Saturday, March 28, 2026
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वित्तीय आरोपों से घिरे डीएन पॉलिटेक्निक के प्राचार्य

  • मुख्यमंत्री से की शिकायत शासन ने गठित की कमेटी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: परतापुर स्थित डीएन पॉलिटेक्निक के प्राचार्य वीरेन्द्र आर्य के खिलाफ मुख्यमंत्री से वित्तीय अनियमितता की शिकायत की गई है। मुख्यमंत्री ने इस मामले की जांच के लिये तीन सदस्यीय कमेटी बना दी है। इस कमेटी में प्रधानाचार्य राजकीय पॉलिटेक्निक गाजियाबाद और कोषाधिकारी जिला कोषागार मेरठ को रखा गया है। इस कमेटी की अध्यक्षता संयुक्त निदेशक प्राविधिक शिक्षा करेंगे। प्राचार्य पर आरोप है कि साढ़े तीन करोड़ रुपये खर्च करने के आदेश को दरकिनार कर आठ करोड़ रुपये खर्च कर दिये गए हैं।

पॉलिटेक्निक के प्राचार्य वीरेन्द्र आर्य ने प्रबन्ध तंत्र से मिलकर अपने व्यक्तिगत हित में 1,35,000/रुपये उच्च न्यायालय में वाद दायर करने में खर्च किये गये। जिसकी अनुमति भी शासन या निदेशक से नहीं ली गई। प्रधानाचार्य ने स्व वित्त एवं छात्रों की भविष्य निधि से संस्था मे लगभग आठ करोड़) से अधिक रुपयों से निर्माण व अन्य कार्य कराये है, जिनमें से लगभग 3.5 करोड़ की अनुमति शासन व निदेशक से ली गई है।

बाकी लगभग चार करोड़ से अधिक रुपये की धनराशि की अनुमति शासन या निदेशक से नही ली गई। इस धनराशि के रिकॉर्ड/कागजात प्राचार्य के द्वारा समिति को उपलब्ध नहीं करा रहे है। संस्था मे सभी निर्माण कार्य एक ही ठेकेदार से कराये गये है। एक लाख से अधिक खर्च के लिये शासन या निदेशक से अनुमति आवश्यक है। प्राचार्य पर आरोप लगाया गया है कि प्रधानाचार्य कक्ष पर लगभग 12 लाख रुपये से अधिक खर्च करके आलीशान कक्ष बनवाया है।

जिसकी अनुमति भी शासन या निदेशक से नहीं ली गई है। संस्था में 55 वर्ष से अधिक जर्जर भवन के ऊपर बिना कालम एवं बीन से कई मंजिला भवन मानक के विपरीत बनाये है। जिसमें संस्था में कभी भी कोई हादसा हो सकता है। प्रबन्ध समिति/अध्यक्ष की प्रबन्ध कार्यकारिणी फर्मस सोसाइटी एंड विटस मेरठ से सन 2010 से 2022 तक पंजीकरण नहीं है। प्रबंध समिति के अध्यक्ष का कार्यकाल 30 जून 2020 को समाप्त हो गया था।

वित्तीय अनियमितताएं एवं नियुक्तियों किये जाने के कारण शासन ने समिति/अध्यक्ष का कार्यकाल नहीं बढ़ाया, परन्तु प्रबन्ध तंत्र द्वारा 1 जुलाई 2020 से आज तक अवैध कार्य किये जा रहे हैं। इस अवधि में अध्यक्ष की अनुमति से निर्माण कार्य कराये है। मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि अवैध नियुक्तियों की जांच जिलाधिकारी, मेरठ द्वारा तीन साल से की जा रही है।

अभी तक जांच पूरी नहीं हुई है। जबकि शासन ने प्रथम दृष्टया नियुक्तियों को गलत माना है। प्रधानाचार्य एवं प्रबन्ध तन्त्र द्वारा प्रशासन पर दबाव डलवा कर नियुक्तियों की जांच नहीं होने दे रहे हैं। प्रधानाचार्य वीरेन्द्र आर्य की मूल नियुक्ति प्रवक्ता इलेक्ट्रोनिक्स के पद पर हुई थी, जबकि यह पद शासन से आज तक सृजित नहीं है।

इसका अवैध लाभ पाकर प्रधानाचार्य का पद हासिल किया गया है। शिकायतकर्ताओं कुलदीप शर्मा, गुरुचरण बिल्टोरिया, सुभाष रमन एडवोकेट के द्वारा अपने अपने शपथ जांच समिति/संयुक्त निदेशक प्राविधिक शिक्षा मेरठ के समक्ष दे दिये गये हैं। परन्तु अध्यक्ष जांच समिति प्रकायत की जांच किये बिना ही शासन को वापिस भेजने की कोशिश की जा रही है।

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