Tuesday, April 21, 2026
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G-20 शिखर सम्मेलन में रूस-चीन के राष्ट्रपति के शामिल न होने पर एस जयशंकर ने कही यह बड़ी बात

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में कुछ ही दिनों में G-20 शिखर सम्मेलन होने वाला है। इस सम्मेलन की अध्यक्षता भारत कर रहा है। वहीं, अब G-20 शिखर सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति और चीन के राष्ट्रपति के शामिल नहीं होने पर विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने एक इंटरव्यू में कहा कि मुझे लगता है कि G20 में अलग-अलग समय पर कुछ ऐसे राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री रहे हैं जिन्होंने कुछ कारणवश न आने का फैसला किया है।

लेकिन उस अवसर पर जो भी उस देश का प्रतिनिधि होता है, वह अपने देश और उसकी स्थिति को सामने रखता है। मुझे लगता है कि हर कोई बहुत गंभीरता के साथ आ रहा है।

‘इंडिया’ नहीं बल्कि ‘भारत’ का उल्लेख विवाद पर कही यह बात

G20 शिखर सम्मेलन के निमंत्रण कार्डों पर ‘इंडिया’ नहीं बल्कि ‘भारत’ का उल्लेख किए जाने को लेकर चल रहे विवाद पर एस. जयशंकर ने कहा कि ‘इंडिया दैट इज भारत’ और यह संविधान में है। मैं हर किसी को इसे (संविधान) पढ़ने के लिए कहूंगा। जब आप भारत कहते हैं, तो एक अर्थ, एक समझ और एक अनुमान आता है और मुझे लगता है कि यही हमारे संविधान में भी परिलक्षित है।

G-20 शिखर सम्मेलन के लिए सरकार द्वारा किए गए इंतजाम की विपक्ष द्वारा की जा रही आलोचना पर बोले कि अगर किसी को लगता है कि वे लुटियंस दिल्ली या विज्ञान भवन में अधिक सुविधाजनक महसूस कर रहे थे तो यह उनका विशेषाधिकार था। वही उनकी दुनिया थी और तब शिखर सम्मेलन की बैठकें ऐसे समय हुई जहां देश का प्रभाव संभवतः विज्ञान भवन में या उसके 2 किलोमीटर (लुटियंस दिल्ली) तक में रहा हो।

यह एक अलग युग है, यह अलग सरकार है और यह एक अलग विचार प्रक्रिया है। प्रधानमंत्री ने महसूस किया और हमने उस दिशा में काम किया है, जिसमें G-20 ऐसी चीज है जिसे एक राष्ट्रीय प्रयास के रूप में माना जाना चाहिए। जिन लोगों को लगता है कि हमें अभी भी 1983 में फंसे रहना चाहिए उनका 1983 में फंसे रहने का स्वागत है।

राष्ट्रपति बाइडेन की यात्रा के दौरान द्विपक्षीय स्तर पर क्या चर्चा होगी और एजेंडे में क्या हो सकता है, पूछे जाने पर विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की संयुक्त राज्य अमेरिका की राजकीय यात्रा बहुत मजबूत रही है, नतीजों और परिणामों की दृष्टि से मजबूत रही है।

दोनों प्रणालियाँ, भारतीय प्रणाली और अमेरिकी प्रणाली काम करने में व्यस्त हैं और इस साल जून में जिन बातों पर सहमति बनी थी उनमें से कई को लागू करने की कोशिश कर रही हैं। इसलिए, मुझे लगता है कि इससे नेताओं को जायजा लेने का अवसर मिलेगा।

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