Tuesday, May 12, 2026
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अनिल कुमार ने तय किया पीए से मंत्री पद तक का सफर

  • तीन बार रहे चुके हैं विधायक, पुरकाजी क्षेत्र की राजनीति में बड़ा नाम
  • पूर्व मंत्री उमा किरण के पीए से की थी राजनीति की शुरूआत

जनवाणी संवाददाता |

मुजफ्फरनगर: रालोद के एनडीए के साथ गठबंधन के बाद रालोद कोटे से उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री बनाये जाने के लिए अनिल कुमार का रास्ता साफ हो गया है। अनिल कुमार को शपथ ग्रहण करने के लिए लखनऊ बुला लिया गया है। अनिल कुमार का नाम फाइनल होते ही कयास लगाने के सिलसिले पर विराम लग गया है। अनिल कुमार रालोद कोटे के ऐसे विधायक हैं, जिन्होंने तीसरी बार विधायक का चुनाव जीतकर साबित कर दिया था कि उनकी पुरकाजी क्षेत्र में पकड़ का कोई सानी नहीं है और इसी का इनाम उन्हें मंत्री पद के रूप में मिला है। अनिल विधायक के मंत्री बनाये जाने के पीछे दलितों को सम्मान दिये जाने का तर्क भी दिया जा रहा है।

अनिल कुमार का जन्म सहारनपुर के ग्राम ताहरपुर में 1975 में हुआ था और उनकी प्रारम्भिक शिक्षा भी वहीं हुई थी। अनिल कुमार अपने परिवार के साथ मुजफ्फरनगर में आकर रहने लगे थे।अनिल कुमार के मन में जब राजनीति में आने की आशंका हुई, तो वह उस समय की पुरकाजी विधायक उमा किरण के सम्पर्क में आये, जिसके बाद उमा किरण ने उन्हें पीए बना लिया। उमा किरण जब राज्यमंत्री थी, उस समय अनिलकुमार उनके पीए थे। अनिल कुमार को बसपा ने अपना प्रत्याशी बनाया, तो उन्होंने 2007 में उमा किरण को ही हराकर विधायक का ताज कब्जाया। 2012 में वह दूसरी बार विधायक बने, परन्तु 2017 में प्रमोद ऊंटवाल ने उन्हें हरा दिया था, परन्तु 2022 के चुनाव में अनिल कुमार ने रालोद व सपा गठबध्ंान से चुनाव लड़कर फिर वापसी की और प्रमोद ऊंटवाल को हराकर फिर से पुरकाजी विधायक बन गये। 2022 में चुनाव जीतने के बाद वह रालोद मुखिया जयंत चैधरी के करीबी बन गये।

9 विधायकों को पटकनी देकर दिखाया दमखम
2024 के लोकसभा चुनाव के लिए जब रालोद व एनडीए का गठबंधन हुआ, तो उस समय तय हुआ था कि प्रदेश सरकार में भी रालोद कोटे से एक मंत्री बनाया जायेगा। इसके बाद से रालोद के सभी 9 विधायकों में मंत्री बनने की होड़ लग गयी थी। ऐसे में एक-एक कर सभीके नाम सामनेआ रहे थे, सबसे जयादा चर्चाओं में बुढ़ाना विधायक राजपाल का नाम चर्चाओं में था, परन्तु मंगलवार की सुबह अनिल विधायक का नाम सामने आया और उन्हें सुबह ही लखनऊ के लिए बुला लिया गया। अनिल विधायक का नाम सामने आते ही लोगों को उनकी जयंत के साथ नजदीकी का अहसास हो गया।

दलित वोटबैंक पर हैं निगाहें
अनिल विधायक दलित समाज से आते हैं और उनकी दलितों में मजबूत पकड़ है। हालांकि दलित वोटबैंक को बसपा का परम्परागत वोट बैंक माना जाताहै, परन्तु अनिल विधायक द्वारा रालोद के कोटे से चुनाव लड़ने के बाद भी दलितों को अपने पक्ष में लामबंद कर दिया था और विजयश्री हासिल की थी,जिसके बाद वह जयंत चैधरी के चहेते हो गये थे। अब योगी के मंत्रीमंडल में अनिल कुमार को जगह दिये जाने के पीछे माना जा रहा है कि एक तीर से दो निशाने साधे जा रहे हैं। एक ओर तो जयंत के नजदीकी को मंत्री बनाया जा रहा है, दूसरी ओर दलित वोट बैंक पर निशाना साधा जा रहा है। अनिल के मंत्री बनने से 2024 के चुनाव में दलित वोटबैंक एनडीए के पक्ष में लामबंद हो सकता है।

क्या कहते हैं अनिल कुमार
विधायक अनिल कुमार ने बताया कि जयंत चैधरी के आदेश पर उन्हें लखनऊ पहुंचने के लिए कहा गया है, वह लखनऊ जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके पास शब्द नहीं हैं कि वह कैसे चैधरी साहब का शुक्रिया अदा करें। उन्होंने कहा कि उन्हें अहसास भी नहीं था कि उन्हें मंत्री बनाया जा सकता है, परन्तु जिस तरह से जयंत चैधरी ने उन पर विश्वास जताया है, वह उनका जिन्दगी भी अहसान नहीं भूल सकते।

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