Tuesday, March 17, 2026
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गुदड़ी बाजार के तिहरे हत्याकांड में सभी दोषियों को आजीवन कारावास

  • सभी आरोपियों पर 50-50 हजार का जुर्माना भी लगाया

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: महानगर के कोतवाली थाना क्षेत्र के तहत गुदड़ी बाजार में 16 साल पहले हुए तिहरे हत्याकांड में सोमवार को अदालत ने हाजी इजलाल कुरैशी व शीबा सिरोही समेत सभी 10 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 50-50 हजार रुपये का सभी पर जुर्माना भी लगाया। कचहरी परिसर स्थित नई बिल्डिंग स्थित कोर्ट नंबर-14 में अपर जिला जज स्पेशल एंटी करप्शन पवन शुक्ला ने खचाखच भरी कोर्ट में सजा का ऐलान किया। इसके साथ ही सभी दोषियों को पुलिस ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जेल भेज दिया। पीड़ितों ने फैसले पर अंसतोष जताते हुए हाईकोर्ट जाने की बात कही है।

गुदड़ी बाजार के बहुचर्चित तिहरे हत्याकांड में दो अगस्त को अपर जिला जज पवन शुक्ला ने इजलाल कुरैशी पुत्र इकबाल, अफजाल पुत्र इकबाल, महराज पुत्र महताब, कल्लू उर्फ कलुआ पुत्र हाजी अमानत, इजहार, मुन्नू ड्राइवर उर्फ देवेंद्र आहूजा पुत्र विजय, वसीम पुत्र नसरुद्दीन, रिजवान पुत्र उस्मान और बदरुद्दीन पुत्र इलाहीबख्श और शीबा सिरोही पर लगाए गए आरोपों को सही मानते हुए दोषी करार दिया। हत्याकांड के दो अन्य आरोपी इसरार और माजिद की मौत हो चुकी है।

एक आरोपी शम्मी जेल में है, उसका ट्रायल चल रहा है। परवेज की हाईकोर्ट में अपील पेंडिंग है। सोमवार शाम चार बजे अदालत बैठी। 4.20 मिनट पर सभी कसूरवारों को कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट रूम में लाया गया। सभी को कठघरे में खड़ा कर अपर जिला जज पवन शुक्ला ने आजीवन कारावास व 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुना दी। सजा सुनाए जाने के बाद सभी को कड़ी सुरक्षा के बीच जिला कारागार पहुंचा दिया गया। पुलिस की जिस गाड़ी से उन्हें लाया गया था, उसके आगे पीछे भी भारी पुलिस फोर्स चल रही थी।

चांटे के बदले में हुई थी तीनों की निर्मम हत्या

सुनील ढाका, सुधीर गिरी, पुनीत उज्जवल की हाजी इजलाल से दोस्ती थी। सभी मेरठ कालेज में पढ़ने वाले थे। बताया जाता है कि जिस दिन हत्या की वारदात अंजाम दी गयी थी, उससे एक दो दिन पहले इजलाल को चांटा मार दिया था। उसके बाद दोस्ती में दरार आ गई थी। बताया जाता है कि चांटे की वारदात दिल पर न ले और सॉरी बोलने के लिए सुनील ढाका, सुधीर गिरी व पुनीत उज्जवल उसके घर पहुंचे थे। यह भी पता चला है कि उस वक्त इजलाल दोस्तों के सामने थोड़ा दबकर रहता था या फिर दोस्तों का दबदबा उस पर भारी पड़ता था।

करीबी यही बताते हैं कि इजलाल पर अक्सर भारी पड़ने वाले दोस्त इसी आत्मविश्वास में गुदड़ी बाजार स्थित मकान पर जा पहुंचे थे। बताया जाता है कि वहां पर आपस में खाना पीना चल रहा था। हंसी मजाक हो रहा था, उस दौरान धमकाने के अंदाज में ऊंची आवाज मेें कुछ कह दिया, बस फिर क्या था। पिस्टल निकाली और तीनों को गोली मार दी। जिस वक्त यह घटना हुई, इजलाल के दोनों भाई भी वहां मौजूद थे। उन्हें यह भी पता था कि इजलाल को चांटा मारा गया है। चांटे की आग में सुलग रहे इजलाल और उसके भाइयों ने गोली मारने के बाद पाइपों से तीनों की बुरी तरह से पिटाई की थी। यातनाएं दी गयीं थी।

आंखें फोड़ दी गयीं थी और फिर गला काट डाला गया था। गला काटने के बाद भी बदले की आग पूरी नहीं हुई तो दुर्गती पर उतर आए। जब तीनों की सांसें थम गर्इं तो लाशों को सबमर्सिबल पंप चलाकर धोया गया था। बताते हैं कि इनके शरीर से इतना खून निकला था कि मकान के चबूतरे के बाहर तक का पूरा हिस्सा खून से लाल हो गया था। तीनों की लाशों को गाड़ी में लादकर बालैनी के जंगल में ले जाकर फेंक दिए थे।

भाजपा और हिंदू संगठन के नेता बोले-दी जाए फांसी

कोतवाली थाना के गुदड़ी बाजार में अंजाम दिए गए तिहरे हत्याकांड के दोषियों को आजीवन कारावास से हिन्दू संगठनों व भाजपा के कुछ नेता संतुष्ट नहीं। हिन्दू संगठन के सचिन सिरोही ने कहा कि आजीवन कारावास नहीं 10 के 10 कसूरवारों को फांसी की सजा दी जानी चाहिए। उन्होंने कहाकि फैसले से हिन्दू समाज में निराश है। 20 मई 2008 को तीन हिन्दुओं की जिस प्रकार से हत्या कर दी गयी। उससे हिन्दू समाज में आक्रोश था। उम्मीद की जा रही थी कि इस मामले में फांसी की सजा दी जाएगी।

फांसी की सजा ना दिए जाने से निराशा है। वहीं, दूसरी ओर इससे पहले दोपहर को मेरठ कालेज के कई पूर्व छात्र नेता तथा भाजपा नेता भी कोर्ट रूम में पहुंचे थे। इनमें भाजपा के अंकित चौधरी, दीपक शर्मा, पीयूष शास्त्री, राकेश गौड़, राजीव काले पार्षद, रोहित चौधरी आदि भी शामिल हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि उम्मीद की जा रही थी कि सभी को फांसी की सजा सुनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि बेहतर होता फांसी दी जाती। जिस प्रकार से हत्या की गयी उसमें कम से कम फांसी की सजा दी जानी चाहिए थी।

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