Thursday, May 14, 2026
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धार्मिक धु्रवीकरण की दिशा में एक और कदम

SAMVAD


07 1चुनाव आयोग ने कर्नाटक विधानसभा चुनावों की तारीख की घोषणा कर दी है। राज्य में विधानसभा चुनाव हेतु 10 मई को केवल एक चरण में ही मतदान होगा। जबकि चुनाव के नतीजे 13 मई को आएंगे। चुनावों की तारीख की घोषणा से ठीक एक सप्ताह पूर्व राज्य की वर्तमान भारतीय जनता पार्टी की बासवराज बोम्मई सरकार ने धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए दिये जा रहे चार प्रतिशत आरक्षण को समाप्त करने की घोषणा की है। साथ ही आरक्षण के इस 4 प्रतिशत कोटे को राज्य के दो प्रमुख समुदायों को दिए जा रहे वर्तमान आरक्षण में जोड़ने की घोषणा भी कर दी। राज्य सरकार के इस निर्णय के बाद ओबीसी श्रेणी के 2बी वर्गीकरण के अंतर्गत राज्य के मुसलमानों को अब तक दिए जा रहे 4 प्रतिशत आरक्षण को अब दो बराबर हिस्सों में विभाजित कर दिया गया है।

वोक्कालिंगा और अन्य समुदाय के लिए पूर्व में दिया जा रहा चार प्रतिशत आरक्षण अब बढ़कर छह प्रतिशत हो जाएगा। साथ ही वीरशैव पंचमसाली और अन्य (लिंगायत) समुदाय जिन्हें राज्य में अब तक पांच प्रतिशत आरक्षण हासिल था, उन्हें अब सात प्रतिशत आरक्षण मिलने लगेगा। 1994 में जब एचडी देवगौड़ा कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने थे उसी के बाद 1995 में राज्य के मुसलमानों को आरक्षण देने का फैसला किया गया था। इसके तहत आरक्षण की कैटेगरी बी-2 बनाकर अलग से अल्पसंख्यकों को 4 फीसदी आरक्षण का प्रावधान रखा गया था। सच्चर कमेटी की रिपोर्ट के बाद रंगनाथ कमीशन ने मुसलमानों की दशा देखते हुये अपनी रिपोर्ट में मुस्लिमों को अलग से आरक्षण देने की सिफारिश की थी।

यही वह राज्य है, जहां गत वर्ष दक्षिणपंथियों ने कॉलेज में मुस्लिम लड़कियों के हिजाब पहनने का विरोध किया था उसके बाद यही हिजाब विवाद अंतर्राष्ट्रीय सुर्खियों में भी छाया था। इसी राज्य में अक्सर यही दक्षिणपंथी ताकतें शेर-ए-मैसूर स्वतंत्रता सेनानी टीपू सुल्तान का विरोध करती रहती हैं। सत्ता में आने के तुरंत बाद बीजेपी सरकार ने टीपू सुल्तान की जयंती समारोह को खत्म कर दिया था।

बीजेपी की इसी बोम्मई सरकार में ही इसी राज्य में हिजाब विवाद के अतिरिक्त मलाली मंदिर-मस्जिद विवाद, हलाल मांस, मुस्लिम कारोबारियों के बहिष्कार, कभी अजान का विरोध तो कभी हेडगेवार के भाषण को आधिकारिक तौर पर स्कूली पाठ में शामिल करने जैसी विवादस्पद बातों को लेकर काफी सांप्रदायिक तनाव रहा है।

इसके अतिरिक्त राज्य के तुमकुरु और शिमोगा में सावरकर और टीपू सुल्तान के पोस्टर को लेकर विवाद पैदा हुआ था और सांप्रदायिक हिंसा भी हुई थी। राज्य में हिंदू संगठन रेस्टोरेंट, पार्क, बार और पब आदि में युवक-युवतियों पर हमला करके मॉरल पुलिसिंग करने की कोशिश कर चुके हैं। इन सब के साथ यह भी अति महत्वपूर्ण यह कि पिछले दिनों इसी राज्य से होकर राहुल गांधी के नेतृत्व में भारत जोड़ो यात्रा गुजरी है ।

