Thursday, March 26, 2026
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प्रदेश के सबसे बड़े राशन घोटाले की जांच ठंडे बस्ते में

  • भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी भी कर चुके हैं मुख्यमंत्री से शिकायत
  • एसटीएफ समेत क्राइम ब्रांच की टीम पूर्व में कर चुकी है मामले की जांच
  • 350 करोड़ के राशन आपूर्ति घोटाले की जांच 31 महीने बाद भी अधर में लटकी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए नित नए प्रयास कर रहे हैं, बावजूद इसके प्रदेश के सबसे बड़े 350 करोड़ के राशन आपूर्ति घोटाले की जांच अधर में लटकी पड़ी है। सबसे पहले एसटीएफ ने इस मामले को खोलते हुए दो लोगों को हिरासत में लिया था। जिस पर शासन ने इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी थी।

बाद में नए शासनादेश के चलते इस मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्लू) को सौंपी गई थी। उक्त घोटाला तो वर्ष 2016 में शुरू हो गया था, लेकिन जनवरी 2020 में मामला खुलकर सामने आने के बाद से 31 महीने बीत जाने के बाद भी आज तक इस बड़े घोटाले की जांच अधर में लटकी हुई है। इस मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन भी किया गया था।

जुलाई 2020 में प्रदेश के सबसे बड़े 350 करोड़ के राशन आपूर्ति घोटाले की बात खुलकर सामने आई थी। हालांकि इस घोटाले की शुरुआत वर्ष 2018 में हो चुकी थी। जिसमें अकेले मेरठ में 120 आधार कार्डों से 27 हजार लोगों का राशन फर्जी तरीके से निकाला गया था। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी द्वारा प्रदेश के कई जिलो में अपात्र लोगों के नाम पर फर्जी तरीके से राशन निकालने क ी पूर्व में मुख्यमंत्री से शिकायत भी की गई थी। इससे पूर्व सबसे पहले एसटीएफ ने मामले को लखनऊ में खोला था, जिसमें दो लोगों को हिरासत में लिया गया था।

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हाईकोर्ट की निगरानी में इस मामले की जांच की जा रही थी। इस दौरान एक नए शासनादेश के चलते इस मामले की जांच एसटीएफ से लेकर क्राइम ब्रांच को सौंपी गई थी। जांच में पाया गया था कि आपूर्ति कार्यालय पर तैनात एक प्राइवेट कर्मचारी के पास पॉस मशीनों का पासवर्ड था, मशीनों को आपूर्ति कार्यालय में मंगवाकर पासवर्ड से लॉक को खोला एवं बंद किया जाता था। तत्कालीन डीएसओ के साथ कार्य करने वाले कं प्यूटर आॅपरेटर के बाद क्राइम ब्रांच की टीम ने पूर्ति निरीक्षक की आईडी पर कार्य करने वाले जाकिर कालोनी निवासी जुल्फ ीकार एवं रशीद नगर निवासी कोटेदार सादिक को गिरफ्तार कर लिसाड़ी गेट थाने में बंद कराया था।

बाद में उन्हें जेल भेज दिया गया था, लेकिन इस मामले में आधार बनाने वाली कंपनियों ने क्राइम ब्रांच का सहयोग नहीं किया। जिसके चलते शासन स्तर से इस मामले की जांच क्र ाइम ब्रांच लेकर आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्लू) को सौंपी गई थी, लेकिन मामला सामने आने के बाद से 31 महीने बीतने के बाद भी इस घोटाले की जांच अभी तक अधर में लटकी हुई है। एसपी क्राइम अनित कुमार ने बताया था कि इस बीच 81 मुकदमे दर्ज किये गये है

जिनमें चार्ज सीट दाखिल हो चुकी है। वहीं यह बात भी सामने आई थी कि कई मुकदमों में सिर्फ कोटेदारों को नामजद किया गया है। इस मामले में संलिप्त तत्कालीन आपूर्ति विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों को नामजद नहीं किया गया। अब देखना यह है कि आखिर कब तक इस बड़े राशन आपूर्ति घोटाले की जांच पूरी होती है। इस बाबत आपूर्ति विभाग के अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।

इस मामले में ईओडब्लू से विवेचना चल रही है, सारा स्टेटस वहीं से पता चल पाएगा, हमारे पास इसका स्टेटस उपलब्ध नहीं है। -अनित कुमार, एसपी क्राइम, मेरठ

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