Sunday, March 15, 2026
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खाद्य जनित एलर्जी के लक्षण और निदान

 

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राजा तालुकदार

जीवन में हर आदमी कभी न कभी एलर्जी का शिकार जरूर होता है। खाद्यजनित एलर्जी के कारण दैनिक जीवन में कई तरह की समस्याएं पैदा होती हैं। आखिर एलर्जी क्यों होती है? इसके कौन-कौन से लक्षण उत्पन्न होते हैं और उसका निदान कैसे हो सकता है आदि बिंदुओं पर इस लेख में विचार किया जाएगा। हम जो कुछ भी भोजन के रूप में ग्रहण करते हैं, उसका प्रोटीन वर्गीय अंश पाचन क्रि या द्वारा एमीनो एसिड में बदल जाता है जिसके कारण वह आसानी से पच जाता है। मनुष्य के शरीर में छोटी आंत की श्लैष्मिक झिल्ली में (इम्यूनोग्लो ब्यूलिन) नामक प्रतिरक्षी प्रतिकाय पाया जाता है जो शरीर में प्रवेश करने वाले एलजीर्कारक प्रतिजन को रोकता है। फलत: एलजीर्कारक प्रतिजन शरीर में अवशोषित होकर रक्त में प्रवेश नहीं कर पाते। इसी के कारण पाचन मार्ग में काफी एलजीर्कारक प्रतिजन/ एन्टीजन के होते हुए भी शरीर पर कोई बाहरी लक्षण नहीं उत्पन्न होता है।

खाद्य जनित एलर्जी के कारण

त्वचा : खुजलाहट, शीत पित्ती व एंजियो ओडिमा या एंजियो न्यूरोटिक ओडिमा त्वचा के नीचे जगह-जगह पर सूजन जो हाथ-पैरों, गर्दन, चेहरे व जननेन्द्रियों पर दिखाई पड़ सकती है।

पाचन तंत्र : उलटी, पेट दर्द, दस्त कभी-कभी दस्त के साथ रक्त आना आदि।

श्वसन तंत्र : दमा व छींक।
खाद्य जनित एलर्जी के बाहरी लक्षण जब पूरी तरह प्रकट होते हैं, तब शरीर के विभिन्न तंत्र इससे प्रभावित होते हैं। हृदय की क्रिया बंद होकर रोगी की मौत भी हो सकती है। कुछ दवाओं, दूध, झींगा या केंकड़ा आदि के सेवन के कारण यह स्थिति उत्पन्न होती है।

एंजियो ओडिमा की स्थिति में शीत पित्ती (जुलपित्ती) के साथ शरीर के किसी भी हिस्से में लालिमा लिए हुए सूजन पैदा हो जाती है। पलक की सूजन के कारण आंखें बंद हो जाती हैं। होंठ सूज कर लटक जाते हैं। सूजन में हल्की दर्द और खुजलाहट हो सकती है। इसका प्रकोप श्वासनली के भीतर होने पर उचित समय पर उपचार नहीं होने से दम घुटकर रोगी की मौत हो सकती है। कुछ फल और सब्जियां मुंह और गले की श्लैष्मिक झिल्ली के सम्पर्क में आते ही एलर्जी पैदा करते हैं। इसे चिकित्सकीय भाषा में ओरल एलर्जी सिन्ड्रोम कहा जाता है।

वैसे तो सारे खाद्य पदार्थों से एलर्जी की संभावना रहती है लेकिन कुछ खाद्य पदार्थों से एलर्जी की संभावना ज्यादा रहती है। अंडा, मछली, गाय व बकरी का दूध, गेहूं व गेहूं वर्गीय खाद्य, मूंगफली, झींगा व केकड़ा आदि के सेवन से एलर्जी की ज्यादा संभावना रहती है। फल व सब्जियों में पपीता, खीरा, नारियल, संतरा, सेब, बैंगन, केला, टमाटर, अरबी, भिंडी, फूलगोभी, लाल साग, पालक साग और पोई साग के सेवन से भी एलर्जी हो सकती है। मदिरापान भी एलर्जी पैदा कर सकता है। खाद्य पदार्थों के संरक्षण के लिए प्रयुक्त यौगिक व कृत्रिम रंग एलर्जी पैदा करते हैं। टॉट्रजिन नामक पीले रंग का बहुत से खाद्य पदार्थों में प्रयोग किया जाता है जो शीतपित्ती व दमा पैदा करता है। खाद्य पदार्थों में विशेष प्रकार की गंध पैदा करने के लिए प्रयुक्त होने वाले चाइनीज साल्ट ह्यमोनोसोडियम ग्लूटोमेटह्य से दमे की शिकायत हो सकती हैं। सूखे फलों (मेवा) के संरक्षण के लिए सलाद तथा संरक्षित फलों के रस में सॅलफाइट मिलाया जाता है जो दमा का कारण बन सकता है।

