Saturday, March 28, 2026
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अक्षय तृतीया पर छह योगों का महायोग, गूजेंगी शहनाई

  • 22 अप्रैल को मनाया जाएगा अक्षय तृतीया का पर्व

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: अक्षय तृतीया बैसाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है। इसबार यह शुभ तिथि 22 अप्रैल को पड़ रही है। अक्षय तृतीया वाले दिन जहां लोग सोने-चांदी के आभूषण खरीदते है वहीं इस दिन बिना सूझे होने वाली शादियों की भी पूरे शहर में धूम रहती है। यानि इस दिन बिना मुर्हूत देखे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश आदि मांगलिक कार्य किए जा सकते है। इस दिन नए कार्य की शुरुवात करना बेहद शुभ माना जाता है।

इस वर्ष अक्षय तृतीया पर शहर में 500 से अधिक शादियां होने की उम्मीद की जा रही है। ऐसे में शहर का शायद ही कोई इलाका बचेगा जहां बैंडबाजे की धुन पर बराती थिरकते नजर न आए। शादियों के लिए होटल, मंडप आदि में बुकिंग पहले ही हो चुकी है। राधा गोविंद मंडप के मालिक मनोज कुमार ने बताया कि शहर से लेकर देहात तक जबरदस्त बुकिंग है। धर्मशालाओं और पार्कों में भी टेंट लगाकर विवाह समारोह होंगे।

अक्षय तृतीया का महत्व

यह तिथि स्वयं सिद्ध अबूझ मुहूर्त मानी गई है। इस दिन कोई भी शुभ मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, घर, भूखंड या वाहन आदि की खरीदारी से सम्बंधित कार्य किए जा सकते हैं। तृतीया तिथि को पार्वती जी ने अमोघ फल देने की सामर्थ्य का आशीर्वाद दिया था। उस आशीर्वाद के प्रभाव से इस तिथि को किया गया कोई भी कार्य निष्फल नहीं होता।

व्यापार आरम्भ, गृह प्रवेश, वैवाहिक कार्य, सकाम अनुष्ठान, दान-पुण्य, पूजा-पाठ अक्षय रहता है अर्थात वह कभी नष्ट नहीं होता। धर्मराज को इस तिथि का महत्व समझाते हुए माता पार्वती कहती हैं कि कोई भी स्त्री, जो किसी भी तरह का सुख चाहती है उसे यह व्रत करते हुए नमक का पूरी तरह से त्याग करना चाहिए। स्वयं में भी यही व्रत करके मैं भगवान शिव के साथ आनंदित रहती हूँ। विवाह योग्य कन्याओं को भी उत्तम वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत करना चाहिए।

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जिनको संतान नहीं हो रही हो वे स्त्रियां भी इस व्रत करके संतान सुख प्राप्त कर सकती हैं। प्रजापति दक्ष की पुत्री रोहिणी इसी व्रत के कारण अपने पति चंद्र की सबसे प्रिय रानी रहीं। स्वर्ग के राजा इंद्र की पत्नी देवी इंद्राणी इसी व्रत के पुण्य प्रताप से जयंत नामक पुत्र की मां बनी। देवी अरुंधति ने यही व्रत करके अपने पति महर्षि वशिष्ठ के साथ आकाश में सबसे ऊपर का स्थान प्राप्त किया।

शुभ योग में करे भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा

ज्योतिषाचार्य विष्णु शास्त्री के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन बिना पंचांग देखे कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य किया जा सकता है। इस दिन किया गया दान भी अक्षय फल प्रदान करता है। इस दिन सोना खरीदना भी शुभ माना जाता है और भगवान विष्णु और लक्ष्मी की पूजा करने से सभी पर मां की कृपा बनी रहती है। अक्षय तृतीया पर छह शुभ योग बन रहे है।

आयुष्मान योग सुबह से लेकर 9 बजकर 26 मिनट तक है। उसके बाद सौभाग्य योग प्रारंभ होगा, जो पूरी रात रहेगा। त्रिपुष्कर योग सुबह 5 बजकर 49 मिनट से 7 बजकर 49 मिनट तक है। रवियोग रात 11 बजकर 24 मिनट से अगली सुबह 5 बजकर 48 मिनट तक है। बता दें कि अक्षय तृतीया के दिन को बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन किसी कार्य को करने के लिए मुहूर्त देखने की जरुरत नहीं होती।

स्न्नान-दान और पूजा का महत्व

अक्षय तृतीया के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर समुद्र, गंगा या किसी भी पवित्र नदी अथवा घर में ही स्नान करने के बाद भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की शांत चित्त होकर पूजा करने का विधान है। लक्ष्मीनारायण के साथ-साथ ही सुख-सौभाग्य-समृद्धि हेतु इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती जी का पूजन भी किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार इस माह में प्याऊ लगाना, छायादार वृक्ष की रक्षा करना, पशु-पक्षियों के खान-पान की व्यवस्था करना, राहगीरों को जल पिलाना जैसे सत्कर्म मनुष्य के जीवन को समृद्धि के पथ पर ले जाते हैं।

स्कंद पुराण के अनुसार इस माह में जल दान का सर्वाधिक महत्व है अर्थात अनेकों तीर्थ करने से जो फल प्राप्त होता है वह केवल वैशाख मास में जलदान करने से प्राप्त हो जाता है। इसके अलावा छाया चाहने वालों को छाता दान करना और पंखे की इच्छा रखने वालों को पंखा दान करने से ब्रह्मा, विष्णु और शिव तीनों देवों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। जो विष्णुप्रिय वैशाख में पादुका दान करता है, वह यमदूतों का तिरस्कार करके विष्णुलोक को जाता है।

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