Wednesday, March 25, 2026
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श्वान-मानव सह संबंध और हम

RAVIWANI


mukeshछब्बीस अगस्त का सूर्य डूबते-डूबते राष्ट्रीय श्वान दिवस बीत गया। दिन भर सिर्फ और सिर्फ कुत्तों की बातें हुर्इं। डिजास्टर मैनेजमेंट की एक वीडियो खासी चर्चित रही, जिसमें कुछ लोगों को नाले में गिरे एक कुत्ते को मानव श्रंखला बना कर निकालते हुए दिखाया गया है। कुछ लोग अपने स्वर्गवासी कुत्ते को श्रद्धांजलि अर्पित करते करते भावुक हुए तो उधर डॉग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में दिन भर उत्सव का माहौल रहा। आॅफिसों में लोग दिन भर अपने प्रिय पालतू कुत्तों के खान-पान, नहान-धोन, खरीद- फरोख्त, सोने-जागने, खिलंदरेपन की आदतों की बातें करते रहे।

महिलाओं की राजकीय बैठकों में हुई चर्चाओं से भी कुत्तों को लेकर सामान्य समाज का बड़ा ज्ञानवर्धन हुआ। पता चला कि मिसेज वर्मा का कुत्ता शाम को सिर्फ सलाद ही खाता है जबकि मिसेज सिंह का कुत्ता गर्मी में एसी और सर्दी में ब्लोअर के बिना सो ही नहीं सकता। मिसेज मांगे का कुत्ता और भी कमाल।

अगर मिसेज मांगे उसके साथ डाइनिंग टेबल पर बैठ कर अपनी स्पून से न खिलाएं तो वह खाना ही नहीं खाता। और मिसेज दुलारी का कुत्ता! रोज शाम को मैडम के साथ जाकर अपनी पसंद की सब्जी खरीद कर लाता है। अपने लिए शैंपू और साबुन भी वह डिपार्टमेंटल स्टोर जाकर खुद पसंद करता है।

इस तमाम आयोजन और ज्ञान वर्धन के बीच मुझे अपने पड़ोसी तोताराम जी की याद आ गई और मैंने तय किया कि शाम को तोताराम जी से एक मुलाकात लाजमी है। शाम को उनके घर का रुख किया ही था कि सप्ताह में दो बार नियमित रूप से घटने वाली घटना साकार रूप ले गई और तोताराम जी मुख्य द्वार पर प्रगट हुए-‘क्या बताएं यार! इस औरत ने….।’

लेकिन उनकी बात पूरी होने से पहले ही अपन चिल्ला पड़े-‘बधाई हो! तोताराम जी, राष्ट्रीय श्वान दिवस की बधाई हो।’ ‘अरे रे रे़, श्वान दिवस की बधाई मुझे क्यों दे रहे हो?’ मैंने बधाई का श्रेय विनम्रता पूर्वक श्रीमती तोताराम के सद्कर्मों को समर्पित किया और बोला-‘आप ने अभी अभी तो कहा कि भाभी जी ने आपको….।

‘तो तुम्हें श्वान और कुत्ते में अंतर समझ नहीं आता? हैं? राष्ट्रीय श्वान दिवस है आज। और तुम्हारी भाभी जो मुझे बनाती है, वह है कुत्ता। न तो श्वान और न ही राष्ट्रीय। यह दिवस सिर्फ उनके लिए है जो श्वान हों और राष्ट्रीय स्तर के हों। पता सता है नहीं तुमको कुछ।’

‘ठीक है…ठीक है लेकिन अंग्रेजी में तो सब डॉग ही कहलाए जाएंगे ना!’ तोताराम जी के वक्तव्य में एजुटेनमेंट की संभावनाएं तलाशते हुए हमने उन्हें अंग्रेजी में घसीट लिया। सुनते ही तोताराम जी आपा खो बैठे-‘अब यार, तुम भी। ये इतने सारे लोग कितने कुत्ते पालते हैं पड़ोस में, किसी के मुंह से सुना कि हमारा कुत्ता? किसी को बोल कर देखना कि तुम्हारा कुत्ता, तुम्हारा डॉग, झगड़ा न हो जाए तो कहना।

