Tuesday, April 21, 2026
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5 नगर पंचायत, जहां अवाम ने दी निर्दलियों को कमान

  • सभी पार्टियों ने करीब-करीब अपने प्रत्याशी उतारे थे चुनाव मैदान में

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: जनपद की पांच नगर पंचायत ऐसी हैं, जहां पर पार्टी प्रत्याशियों को जनता ने पूरी तरह से नकार दिया और निर्दलीय प्रत्याशियों पर ही भरोसा किया। सभी पार्टियों ने करीब-करीब अपने प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारे थे, लेकिन जनता ने पार्टी प्रत्याशियों को पूरी तरह से नकारते हुए निर्दलीय प्रत्याशियों को जीत दर्ज करा दी। अब देखना यह है कि पार्टी संगठन क्या इस पर कार्य करेगा कि क्या वजह रही पार्टी के प्रत्याशी को जनता ने वोट नहीं दी? संगठन के स्तर से कमी रही या फिर प्रत्याशी कमजोर रहे? इन तमाम मुद्दों पर समीक्षा करने की आवश्यकता है।

दरअसल, खिवाई नगर पंचायत में शमीम निर्दलीय प्रत्याशी थे, जिन्होंने जीत दर्ज की। यहां पर भाजपा, सपा, बसपा सभी के प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे, लेकिन निर्दलीय प्रत्याशी शमीम पर ही जनता ने भरोसा व्यक्त किया। इसी तरह से हर्रा नगर पंचायत में भी निर्दलीय प्रत्याशी कुंवर मोहम्मद अली को आवाम ने सिरमौर बना दिया। दरअसल, मोहम्मद अली वैसे तो पुराने समाजवादी पार्टी से जुड़े रहे हैं, लेकिन वर्तमान में उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की।

करनावल, नगर पंचायत ने एक तरह से इतिहास ही बना दिया। यहां पर भाजपा के बागी लोकेंद्र सिंह चुनाव लड़ रहे थे। भाजपा ने यहां सतीश चेयरमैन को टिकट दिया था, लेकिन लोकेंद्र सिंह ने भाजपा पार्टी नेताओं के खिलाफ बगावत का झंडा उठा लिया तथा निर्दलीय रूप में लोकेंद्र सिंह ने नामांकन दाखिल किया। लोकेंद्र सिंह को जनता ने पूरा समर्थन देते हुए जीत दर्ज कराई। यहां भाजपा को पराजय का मुंह देखना पड़ा।

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भाजपा के तमाम जनपद स्तर के बड़े नेता भी लोकेन्द्र को नामांकन वापस कराने के लिए दबाव बनाने भी पहुंचे थे, लेकिन लोकेन्द्र सिंह अडिग रहे और उन्हें मालूम था कि जनता उनके साथ है, फिर नामांकन कैसे वापस लिया जाए? लोकेंद्र सिंह ने जीत दर्ज कर भाजपा नेताओं को एक तरह से जवाब दे दिया हैं। इसी तरह से दौराला नगर पंचायत पर भी निर्दलीय देवेंद्र सिंह ने जीत दर्ज की। उनको भी जनता ने स्वीकारा।

यहां भाजपा, सपा और बसपा व अन्य पार्टियों के प्रत्याशियों को जनता ने पूरी तरह से नकार दिया। शाहजहांपुर नगर पंचायत में भी निर्दलीय चुनाव लड़ रहे बशी रहमान को आवाम ने चुना, जिसके चलते जीत दर्ज कर एक इतिहास ही बना दिया। इस तरह से जनपद में पांच नगर पंचायतों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा दिया। भले ही उनके सामने कितनी भी बड़ी पार्टी का प्रत्याशी चुनाव लड़ रहो हो, लेकिन निर्दलीय प्रत्याशियों के सामने बड़ी पार्टियों के नेता भी टिक नहीं पाये।

छह नगर पंचायत ऐसी जहां महिलाएं बनी सिरमौर

छह नगर पंचायत ऐसी, जहां महिलाएं सिरमौर बनी। शहर की सरकार अब छह नगर पंचायतों में महिलाएं ही चलाएंगी। दरअसल, जनता ने महिलाओं को बागडोर सौंपी तथा उनसे विकास की उम्मीद जताई है। हालांकि सरधना नगर पालिका परिषद की कमान सबीला बेगम को लगातार दूसरी बार मिली है। वैसे उनका परिवार चार बार चेयरमैन का प्रतिनिधित्व कर चुका है। सबीला समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी थी।

किठौर में नाविदा ने जीत का परचम लहरा दिया। नाविदा बसपा की प्रत्याशी थी और बसपा राज्यसभा सांसद मुनकाद अली की पुत्रवधू है। हालांकि किठौर में भी बड़ी खींचतान रालोद और बसपा के बीच रही, लेकिन रालोद को यहां गठबंधन होने के बावजूद सपा नेताओं का साथ नहीं मिला। एक भी मंच सपा नेताओं ने रालोद के साथ साझा नहीं किया। इसी गुटबाजी के चलते मुनकाद अली की पुत्रवधू नाविदा को जीत हासिल हुई।

