Friday, March 20, 2026
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मेरठ में अखिलेश लगाएंगे योगेश या मुखिया पर दांव

  • फाइनल दौड़ में मुखिया गुर्जर ने पकड़ की मजबूत
  • विधायकों, पूर्व विधायकों से भी अलग-अलग फीड बैक
  • कल की बैठक में अधिकृत प्रत्याशी का होगा ऐलान

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट के लिए समाजवादी पार्टी में घमासान मचा हुआ है। अखिलेश यादव ने साफ तौर पर कह दिया है कि जातिगत गणना के आधार पर मुस्लिम को टिकट नहीं दिया जायेगा। गुर्जर नेताओं में टिकट को लेकर रस्साकशी चल रही है। नाम लगभग फाइनल हो गया है। बस दो दिन बाद मंगलवार को अधिकृत रूप से जिम्मेदारों से बात करने के बाद प्रत्याशी का ऐलान कर दिया जायेगा। सपा सुप्रीमो ने विधायकों के साथ-साथ पूर्व विधायकों से भी फीड बैक हासिल कर लिया है।

दिल्ली के राज सिंहासन की दौड़ शुरू हो गई है। भाजपा, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, कांग्रेस, लोकदल व आम आदमी पार्टी में प्रत्याशी चयन को लेकर फूंक-फूंककर कदम रखा जा रहा है। समाजवादी पार्टी में भी टिकट के दावेदारों की लंबी कतार है। हर कोई सपा के सहारे सांसद बनने का ख्वाब देख रहा है। इसमें सरधना विधायक अतुल प्रधान, किठौर विधायक शाहिद मंजूर, शहर विधायक हाजी रफीक अंसारी भी बड़े दावेदारी कर रहे थे, लेकिन अखिलेश यादव ने साफ तौर पर कह दिया है कि मेरठ-हापुड़ सीट पर वह गैर मुस्लिम को टिकट देना चाहते हैं।

इसके बाद शाहिद मंजूर ने तो यहां तक कह दिया कि उनको बिजनौर से टिकट दे दें तो वह वहां से जीत हासिल करके दिखा देंगे। क्योंकि उनकी विधान सभा का बड़ा क्षेत्र बिजनौर लोकसभा से भी जुड़ता है। जिसका उनको फायदा मिलेगा। सूत्र बताते हैं कि अखिलेश यादव के पास चार नेताओं के नाम फाईनल दौड़ में पहुंच गये हैं। इनमें योगेश वर्मा, मुखिया गुर्जर, नीरज पाल तथा अतुल प्रधान के नाम दौड़ में रहे। अखिलेश यादव ने पहले राउंड में बात करते हुए अतुल प्रधान को तो कह दिया कि वह सरधना विधन सभा में ही रहकर मेहनत करें।

नीरज पाल को अपने पिता की राजनीतिक विरासत संभालने की हसरत पालने के लिए अभी इंतजार करने को कहा गया है। फाइनल दौड़ में अब सिर्फ योगेश वर्मा और मुखिया गुर्जर के बीच दौड़ है। अखिलेश दरबार की बैठक में मौजूद सूत्र बताते हैं कि चुनाव में धनबल, जनबल और बाहुबल की गणना की गई। इसमें वर्तमान विधायकों से भी राय ली गई तो उन्होंने अपने मन मुताबिक बताया कि कोई नेता धनबल में आगे है तो कोई बाहुबल में आगे है। जबकि एक नेता धनबल, जनबल और बाहुबल तीनों उम्मीदों पर खरा उतरता है।

शाहिद मंजूर और रफीक अंसारी ने उक्त नेता के समर्थन में अपनी स्वेच्छा से अपने नाम खुद ही वापस ले लिये। वैसे मेरठ-हापुड़ लोकसभा का जातिगत आधार देखें तो यहां लगभग 3 लाख 14 हजार दलित मतदाता हैं। जबकि 5 लाख 64 हजार मुस्लिम मतदाता हैं। यदि केवल दलित और मुस्लिम ही एकजुट होकर एक प्रत्याशी को वोट कर देते हैं तो उसके सिर जीत का सेहरा बंध सकता है।

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इसी तरह इस सीट से लगभग 56 हजार गुर्जर मतदाता हैं। साथ ही एक लाख 18 हजार ब्राह्मण मतदाता हैं तो एक लाख 83 हजार वैश्य मतदाता हैं। जबकि एक लाख 30 हजार जाट वोटर हैं। जबकि 59 हजार वाल्मीकि तथा 42 हजार त्यागी समाज की वोटें हैं। इस तरह जातिगत गणना के आधार पर स्थिति बिल्कुल स्पष्ट नजर आ रही है कि एकतरफा मतदान होने पर किसकी जीत हो सकती है।