श्वान का मतलब होता है डॉगी। ऐसा इंसानों में भी होता है। जिन लोगों के नाम के बाद ‘साहब’ वगैरह लगता है, उनका कुछ स्तर होता है। बाकी लोगों के नाम के आगे पीछे ओ, अबे आदि लगाए जाते हैं। बस यही फर्क श्वान और कुत्ते में है और यही फर्क डॉगऔर डॉगी में भी है।’

अभी तक अपन तोताराम जी को हल्के में ले रहे थे लेकिन उनकी व्याख्या सुनकर हमारे ज्ञान चक्षु खुले। और अधिक ज्ञान प्राप्ति के उद्देश्य से हमने सवाल दागा-‘लेकिन कुत्तों में भी थोड़ी बहुत श्वानता और श्वानों में थोड़ा बहुत कुत्तापन तो जरूर होता होगा?’ उन्होंने एक रहस्य भरी मुस्कान के साथ हमें देखा और बोले-‘देखो, जब कोई श्वान राष्ट्रीय अथवा अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच जाता है तो उसके कुत्तेपन को कम करने अथवा छिपाने के लिए बाकायदा ट्रेनिंग चलाई जाती है।

वहीं दूसरी ओर कुत्तों की श्वानता को दबाया या नजरंदाज किया जाता है और उनके कुत्तेपन को अधिक से अधिक प्रमोट किया जाता है, ताकि उनको ऊपर आने से रोका जा सके और श्वानता के पिरामिड को उल्टा होने से बचाया जा सके।’
‘तो वो जो एक कुत्ते के रेस्क्यू का वीडियो…?’

‘अरे, श्वान था भाई। किसी बड़े स्तर का रहा होगा। कुत्तों को बचाने के लिए तो हाईवे पर गाड़ियों में ब्रेक भी नही लगाते लोग।’ इतना कह कर तोताराम जी ने अपना हाथ पजामे की जेब में डाला और एक पुडियानुमा चीज निकाली। हम समझ गए कि तोताराम जी एक कमर्शियल ब्रेक लेने के मूड में आ चुके हैं।

ब्रेक की प्रक्रिया के अंतिम चरण तक पहुंचते ही मैने अगला प्रश्न पूछ लिया-‘तो कुत्तों और इंसानों के सह-अस्तित्व के चलते कुत्तों में इंसानपन और इंसान में कुत्तापान…’ हम अपना सवाल पूरा करते उससे पहले ही हमने वाइपर हाथ में लिए घर के लाउंज में नमूदार हो चुकीं श्रीमती तोताराम को देख लिया और हमारे सवाल का बाकी हिस्सा हमारे गले में अटक गया।

तोताराम जी ने अपने सिर को दो बार ऊपर नीचे हिला कर हमें संदेश दिया कि हमारा सवाल भले ही अधूरा हो, लेकिन वो उसे पूरा समझ चुके हैं, वह बात अलग थी कि वे हमारा सवाल अधूरा छूटने की वजह नहीं समझ पाए। तो साब, हमारे आधे-अधूरे सवाल का पूरा जवाब देने के उद्देश्य से उन्होंने अपने पुडियापूरित मुख को कुत्तों के रोने की मुद्रा में ऊपर उठाया ही था कि उनकी नजर लाउंज पर पड़ी और उन्हें हमारा सवाल अधूरा छूटने की वजह समझ आ गई। हम तोताराम जी को उसी मुद्रा में छोड़ लंबे कदमों से आगे लपक लिए और इस प्रकार कुकुर-मानव सह-संबंध पर प्रोफेसर तोताराम का व्याख्यान अधूरा छूट गया।


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