमारे लिए संवाद करना बहुत मुश्किल हो जाता है। इसलिए हमने भारत की संस्कृति और इतिहास की तरफ मुड़ने का फैसला किया।

राहुल गांधी की भारत जोड़ा यात्रा की अपार सफलता से पहले से ही तिलमिलाई बैठी भारतीय जनता पार्टी को राहुल के कैंब्रिज विश्वविद्यालय में भारतीय लोकतंत्र पर मंडरा रहे कथित खतरों का जिक्र करना कतई नहीं भाया। स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर सरकार के अनेक मंत्रियों तक ने लोक सभा के निर्वाचित प्रतिनधि राहुल गांधी की आलोचना से लेकर उनसे मुआफी मांगने तक, बहुत कुछ कह डाला। लोक सभा व राज्य सभा से लेकर संसद के बाहर तक तमाम भाजपाई राहुल गांधी पर कुछ इस तरह और ऐसे अभद्र व अपमान जनक शब्दों के साथ हमलावर हुये गोया राहुल गांधी से बड़ा राष्ट्र विरोधी और देश का दुश्मन कोई दूसरा नहीं। कई दिनों तक संसद की कार्रवाई भी इसी मुद्दे को लेकर बाधित रही।

बहरहाल, राहुल गांधी के कैम्ब्रिज व्याख्यान के विरुद्ध मुखर होकर बोलने वालों में एक नाम भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर का भी था, जिन्होंने राहुल गांधी के विरुद्ध अनेक अमर्यादित टिप्पणियां कीं। प्रज्ञा ठाकुर ने कहा कि -‘राहुल गांधी को विदेशी धरती पर दिए गए उनके कुछ विवादास्पद बयानों के लिए देश से निकाल कर फेंक देना चाहिए। प्रज्ञा ठाकुर ने कथित चाणक्य नीति को उद्धृत करते हुए कहा कि ‘विदेशी महिला से उत्पन्न पुत्र कभी देशभक्त नहीं हो सकता।’

यहां प्रज्ञा ठाकुर द्वारा के एक सांसद होने के बावजूद पूर्व में दिए गए उनके अति विवादित एवं आपत्तिजनक बयानों को इसलिए याद किया जाना जरूरी है, ताकि यह समझा जा सके कि राहुल गांधी तथा उन्हें देश के बाहर निकाल फेंकने की बातें करने वाली प्रज्ञा ठाकुर के बयानों में वास्तव में राष्ट्र विरोधी बयानबाजी कौन करता रहा है। दो वर्ष पूर्व इन्हीं सांसद प्रज्ञा ने राष्ट्रपति महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देश भक्त बताया था। उन्होंने कहा था कि ‘नाथूराम गोडसे देशभक्त थे, देशभक्त हैं और रहेंगे।’

बाद में प्रज्ञा ने अपने इस बयान के लिए माफी मांग ली थी। प्रज्ञा ठाकुर के इस ‘माफी नामे’ के बावजूद स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसी समय एक निजी चैनल को दिए गए साक्षात्कार में प्रज्ञा के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, ‘गांधी जी, गोडसे के बारे में जो भी बातें कही गई हैं, जो भी बयान दिए गए हैं, ये भयंकर खराब हैं। ये घृणा के लायक हैं, आलोचना के लायक हैं। सभ्य समाज के भीतर इस तरह की भाषा नहीं चलती है। इस तरह की सोच नहीं चल सकती इसलिए ऐसा करने वालों को सौ बार सोचना पड़ेगा। प्रधानमंत्री को यहां तक कहना पड़ा था, ‘ उन्होंने मुआफी मांग ली, अलग बात है लेकिन मैं उन्हें मन से मुआफ नहीं कर पाऊंगा।’

यही प्रज्ञा ठाकुर थीं जिसने मुंबई हमले के शहीद हेमंत करकरे की शहादत का अपमान करते हुये कहा था कि ‘करकरे ने उन्हें प्रताड़ित किया था और उन्होंने उनके (करकरे के) सर्वनाश का श्राप दिया था, इसलिए आतंकवादियों ने उन्हें मार दिया।’ यही प्रज्ञा ठाकुर वर्ष 2008 में हुए मालेगांव विस्फोट के मामले में आरोपी हैं, जिस में कम से कम छह लोगों की मौत हो गई थी और 100 से अधिक लोग घायल हुए थे। प्रज्ञा इसी अपराध में अभी भी जमानत पर हैं। इन सब के अतिरिक्त भी वे अनेक बार सांप्रदायिकता व वैमनस्य फैलाने वाले फायर ब्रांड बयान देती रही हैं।

एक ओर तो प्रज्ञा के बयान उनके संस्कारों व कथित ‘देशभक्ति’ का परिचय कराते हैं, दूसरी ओर जिस राहुल को वह देश से निकाल फेंकने व ‘विदेशी महिला’ से उत्पन्न पुत्र होने के नाते उनके देशभक्त न होने जैसी निम्नस्तरीय भाषा का प्रयोग कर रही हैं, वह पंडित मोतीलाल व जवाहर लाल तथा फिरोज गांधी जैसे स्वतंत्रता सेनानियों व इंदिरा गांधी व राजीव गांधी जैसे शहीदों के वंशज हैं।

राहुल गांधी ने अपने उन्हीं संस्कारों की वजह से वर्तमान समय में अपनी जिम्मेदारियां महसूस करते हुए देश को सांप्रदायिक दुर्भावना को छोड़ एक सूत्र में पिरोने के उद्देश्य से भारत जोड़ो यात्रा जैसे साहसपूर्ण व कठिन कार्य का जोखिम उठाया। ऐसे में इस बात पर चिंतन जरूरी है कि आखिर ‘राष्ट्र भक्ति’ के माप दंड हैं क्या? राहुल गांधी का विपक्षी नेता के नाते सरकार व सत्ता से सवाल करना या गांधी के हत्यारे को महिमामंडित करना व शहीदों का अपमान करना?


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