
हमारी लाइफ में कई ऐसी घटनाएं होती हैं जिनका हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर होता है। कुछ बातें होती हैं जो अंदर ही अंदर खाए जाती हैं। डिप्रेशन के लक्षणों को उदासी, नुकसान या ऐसे गुस्से के रूप में समझा जा सकता है, जिससे किसी इंसान की रोजमर्रा की गतिविधियों पर असर पड़ता है। इसका इलाज किया जा सकता है।
जिंदगी में हर कोई कभी न कभी डिप्रेशन का शिकार हो ही जाता है। घरेलू प्रोब्लम्स या निजी समस्याओं के साथ-साथ डिप्रेशन के कारण कई हैं। आजकल की बिजी लाइफ में आप किसी को देखकर अंदाजा नहीं लगा सकते कि कोई इंसान अंदर से कितना परेशान है। डिप्रेशन या मनो अवसाद एक मानसिक रोग की श्रेणी में आता है। आज की इस भाग-दौड़ भरी जिंदगी चाहे हमें पूरे दिनभर लोगों की भीड़ के बीच व्यस्त रखती हो, लेकिन कहीं न कही हमारे भीतर एक शांति लगातार घर करती चली जाती है। क्योंकि हमारी दिनचर्या इतनी व्यस्त हो जाती है कि हमें अपने लिए समय नहीं मिल पाता है। दिनभर हमारे दिमाग में कुछ न कुछ चलता रहता है। जिसे न आप किसी को बता पाते हैं और न खुद सहन कर पाते हैं। जो एक दिन डिप्रेशन यानि मानसिक बीमारी का रूप ले लेती है। हमारी लाइफ में कई ऐसी घटनाएं होती हैं जिनका हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर होता है। कुछ बातें होती हैं जो अंदर ही अंदर खाए जाती हैं। डिप्रेशन के लक्षणों को उदासी, नुकसान या ऐसे गुस्से के रूप में समझा जा सकता है, जिससे किसी इंसान की रोजमर्रा की गतिविधियों पर असर पड़ता है। डिप्रेशन का इलाज नहीं किया गया तो यह हमारे मानसिक स्वास्थ्य काफी बुरा असर डाल सकता है। कुछ लोग खुद को जिंदगी से हारा हुआ समझने लगते हैं।
क्यों होता है डिप्रेशन
हम में से ज्यादातर लोग किसी एक ऐसी बात को लेकर उलझ जाते हैं, जिससे बाहर निकलना मुश्किल सा लगता है। डिप्रेशन हमें अंदर से खोखला कर सकता है। डिप्रेशन ज्यादातर ऐसे लोगों को होता है जिनकी जिंदगी में कोई बहुत बड़ा हादसा हुआ हो या जिसके पास दुखी होने की बड़ी वजहें हों। ये वजहें घरेलू हो सकती हैं खुद कि निजी हो सकती हैं। वहीं माना जाता है कि कुछ हद तक हमारे शरीर में हार्मोन में बदलाव होने से भी व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार हो जाता है। यही वजह है कि डिप्रेशन में आप चाहकर भी खुश नहीं रह पाते।
अकेलापन पसंद होना डिप्रेशन का एक संकेत हो सकता है
आपने किसी ऐसे इंसान को देखा होगा, जो अपने आप से बातें करता रहता है या फिर कोई जो हमेशा मरने की बातें करता है। हर छोटी-छोटी बात पर रो देता है। उन खुशमिजाज लोगों से भी मिले होंगे, जो अचानक से किसी ऐसी चिंता में चले जाते हैं जिससे बाहर निकलना उन्हें मुश्किल लगता है। ऐसे लोग डिप्रेशन या मानसिक परेशानी के शिकार होते हैं।
डिप्रेशन के लक्षण
-उदासी
-अकेलापन
-बहुत ज्यादा गुस्सा।
-अगर आपको याद नहीं कि आप आखिरी बार खुश कब थे।
-बिस्तर से उठने या नहाने जैसी डेली रुटीन की चीजें भी आपको टास्क लगती हैं।
-आप लोगों से कटने लगे हैं।
-आप खुद से नफरत करते हैं और अपने आप को खत्म कर लेना चाहते हैं।
-महसूस हो कि कुछ भी ठीक नहीं हो रहा।
-ज्यादातर समय सिरदर्द रहना
डिप्रेशन के कारण
-माता-पिता की उम्मीदों पर खरा उतरने का दबाव
-शिक्षा और रोजगार का दबाव
-पारिवारिक समस्याएं
-रिलेशनशिप की समस्याएं
-हॉर्मोन्स में बदलाव और किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित होना।
-किसी काम में अगर उम्मीद के मुताबिक सफलता न मिले या वह काम बिगड़ जाए।
-कर्ज में डूबने की स्थिति में भी व्यक्ति डिप्रेशन में चला जाता है।


