रामबोल तोमर |
मेरठ: लोकसभा चुनाव हो और धनबल का जिक्र न हो तो ऐसा हो ही नहीं सकता। आमतौर पर रालोद सुप्रीम जयंत चौधरी पर भी इस बात को लेकर अंगुली उठती जा रही है कि धनबल टिकट वितरण में चलता है, लेकिन धनबल और बाहुबल को जयंत चौधरी ने सिरे से खारिज कर दिया। यही नहीं, पुराने कार्यकर्ताओं पर भरोसा जताया हैं। बागपत से रालोद ने डा. राजकुमार सांगवान को प्रत्याशी बनाकर एक जमीनी कार्यकर्ता को महत्व दिया हैं। लंबे समय से पार्टी के लिए समर्पित और वनवास झेल रहे थे, जिनको पार्टी से बड़ा इनाम मिला हैं।
दरअसल, बागपत में भी कई धनबल और बाहुबल जयंत चौधरी के सामने लाइन लगाये थे टिकट के लिए, लेकिन जयंत चौधरी ने धनबल की लाइन को कतई महत्व नहीं दिया। धन से किनारा कर दिया डा. राजकुमार सांगवान को लोकसभा प्रत्याशी बनाने का बड़ा तोहफा दिया। पिछले विधानसभा चुनाव में सिवाल खास से डा. राजकुमार सांगवान दावेदारी कर रहे थे, उन्हें सिंबल भी दे दिया गया था। ऐसा जयंत चौधरी के निकटतम नेताओं का कहना है, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव कि जिद के चलते सिवाल खास से गुलाम मोहम्मद को प्रत्याशी बनाया गया।
यहां डा. राजकुमार सांगवान ने धैर्य का परिचय दिया और पार्टी के लिए समर्पण की अवस्था में खड़े रहे। अब उनको रालोद सुप्रीमो चौधरी जयंत सिंह ने इस धैर्य का इनाम दिया है। यही नहीं, माठ में भी कुछ वैसी ही स्थिति थी। जहां पर योगेश नोहरवार आम कार्यकर्ता थे और उनका भी टिकट विधानसभा में कटा और सपा के खाते में सीट चली गई। योगेश नोहवार को भी एमएलसी पद के लिए प्रत्याशी रालोद सुप्रीमो ने घोषित किया हैं।
बिजनौर लोकसभा सीट के लिए तो सांसद मलूक नागर ने दिल्ली तक की दौड़ लगा दी थी। धनबल में उनका नाम टॉप पर लिया जाता हैं, लेकिन जयंत चौधरी ने यहां भी धनबल को किनारे करते हुए पार्टी विधायक चंदन चौहान को बिजनौर लोकसभा से टिकट दिया। चंदन चौहान का परिवार लंबे समय से जयंत चौधरी के परिवार से जुड़ा रहा हैं। चंदन चौहान के पिता संजय चौहान भी बिजनौर से पहले लोकदल से एमपी भी रह चुके हैं।
बिजनौर से मलूक नागर का नाम चल रहा था, जो आर्थिक तौर पर मजबूत भी हैं, लेकिन उनको रालोद में महत्व नहीं दिया गया। वो दिल्ली भी गए। बिजनौर से दावेदारी भी की। मीडिया में सुर्खियों में भी आये, चौधरी अजित सिंह की जयंती के उनके फोटो भी वायरल हुए। इससे स्पष्ट है कि जयंत चौधरी ने धनबल को तव्वजो नहीं दी। आम कार्यकर्ता को एक जगह नहीं, बल्कि हर जगह से उन्होंने चुनाव मैदान में उतारकर स्पष्ट संदेश दिया है कि यहां पार्टी के कर्मठ कार्यकर्ता ही पार्टी की रीढ़ हैं, जिस पर भरोसा किया हैं।

