Tuesday, April 28, 2026
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‘कथा संवाद’ के विमर्श के केंद्र में रही कथ्य की विविधता

  • ‘कथा संवाद’ जैसे मंच नए रचनाकारों को गढ़ने का काम करते हैं: रवि कुमार सिंह

  • जटिलता के बजाए सहजता को बनाए लेखन का आधार: प्रितपाल कौर

विशेष संवाददाता |

गाजियाबाद: परंपरा और सिद्धांत के दायरे से मुक्त लेखन ही कालजई लेखन को जन्म देता है। ‘कथा रंग’ के ‘कथा संवाद’ को संबोधित करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार एवं कार्यक्रम अध्यक्ष रवि कुमार सिंह ने कहा कि हर दौर में लेखकों पर अपने परिवेश का दबाव रहता है। लेकिन, खास विचारधारा से प्रभावित लेखन न तो अधिक समय तक विमर्श में रहता हैं और न ही इतिहास में जगह बना पाता है। उन्होंने कहा कि रचनाकार को सिद्धांत व परंपरा में बंधने के बजाय मुक्त भाव से लिखना चाहिए। मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध लेखिका प्रितपाल कौर ने कहा कि रचनाकारों को जटिलता से बच कर अपने लेखन को सहज बनाना चाहिए।

होटल रेडबरी में आयोजित कथा संवाद में श्री सिंह ने कहा कि “कथा संवाद” में सुनी गई कहानियां पूरे समाज का बयान हैं। मौजूदा दौर में साहित्य के साथ जहां विभिन्न प्रयोग हो रहे हैं वहां इस तरह की कार्यशालाएं नए रचनाकारों को गढ़ने के साथ कहन का सलीका भी सिखाती हैं। ऐसे मंचों पर नए रचनाकारों का आना बेहतर भविष्य की ओर संकेत करता है। कथा संवाद की शुरूआत सुप्रसिद्ध सिने अभिनेता रवि यादव की दो कहानियों ‘छोटा आदमी’ और ‘छिपकली देवी’ से हुई।

सुप्रसिद्ध आलोचक व व्यंग्यकार सुभाष चंदर ने कहा कि रवि यादव की पहली कहानी में कम शब्दों में साहित्यिक मूल्यों का प्रस्तुतिकरण कहानी को पूर्णता की ओर ले जाता है। जबकि ‘छिपकली देवी’ अभी कहानी और व्यंग्य के बीच में विचरण कर रही है। जिसमें विस्तार की संभावनाएं हैं। सुश्री कौर ने कहा कि रवि यादव की सूक्ष्म दृष्टि इस बात का संकेत है कि उनमें भविष्य का बड़ा लेखक बैठा है।

रवि कुमार सिंह ने कहा कि ‘छिपकली देवी’ इस बात का सशक्त उदाहरण है कि आडंबर और पाखंड हमारी आस्था से आगे निकल गया है। हम लोग ‘मन चंगा कटौती में गंगा’ जैसी अवधारणाओं से दूर होते जा रहे हैं। वरिष्ठ रचनाकार नेहा वैद की शीर्षक विहीन कहानी पर भी लंबा विमर्श हुआ। संयोजक आलोक यात्री ने कहा कि कहानी में पात्रों के चरित्र के साथ मां की विवशता का भी मुखरता से चित्रण होना चाहिए।

रश्मि वर्मा की कहानी ‘लव यूं दादी’ पर चर्चा के दौरान सुप्रसिद्ध लेखक अशोक मैत्रेय ने कहा कि कहानी तीन पीढ़ियों के बीच का सेतु है। जो कालावधि के साथ सामंजस्य की मांग करती है। शिक्षाविद राजीव पांडेय ने भाषा के विचलन और अतिरेक को रेखांकित किया। कहानी की भाषा के समर्थन में रंगकर्मी अनिल शर्मा ने कहा कि वैश्वीकरण के इस दौर में हम भाषा के दायरे में नहीं बंध सकते। संस्था के अध्यक्ष शिवराज सिंह की कहानी ‘शायद’ एक सुर से सराही गई।

सुप्रसिद्ध लेखिका मनु लक्ष्मी मिश्रा की कहानी ‘धर्म परिवर्तन’ पर विमर्श की शुरूआत करते हुए वागीश शर्मा ने कहा कि मनु लक्ष्मी मिश्रा ने कहानी का विषय जितना नाजुक चुना है, उस पर उतनी ही सतर्कता से लेखनी चलाई है। कार्यक्रम अध्यक्ष श्री सिंह ने कहा कि कहानी इस बात की चुगली करती है कि इसका ट्रीटमेंट पहले से ही निर्धारित कर लिया गया है। रंगकर्मी अक्षयवरनाथ श्रीवास्तव ने फिल्म ‘जान है तो जहान है’ की पटकथा के अंश का पाठ किया।

कार्यक्रम का संचालन रिंकल शर्मा ने किया। विमर्श में सुरेंद्र सिंघल, डॉ. बीना शर्मा, सत्य नारायण शर्मा, सुभाष अखिल, सीमा सिकंदर ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर शकील अहमद, प्रभात चौधरी, मनीषा मनु गुप्ता, प्रेम सागर प्रेम, वीरेंद्र सिंह राठौर, प्रताप सिंह व भारत भूषण बरारा सहित बड़ी संख्या में साहित्य अनुरागी उपस्थित थे।

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