इस यात्रा ने राज्य में करीब 500 किलोमीटर का फासला तय किया है। 24 दिनों तक लगातार कर्नाटक से गुजरते हुये भारत जोड़ो यात्रा को प्रतिदिन अभूतपूर्व जन समर्थन हासिल हुआ। माना जा रहा है कि भारत जोड़ो यात्रा की सफलता और इस यात्रा से राज्य में कांग्रेसजनों के बढ़े हौसले आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को काफी लाभ पहुंचा सकते हैं। किसी समय में कर्नाटक कांग्रेस का अभेद दुर्ग माना जाता था। भाजपा इसी बात को लेकर भयभीत है।

अन्यथा देवगौड़ा सरकार द्वारा अल्पसंख्यकों को दिए गए चार प्रतिशत आरक्षण के लिए कांग्रेस पर ‘तुष्टिकरण’ जैसा आरोप लगाने की क्या जरुरत थी? परंतु भाजपा इस बात से वाकिफ है कि उसका हिंदूवादी वोट बैंक हिंदू हितों पर आधारित नहीं, बल्कि प्रखर मुस्लिम विरोध के फलस्वरूप हासिल होता है। गुजरात को संघ की प्रयोगशाला यूं ही नहीं कहा जाता। यहां भाजपा की मजबूती का आधार मुस्लिम विरोध और उन्हें हाशिये पर डालना ही था। यही वास्तविक गुजरात मॉडल है, जिसे पूरे देश में लागू करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

असम में बड़ी संख्या में मदरसों को बंद कराया जाना, भाजपा शासित विभिन्न राज्यों में जिलों, शहरों, कस्बों व स्टेशन्स के नाम बदला जाना, मुसलमानों के विरुद्ध खुले आम सार्वजनिक स्थलों से अनेकानेक विशिष्ट राजनैतिक व धार्मिक लोगों द्वारा विष वमन करना, दंगाइयों, मॉब लिंचिंग करने वालों को महिमामंडित करना, गोया किसी न किसी बहाने मुस्लिम विरोध का परचम बुलंद रखना। भारतीय जनता पार्टी इस समय महंगाई, बेरोजगारी से लेकर भारतीय इतिहास के सबसे बड़े आर्थिक घोटाले यानी अडानी प्रकरण को लेकर काफी दबाव में है।

पुरानी पेंशन बहाली को लेकर सरकारी कर्मचारी जगह-जगह आंदोलनरत हैं। किसान व छात्र भी सरकार से नाराज हैं। और पिछले दिनों सूरत की एक अदालत द्वारा राहुल गांधी को संसद की सदस्य्ता से अयोग्य ठहराये जाने का मामला भी नरेंद्र मोदी सरकार के लिए गले की फांस बन गया है।

इन परिस्थितियों में मुस्लिम विरोध व उत्पीड़न के साथ हिंदुत्ववाद की धर्म ध्वजा को बुलंद रखना केवल यही रणनीति भाजपा को फायदा पहुंचा सकती है। सरकार की तमाम नाकामियों के बीच कर्नाटक में मुसलमानों का आरक्षण खत्म किए जाने का मुद्दा राज्य में 10 मई को होने जा रहे विधानसभा चुनाव से लेकर 2024 के आम चुनावों तक एक मुद्दा जरूर रहेगा। इससे भाजपा को क्या लाभ होगा यह तो आने वाला वक़्त ही बताएगा, परंतु यह तो तय है कि कर्नाटक आरक्षण मुद्दा भाजपा के हिंदूवादी मतों के ध्रुवीकरण के प्रयासों की दिशा में ही एक और कदम है।


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