- लाइसेंसी शस्त्र ना जमा कराने पर दर्ज होगा मुकदमा
- शहर 1333 लाइसेंसी हथियार, थानों में जमा केवल दो हजार
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: लोकसभा चुनाव का एलान कभी भी हो सकता है। उसके साथ ही लाइसेंसी हथियार थाने में जमा कराने होंगे। लाइसेंसी शस्त्र न जमा करने पर मुकदमा भी दर्ज हो सकता है। वहीं शहर के 16 थाना क्षेत्रों में लाइसेंसी शस्त्र की यदि बात की जाए तो 12971 लाइसेंस है और इनके सापेक्ष 1333 शस्त्र हैं। इनमें से मात्र अभी दो हजार ही जमा कराए गए हैं। पूरे जिला में 24 हजार से ज्यादा शस्त्र लाइसेंस हैं।
चुनाव को निष्पक्ष और शांतिपूर्वक कराए जाने के लिए लाइसेंस धारियों को शस्त्र जमा कराने के निर्देश दिए हैं। जिले में करीब 24 हजार से ज्यादा शस्त्र लाइसेंस हैं। लाइसेंस धारियों को असलहे जमा करने होंगे। यदि लाइसेंसी शस्त्र जमा कराने में आनाकानी की गयी तो मुकदमा दर्ज होगा। चुनाव के मद्देनजर शस्त्र लाइसेंस जमा कराने को लेकर एडीजी व आईजी सख्ती बरत रहे हैं। एडीजी ने विगत दिनों पुलिस लाइन में बुलायी क्राइम मिटिंग में सख्त लहजे में इसको लेकर सीओ व थानेदारों को हिदायत दी थी। तमाम थानेदारों को कहा गया है कि अपने-अपने क्षेत्र में तमाम शस्त्र लाइसेंस जमा कराएं। इसको लेकर एडीजी धुव्र कुमार ने भी निर्देश दिए हैं।
साथ ही आईजी जोन ने भी इसको लेकर सख्ती बरती है। शहरी क्षेत्र और इसके 10 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले शस्त्र धारकों की स्क्रीनिंग कर असलहा जमा कराए जाएंगे। इसके लिए स्क्रीनिंग कमेटी बनाई गई है। स्क्रीनिंग कमेटी शस्त्र लाइसेंस धारकों की समीक्षा करेगी। हाल ही में जमानत पर रिहा हुए, आपराधिक इतिहास वाले, दंगे में संलिप्त रह चुके, पूर्व में मुचलका पाबंद किए जा चुके शस्त्र लाइसेंस धारकों की स्क्रीनिंग अनिवार्य रूप से करने के भी निर्देश दिए हैं।
ऐसे शस्त्र लाइसेंस धारक जिनसे कानून व शांति व्यवस्था को खतरा पैदा हो सकता है उनके शस्त्र अनिवार्य रूप से जमा कराए जाएंगे। इनके अलावा ऐसे लोगों के भी शस्त्र चुनाव के दौरान अनिवार्य रूप से जमा कराए जाएंगे, जिनके बारे में चुनाव के दौरान बाधा उत्पन्न करने की संभावना की जानकारी मिली हो। चुनाव परिणाम घोषित होने के एक सप्ताह के भीतर प्रशासन को यह शस्त्र वापस लौटाने होंगे।
हर्ष फायरिंग की घटनाएं रोकने और चुनाव या अन्य मौके पर अपराधियों तक कारतूस पहुंचाने वालों पर नकेल कसने के लिए यह सत्यापन किया जा रहा है। सभी सर्किल के सीओ और थानेदारों को ब्योरा जुटाने के आदेश जारी किए हैं। यदि खर्च किए कारतूसों की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई तो इसकी रिपोर्ट के आधार पर लाइसेंस निरस्तीकरण की संस्तुति तक की जा सकेगी।
लाइसेंसी शस्त्रधारकों को अब एक-एक कारतूस का हिसाब देना होगा। एक साल में कितने कारतूस लिए और कितने इस्तेमाल किए, इसका ब्योरा पुलिस को देना होगा। यदि किसी अपराध में शामिल मिले या अपराधी से मिलीभगत कर कारतूस का अवैध इस्तेमाल किया गया तो लाइसेंस निरस्त किया जा सकता है।
पहले नहीं होता था कारतूसों का सत्यापन