सिवालखास में भी आॅल इंडिया फारवर्ड ब्लॉक का शानदार प्रदर्शन रहा, यहां फुरकाना ने जीत दर्ज की। लावड़ में बसपा प्रत्याशी आफताब बेगम ने जीत दर्ज की, वहीं हस्तिनापुर में सुधा खटीक ने जीत दर्ज की। सुधा खटीक प्रदेश के राज्य मंत्री दिनेश खटीक की सगी बहन है। खिवाई में शमीम ने निर्दलीय प्रत्याशी होने के बाद भी जीत दर्ज की। इस तरह से छह महिलाएं शहर की सरकार को संभालेंगी। विकास के रास्तों को कैसे खोला जाएगा, इसके लिए महिलाएं जो सिरमौर बनी है, वो रास्ता दिखाएंगी।

रालोद का रहा अच्छा प्रदर्शन 22 पालिका और नगर पंचायत जीते

राष्ट्रीय लोक दल का निकाय चुनाव में प्रदर्शन शानदार रहा। रालोद नेता इस जीत से जोश में हैं तथा समरसता यात्रा 19 से आरंभ कर रहे हैं। इसकी शुरुआत बागपत से होगी। गांवों में रालोद सुप्रीमो जयंत चौधरी रात बितायेंगे। रालोद के जो प्रत्याशी हारे हैं, उनका अंतर भी कम रहा हैं। नगर निगम मेरठ पार्षद पद के लिए भी रालोद का खाता खुल गया। वैसे कई प्रत्याशियों का अंतर हार-जीत का कम ही रहा।

रालोद नेताओं ने निकाय चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद एक सूची जारी की है, जिसमें दावा किया हैं कि रालोद ने बागपत नगर पालिका परिषद रियाजुद्दीन एडवोकेट, नगर पालिका परिषद बड़ौत बबीता तोमर, नगर पालिका परिषद लोनी रंजीत धामा, नगर पालिका परिषद खतौली से शाहनवाज लालू, नगर पंचायत जानसठ डा. आबिद, नगर पंचायत बनत कुसुम देवी, नगर पंचायत नौगांवा सादात सुबिन जैदी, नगर पालिका परिषद नहटौर अनस इकरार, नगर पालिका परिषद धामपुर गुर्जर रवि चौधरी, नगर पालिका परिषद बदायूं फातमा राजा,

नगर पंचायत नंद गांव मथुरा मंजू चौधरी, नगर पालिका परिषद इगलास कमलेश शर्मा, नगर पंचायत गढ़ी पुख्ता शामली प्रमोद कुमार, नगर पंचायत अमीर नगर सराय सुनीता मलिक, नगर पंचायत मुरसान हाथरस देशराज सिंह, नगर पंचायत पतला नगर गाजियाबाद रीता चौधरी, नगर पंचायत अछनेरा आगरा ओमवती, नगर पंचायत बाबूगढ़ छावनी हापुड़ सुधा तोमर,

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कैराना नगर पालिका परिषद से शमशाद अंसारी, जट्टारी अलीगढ़ से प्रदीप बंसल, नगर पंचायत खैर अलीगढ़ संजय शर्मा, बुलंदशहर औरंगाबाद नगर पंचायत प्रत्याशी सलमा, अंबेहटा पीर नगर पंचायत रेशमा परवीन, रटौल नगर पंचायत जिला बागपत जुनैद फरीदी ने जीत दर्ज की हैं। रालोद नेताओं ने कहा कि निकाय चुनाव में उनका प्रदर्शन अच्छा रहा।

10 प्रत्याशियों की हुई जमानत जब्त, 38 हजार वोट भी लिये

मेयर के चुनाव में इस बार जबरदस्त उलटफेर हुआ और समाजवादी पार्टी के सपने चकनाचूर हो गए। भले भाजपा प्रत्याशी हरिकांत अहलूवालिया दोबारा मेयर बने लेकिन एमआईएमईएम प्रत्याशी मौहम्मद अनस ने 1.28 लाख वोट लेकर सबको चौंका दिया था। इनके अलावा दस प्रत्याशियों की जमानतें भी जब्त हुई। हालांकि इन प्रत्याशियों ने करीब 38 हजार वोट भी हासिल किये।

इन जमानत जब्त वालों में कांग्रेस प्रत्याशी भी शामिल है। मेयर के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी नसीम कुरैशी 15473 वोट मिले थे। आप प्रत्याशी ऋचा सिंह को 6257, केसर अब्बास 1828,शकील मलिक को 1412, अफजाल को 1721, अमीर अहमद 717, अनमोल 2046, प्रदीप कुमार 5352, मुक्ता चौधरी 1284, विकास मावी 545 और सुरेन्द्र सिंह को 1320 वोट मिले और इनकी जमानत भी जब्त हो गई।

इस बार निर्दलीय प्रत्याशियों की संख्या भी पिछली बार से ज्यादा है। दरअसल कांग्रेस के प्रत्याशी को जितने वोट मिले हैं उतने वोटों की भी उम्मीद नहीं थी। मुस्लिम वोटों का जिस तरह धु्रवीकरण हुआ और एमआईएमईएम प्रत्याशी अनस को 128547 वोट मिले उसने कई उम्मीदवारों के खेल बिगाड़ दिये।

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