12 की बैठक में प्रत्याशी के नाम की होगी घोषणा

समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष विपिन चौधरी का कहना है कि 12 मार्च को लखनऊ पार्टी कार्यालय पर मेरठ-हापुड़ लोकसभा की चुनाव संचालन समिति की बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी की घोषणा की जायेगी। वैसे दौड़ में जो-जो नेता शामिल हैं। उनके बारे में पूरा फीडबेक ले लिया गया है। जातिगत आंकड़े भी मंगाये गये हैं।

वैसे सपा अध्यक्ष ने मेरठ सीट से टिकट देने से पहले यह भी देखा है कि कौन निर्विवाद छवि का नेता है। सभी एंगलों से देखने के बाद यह भी देखा गया है कि मुस्लिमों में किस नेता की कितनी पकड़ है तथा समाज में उसकी कैसी छवि है। कार्यकर्ताओं की परेशानियां तथा रमजान को देखते हुए बैठक में सीमित संख्या में पूर्व सांसद, पूर्व विधायक, वर्तमान विधायक तथा जिलाध्यक्ष को ही बुलाया गया है।

भाजपा वेट एंड वॉच की स्थिति में

मेरठ-हापुड़ लोकसभा के लिए भाजपा का टिकट होल्ड पर चल रहा हैं। भाजपा वेट एंड वॉच की स्थिति में हैं। दूसरी पार्टियां किसका टिकट घोषित करती हैं, उस पर निगाहें लगाई गयी हैं। क्योंकि मेरठ में पिछले चुनाव भाजपा मात्र चार हजार मतों से ही जीत पायी थी, ऐसे में भाजपा कोई भी इसमें चूक करना नहीं चाहती हैं। जिस दिन से भाजपा ने मेरठ में प्रत्याशी घोषित करने की बजाय होल्ड कर दिया था, उसी दिन से कुछ लोगों की सांसे अटकी हुई हैं। टिकट किसको होगा? क्योंकि भाजपा इस बात को ध्यान में रख रही है कि चार हजार वोटों के अंतर से भाजपा प्रत्याशी राजेन्द्र अग्र्रवाल ने जीत दर्ज की थी।

…तो अतुल प्रधान सपा को बर्बाद करके ही दम लेंगे ?

सपा विधायक अतुल प्रधान हाल ही में बड़ी शिकस्त खाकर हटे हैं। फिर भी पार्टी में सेंधमारी करने नहीं चूक रहे हैं। हाल ही में मेयर के चुनाव में मुंह की खाने के बाद फिर से अतुल प्रधान मेरठ लोकसभा का टिकट मांग रहे हैं। लगता है कि पार्टी का नाश करने के बाद ही अतुल प्रधान दम लेंगे। लगता है अतुल ने सपा को समाप्त करने का बीड़ा उठा लिया हैं। ऐसी चर्चाएं हर तरफ चल रही हैं। पार्टी में चर्चा तो हो रही हैं, लेकिन सामने आकर कोई नहीं बोल रहा हैं।

अभी औवेसी जैसी पार्टी ने इन्हें हाशिये पर पहुंचा दिया था। अब कौन से समीकरण से ये टिकट मांग रहे हैं, ये सपा नेताओं को भी समझ में नहीं आ रहा हैं। क्योंकि मेयर के चुनाव में अतुल प्रधान की पत्नी सीमा प्रधान को सपा ने प्रत्याशी बनाया था, लेकिन औवेसी जैसी पार्टी से सीमा प्रधान को नीचले पायदान पर पहुंचना पड़ गया था। इतनी बुरी पराजय होने के बाद कैसे अतुल प्रधान सपा मुखिया से टिकट मांग रहे हैं, ऐसे तो मेरठ में सपा गर्त में पहुंच जाएगी।

गैर मुस्लिम को ही सपा लड़ना चाहती हैं, लेकिन कई जातियों के दिग्गज नेता सपा के पास हैं। फिर भी अतुल प्रधान कैसे टिकट मांग रहे हैं? गुर्जर वोट करीब 55 हजार लोकसभा क्षेत्र में हैं। ऐसे में मुस्लिमों के साथ कौन सी ऐसी जाति प्लस की जा सकती हैं, जो जीत दिला सके। सपा मुखिया भी मेरठ में जीत दर्ज करने के लिए पार्टी नेताओं से मशवरा कर रहे हैं।

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