Wednesday, March 25, 2026
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अगर-मगर की डगर पर ‘डगमगाता’ मुस्लिम मतदाता

  • लोकसभा में कभी नहीं पहुंचे एक साथ 50 मुस्लिम सांसद
  • 1980 के लोकसभा चुनावों में जीते थे सर्वाधिक 49 मुस्लिम सांसद

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: ‘गैर मुमकिन है कि इस सियासत की गुत्थी सुलझे, एहल ए दानिश ने बड़ी सोच से उलझाई है’। राजनीति की इसी उलझन सुलझन में देश का मुसलमान आज दो राहे पर आ खड़ा हुआ है। देश में सदर ए जम्हूरिया (राष्ट्रपति) से लेकर देश के चीफ जस्टिस तक की कुर्सी पर मुसलमान बैठे

लेकिन आंकड़े गवाह हैं कि जम्हूरियत (लोकतंत्र) की सबसे बड़ी पंचायत (संसद) में मुस्लिम सांसदों की संख्या कभी 50 तक नहीं पहुंची। हालांकि वेस्ट यूपी में वोटरों की जुबां का टेस्ट अलग अलग है और यहां ‘धु्रवीकरण’ की राजनीति में विश्वास किया जाता है। 2004 में मेरठ, सहारनपुर और मुरादाबाद मंडल के मतदाताओं ने चार मुस्लिम उम्मीदवारों को जिताकर संसद भेजा।

देश में 2004 के लोकसभा चुनावों तक संसद पहुंचे मुस्लिम प्रत्याशियों की संख्या पर गौर करें तो आबादी के अनुपात में कभी भी मुस्लिम प्रत्याशी नहीं जीत पाए। 1952 के आम चुनावों में 36 मुस्लिम उम्मीदवार चुने गए थे। यानि कि 7.27 प्रतिशत मुस्लिम उम्मीदवारों की जीत हुई। इसके बाद 1957 के चुनावों में मुस्लिम सांसदों की संख्या में जबरदस्त गिरावट आई और दूसरी लोकसभा में मुस्लिम सांसदों का प्रतिशत घटकर मात्र 4.74 ही रह गया। इस दौरान कुल 24 मुस्लिम सांसद ही संसद पहुंचे। 1962 में हालांकि मुस्लिम सांसदों का ग्राफ कुछ ऊपर पहुंचा।

32 मुस्लिम सांसद जीते और यदि प्रतिशत देखें तो इस बार संसद में मुस्लिम सांसदों का प्रतिशत 6.27 रहा। 1967 और 1971 के आम चुनावों में मुस्लिम सांसदों का ग्राफ एक बार फिर से गिरा। यह लगभग 5.5 प्रतिशत के हिसाब से क्रमश: 29 व 27 रहा। यानि 1967 में 29 और 1971 में 27 मुस्लिम सांसद पार्लियामेंट पहुंचे। 1977 में मुस्लिम सांसदों की संख्या में फिर कुछ इजाफा हुआ और इस बार 32 मुस्लिम सांसद चुनाव जीते। देश में जब 1980 में सातवीं लोकसभा के लिए चुनाव हुए तब सबसे ज्यादा 49 मुस्लिम सांसद (8.8 प्रतिशत) चुने गए

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और आज तक भी यही आकंड़ा सर्वाधिक बना हुआ है। 1985 के चुनावों में भी ठीक ठाक मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव जीते। इस बार 41 मुस्लिम सांसद पार्लियामेंट पहुंचे। 1985 के बाद से1996 तक के लोकसभा चुनावों में मुस्लिम उम्मीदवारों का ग्राफ नीचे होता रहा। 1989 के चुनावों में 33 मुस्लिम सांसद (6.31), 1991 के चुनावों में 28 मुस्लिम सांसद (5.03 प्रतिशत) और 1996 के चुनावों में 26 मुस्लिम उम्मीदवार (4.78 प्रतिशत) जीत कर लोकसभा पहुंचे। 1998 के लोकसभा चुनावों में 5.34 प्रतिशत के हिसाब से 29 मुस्लिम उम्मीदवार जीते।

1999 व 2004 के चुनावों में क्रमश: 31 मुस्लिम सासंद (5.70 प्रतिशत) व 37 मुस्लिम सांसद (6.81 प्रतिशत) चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे। इसके बाद 2009 के लोकसभा चुनावों में 28 मुस्लिम उम्मीदवार जीते और 2014 में यह संख्या गिरकर 22 पर आ गई। 2019 में 27 मुस्लिम सांसद पार्लियामेंट पहुंचे। मुस्लिम सांसदों की इस बार स्थिति क्या रहेगी यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन फिलहाल इंडिया गठबंधन में घटक दलों की उठापटक के चलते खुद मुस्लिम मतदाता अपनी डगर पर डगमगाता सा दिख रहा है।

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