Sunday, April 26, 2026
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किठौर में खादर के तेंदुए को सपेरे का ‘खटका’

  • साइफन पुलिस चौकी के पास खटके सहित दिखा तेंदुआ
  • पुलिसकर्मी भी सुन रहे कई रात से गुर्राहट

जनवाणी संवाददाता |

किठौर: तेंदुए को पकड़ना वन विभाग के लिए भले चुनौती हो मगर सपेरों के लिए ये चुटकी का खेल है। कारण सपेरो द्वारा बनाया गया खटका तेंदुए को इस तरह फंसा लेता है कि फिर वह निकल नहीं पाता। यदि जोर आजमाइश कर निकल भी जाए तो जिंदगी भर के लिए बेकार हो जाता है। किठौर में साइफन चौकी के पास एक पैर में खटका फंसे तेंदुए को सड़क पर गुरार्ते देखा गया। प्रत्यक्षदर्शी ने साइफन पुलिस को सूचना दी। एकसाथ दो गाड़ियां देख तेंदुआ तीन पैरों पर चलकर बाग के पास झाड़ियों में छुप गया।

थानाक्षेत्र के सारंगपुर पट्टी निवासी अंग्रेज सिंह ने बताया कि रविवार तड़के 4:45 बजे वह अपनी बोलेरो कार से परीक्षितगढ़ जा रहा था। नहर पटरी पर साइफन चौकी से करीब 200 मीटर आगे रियासतमंद खां के बाग के पास उसको एक तेंदुआ दिखा जो सड़क पर बैठा गुर्रा रहा था। तेंदुए के अगले बायें पैर में खटका फंसा था। तेंदुआ देख हड़बड़ाए अंग्रेज सिंह ने साइफन चौकी प्रभारी रजत कुमार को सूचना दी।

रजत कुमार वैगनार से घटनास्थल पर पहुंचे उन्हें तेंदुआ तो नहीं मिला मगर तेंदुए के पदचिह्न व गुर्राहट उन्होंने खूब सुनी। गुर्राहट रियासतमंद खां के बाग की तरफ से आ रही थी। अंग्रेज सिंह ने बताया कि एक साथ दो गाड़ियों की लाइटें देख तेंदुआ तीन पैरों पर चलकर बाग के पास की झाड़ियों में छुप गया। रेंजर हरज्ञान सिंह का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में नहीं। अंग्रेज सिंह से लोकेशन पूछकर पीड़ित तेंदुए की तलाश में पेट्रोलिंग कराई जाएगी। ताकि उसको शीघ्र पकड़कर उपचार कराया जा सके।

पहले भी खटके में फंस चुका तेंदुआ

दस वर्ष पूर्व जड़ौदा के ढाके वाले जंगल में एक तेंदुआ खटके में फंसकर पकड़ा गया था। शिकारियों ने किसान द्वारा निजि सिंचाई के लिए बनाई गई नाली में खटका लगा रखा था। रात के अंधेरे में तेंदुए का पैर उसमें फंस गया। दिन निकलने पर ग्रामीणों ने वनविभाग को सूचना दी। वनकर्मियों द्वारा घेराबंदी के दौरान वह तेंदुआ झटका मारकर खटके से निकल भागा और पास में ही गन्ने के खेत में घुस गया था। खटके से तेंदुए का पैर कट गया था। हालांकि बाद में दिल्ली की वन्यजीव विशेषज्ञ टीम ने उसे ट्रेंकुलाइज कर पकड़ लिया था।

क्या है खटका ?

खटका एक प्रतिबंधित यंत्र है जिसका प्रयोग सपेरे जंगली जानवरों के शिकार के लिए करते हैं। ये लोहे का गोल शिकंजा होता है। जिसमें जंजीरें भी लगी होती हैं। शिकारी सपेरे जंजीरों के जरिये इसे नाली, चकरोड, पगडंडी आदि पर जमीन में गाड़ देते हैं। खटके के ऊपर से जब जानवर निकलता तो शिकंजे में पैर पड़ जाने पर वह खटके में फंस जाता है। जंजीरें भूमि में गड़ी होने के कारण खटका उखड़ नहीं पाता। और शिकारी अपने मकसद में सफल हो जाता है।

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पैर काट देता है खटका

खटके में पैर फंसने पर यदि जानवर छूटने के लिए जोर लगाता है तो उसका पैर कट जाता है। कभी-कभी भूमि में कम गड़ा होने के कारण खटका उखड़ भी जाता है।

गैर जमानती अपराध

रेंजर हरज्ञान सिंह ने बताया कि खटके का प्रयोग गैर कानूनी है और ये गैर जमानती अपराध की श्रेणी में आता है।

विभाग के जाल-पिंजरे नाकाफी

वन विभाग वन्यजीवों के रेस्क्यू के लिए भले ही जाल पिंजरों से लैस होने का दावा करता हो मगर सच्चाई ये है कि ये संसाधन अब हस्तिनापुर सेंचुरी एरिया के वनकर्मियों के लिए नाकाफी हैं।

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