Wednesday, March 18, 2026
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कक्षा एक और दो की किताबों में बदलाव, शिक्षकों के सामने चुनौती

  • एनसीईआरटी की कक्षा तीन की किताबें कक्षा एक में लगाई
  • दो-दो पुस्तकें और नोटबुक लगती है कक्षा एक और दो में जो पहुंची ही नहीं

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में शिक्षण कार्य शुरु हुए 15 दिन का समय बीत चुका है लेकिन ठीक से पढ़ाई शुरु नहीं हो सकी है। कक्षा एक व दो के छात्रों को मिलने वाले कोर्स में अचानक बदलाव होने से शिक्षकों के सामने अब नई चुनौती पैदा हो गई है। पहले जो किताबें कक्षा तीन व चार में लगती थी, अब उन्हीं को कक्षा एक व दो के छात्रों पढ़ने के लिए दिया गया है। वहीं, दोनों कक्षाओं के लिए किताबें तो भेज दी गई लेकिन वर्कबुक अभी भी बच्चों को नहीं दी गई है जिससे शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है।

बेसिक स्कूलों की कक्षा एक में प्रवेश की आयु छह वर्ष निर्धारित है। जबकि पहली कक्षा में बच्चों को अक्षर ज्ञान, वर्णमाला का ज्ञान, मात्राओं का ज्ञान, दो वर्णो से मिलकर बनने वाले शब्द व चार वर्णों से मिलकर बनने वाले शब्द कौन से है और कैसे बनते है यह पढ़ाया जाता है, लेकिन इस बार कक्षा एक के लिए एनसीईआरटी की वह पुस्तकें भेज दी गई जो कक्षा तीन में लगती है। इन पुस्तकों में कहानी व पैराग्राफ के जरिए बच्चों को पढ़ाया जाता है

जो कक्षा एक के छात्रों के लिए संभव नहीं है। यही हाल कक्षा दो में पढ़ने वाले छात्रों का भी है इन्हें भी एनसीईआरटी की कक्षा चार की पुस्तकें पढ़ने के लिए दी गई है। प्राथमिक विद्यालय ख्वांजापुर के स्कूल इंचार्ज विनोद त्यागी का कहना है ऐसा पहली बार हुआ है जब कक्षा एक व दो के छात्रों को कक्षा तीन व चार की पुस्तकें से पढ़ाया जा रहा है। विनोद त्यागी का कहना है वह आज बीएसए कार्यालय पर प्रकरण को लेकर शिकायत दर्ज कराएंगे।

चार बेसिक शिक्षकों की वेतन वृद्धि पर रोक से हड़कंप

बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में शिक्षकों द्वारा ही शिक्षण कार्य में शिथिलता बरती जा रही है। जिसको लेकर बीएसए ने सख्त कदम उठाते हुए चार शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगते हुए उनकी वर्ष 2024-25 की वेतन वृद्धि पर रोक लगा दी है।
जिला बेसिक शिक्षाधिकारी आशा चौधरी ने पत्र जारी किया है जिसमें प्रधान अध्यापिका प्राथमिक विद्यालय कौल रश्मि रानी, सहायक अध्यापिका प्रा.वि. कौल मीनू चौधरी, प्रधान अध्यापिका उच्च प्रा.वि. कौल रजी अहमद व सहायक अध्यापिका उच्च प्रा.वि. कौल नेहा चहल से शिक्षण कार्य में लापरवाही बरतने पर स्पष्टीकरण मांगा है।

स्पष्टीकरण के बाद प्रकरण का निस्तारण होने तक इन चारों शिक्षकों की वर्ष 2024-25 की वेतन वृद्धि पर रोक लगाई गई है। गौरतलब है कि 28 जून को बीएसए ने खंड शिक्षाधिकारी मवाना के कार्यक्षेत्र में आने वाले विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान बीएसए को विद्यालय में सुबह 7.40 पर मात्र एक सहायक अध्यापिका मेघा रानी ही उपस्थित मिली थी। जबकि प्र.अ. रश्मि रानी व स.अ. मीनू चौधरी बिना किसी अवकाश लिए अनुपस्थित पाई गई थी।

जबकि स्कूल शिक्षामित्र की ड्यूटी पॉलिटेक्निक कॉलेज मवाना में लगी थी। विद्यालय में पंजीकृत कुल 61 छात्रों में से महज एक छात्र ही उपस्थित पाया गया। जबकि विभाग ने ग्रीष्म कालीन अवकाश के बाद स्कूल खुलने से पहले स्कूलों की साफ-सफाई कराने, बच्चों का तिलक लगाकर स्वागत करने और मिड-डे-मील में विशेष पकवान बनवाने के आदेश दिए थे। इसके साथ ही स्कूल में उगी जंगली घासों को भी साफ कराना था जो नहीं कराया गया।

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