दूध से एलर्जी

आमतौर पर शिशुओं को दूध से एलर्जी हो जाती है। मां का दूध पीते हुए उसे कोई परेशानी नहीं होती है लेकिन गाय का दूध पिलाना शुरू करने के बाद उसे पेटदर्द, पाचन में गड़बड़ी, श्वसन तंत्र की परेशानियां और त्वचा की विभिन्न समस्याएं घर लेती हैं। गाय के दूध में पाया जाने वाले बिटा लैक्टोग्लोब्युलिन नामक प्रोटीन से समस्याएं पैदा होती हैं। दूध को उबालने के बाद भी यह प्रोटीन नहीं बदलता और एलर्जी जनित प्रतिक्रि या पैदा करता है।
खाद्य जनित एलर्जी के निदान के लिए मरीज के खान-पान के बारे में जानकारी प्राप्त की जाती है। कुछ मरीजों को खुद ही मालूम हो जाता है कि उन्हें किस खाद्य पदार्थ से समस्या उत्पन्न हो रही है। ऐसे में एलर्जी उत्पन्न करने वाले खाद्य पदार्थ की पहचान आसानी से हो जाती है।

खाद्य जनित एलर्जी से बचने का प्रमुख एवं एक मात्र उपाय है कि वैसे खाद्य पदार्थों का सेवन ही न किया जाए, जिससे एलर्जी पैदा हो रही हो। उस खाद्य पदार्थ की निश्चित तौर पर पहचान हो जाने पर उस एलर्जी पैदा करने वाले खाद्य पदार्थ से पूरी तरह परहेज करना मुश्किल नहीं है। आनुषंगिक लक्षणों से छुटकारा पाने के लिए कुछ दवाओं का सेवन किया जा सकता है। एम्यूनोथेरेपी से खाद्य जन्य एलर्जी की रोकथाम संभव नहीं है।

यदि किसी विशेष एलर्जीकारक खाद्य पदार्थ का काफी लंबे समय तथा सेवन न किया जाये तो उस खाद्य पदार्थ के एलर्जन के मुकाबले मौजूद आई. जी. ई. एंटीबॉडीज की संख्या कम हो जाती है। फलत: काफी लम्बे समय के बाद उस खाद्य पदार्थ का सेवन फिर से शुरू करने पर रोगी को कोई समस्या नहीं भी हो सकती है लेकिन लगातार उस पदार्थ का सेवन करने पर एलर्जीजन्य लक्षण पुन: उत्पन्न हो सकते हैं।
खाद्य जनित एलर्जी के अतिरिक्त दवाओं के सेवन से भी एलर्जी पैदा हो जाती है जिसे औषधि जनित एलर्जी कहा जाता है। यह एक अत्यंत जटिल विषय है। बिना डॉक्टर की सलाह के अपना इलाज स्वयं नहीं करना चाहिए। ऐसा करना खतरनाक हो सकता है।

जिन्हें किसी विशेष दवा से एलर्जी होती है, उन्हें अन्य दवाओं से भी समस्या उत्पन्न हो सकती है लेकिन कब और किस दवा से एलर्जी पैदा होगी, इसे पहले से समझना संभव नहीं है।

औषधिजनित एलर्जी से छुटकारा पाने के लिए एलर्जी पैदा करने वाली दवाओं का सेवन न करना ही बेहतर उपाय है। आवश्यकता होने पर वैसी दवाओं के सेवन में जरूरी एहतियात की आवश्यकता होती है।


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