इससे पहले शस्त्रधारकों के पास मौजूद कारतूसों का सत्यापन नहीं होता था। कारतूसों का प्रयोग कौन कैसा कर रहा है, इसके बारे में कोई रिकार्ड पुलिस नहीं रखती थी। अब कारतूसों को लेकर पुलिस प्रशासन ने सख्ती कर दी है। अब थाना स्तर पर शस्त्रधारकों का कारतूसों का रिकार्ड रखा जा रहा है। सभी थानों में इसके लिए रजिस्टर बनाया जा रहा है। कारतूस खरीदने के नियमों में भी बदलाव हुआ है। पहले लाइसेंसधारक को शस्त्र की दुकान से सीधे कारतूस मिल जाते थे, लेकिन अब कारतूस लेने के लिए एक प्रार्थना पत्र संबंधित थाने के नाम शस्त्रधारक को लिखना होगा।
यहां से चौकी इंचार्ज और फिर इंस्पेक्टर की रिपोर्ट लगने के बाद सीओ के पास फाइल जाएगी। सीओ संस्तुति करके संबंधित मजिस्ट्रेट को फाइल भेजेंगे। मजिस्ट्रेट की अनुमति के बाद ही दुकान से कारतूस क्रय कर सकते हैं। यह प्रक्रिया इसी साल से शुरू हुई है। कारतूस का ब्योरा नहीं देने वाले शस्त्रधारक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यदि किसी अपराध और अपराधी से संलिप्तता मिलती है तो शस्त्र लाइसेंस निरस्त किया जा सकता है। पीएल शर्मा रोड पर शस्त्रों की 20 से ज्यादा दुकानें हैं। यहां जिले के साथ ही वेस्ट यूपी के अन्य जिलों से शस्त्र खरीदने लोग पहुंचते हैं।
दो ही अच्छे
एक व्यक्ति अब सिर्फ दो हथियार रख सकता है। यदि तीसरा हथियार है, तो उसे जमा करना होगा। अब एक व्यक्ति कानूनी तौर पर दो से अधिक हथियार नहीं रख सकता है। शस्त्र अनुभाग ने ऐसी लिस्ट बनानी शुरू कर दी है, जिनके पास लाइसेंसी तीन हथियार हैं। मेरठ में करीब 400 ऐसे लोग हैं, जिनके पास तीन शस्त्र लाइसेंसी है। शस्त्र अनुभाग जल्द ही तीन लाइसेंसी हथियार रखने वालों को नोटिस देने जा रहा है।
नए कानून का करें पालन
राज्यसभा ने 10 दिसंबर 2019 को आयुध संशोधन विधेयक 2019 को मंजूरी दे दी थी। इसमें प्रतिबंधित हथियारों के निर्माण पर आजीवन कारावास तक की सजा और एक लाइसेंस पर केवल दो हथियार रखने का प्रावधान किया गया है। अभी तक एक लाइसेंस पर तीन हथियार रख सकते हैं। कानून के अधिसूचित होने के एक वर्ष के भीतर संबंधित पुलिस थाने, हथियार विक्रेता या कलेक्ट्रेट के मालखाने में जमा कराना होगा। इन हथियारों को निष्क्रिय किया जाएगा।
दो से ज्यादा लाइसेंस वालों की खंगाली जा रही कुंडली
यदि आपके पास दो लाइसेंस हैं, जिसमें आपने दो हथियार ले रखे हैं तो अब आप दो से अधिक शस्त्र लाइसेंस नहीं बनवा सकते हैं। एक व्यक्ति को दो लाइसेंसी हथियार रखने का अधिकार है। जनपद में करीब 400 शस्त्र धारक ऐसे हैं, जिनके पास तीन लाइसेंसी हथियार हैं। शस्त्र अनुभाग के कर्मचारियों ने इनकी कुंडली निकालनी शुरू कर दी है। एक व्यक्ति अब सिर्फ दो हथियार रख सकता है।
जिसके पास तीसरे हथियार का लाइसेंस है, उसका तीसरा लाइसेंस सरेंडर करके शस्त्र कलेक्ट्रेट के मालखाने में जमा कराना होगा। वरना शस्त्र बेचकर लाइसेंस कैंसल कराना होगा। मेरठ में करीब 400 लोग ऐसे हैं, जो शस्त्र अनुभाग के कर्मचारियों ने चिह्नित किए हैं। जिनके पास तीन लाइसेंस है, उनका ब्यौरा जुटाया जा रहा है। इनका तीसरा लाइसेंस जल्द कैंसिल करने को लेकर नोटिस जारी कर दिया जाएगा।
स्टेटस सिंबल ज्यादा
वास्तव में स्टेटस सिंबल के लिए अब लोग शस्त्र लाइसेंस लेकर महंगे से महंगे हथियार खरीद रहे हैं। वर्तमान में शस्त्र लाइसेंस की ढाई हजार फाइल ऐसी है, जिन पर सभी थानों और तहसील की रिपोर्ट लग गई है, मगर वह शस्त्र अनुभाग में आगे की कार्रवाई के लिए पेंडिंग हैं। शस्त्र लाइसेंस बनवाने के लिए हर कोई चक्कर काट रहा है।

