Tuesday, May 19, 2026
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एलर्जिक बीमारियों की बरसात

Sehat 2

सीतेश कुमार द्विवेदी

वर्षाकाल मनभावन मौसम कहलाता है। इस अवधि में उमड़ते, घुमड़ते, चमकते, गरजते एवं बरसते बादलों से मन प्रसन्न एवं प्रफुल्लित हो उठता है। वषार्काल की इस आनन्दमय अवधि को एलर्जिक बीमारियां पीड़ादायक बना देती हैं। बारिश एलर्जिक बीमारियां साथ लेकर आती हैं। इन दिनों गले, आंखों की एलर्जी, खांसी, जुकाम, सांस और जोड़ों की पीड़ा बढ़ जाती है। वर्षाकाल का प्रवेश जून मास के तापमान में सतत उतार चढ़ाव लाता है। इसके बाद जुलाई, अगस्त में झड़ीदार बारिश होती है जबकि अक्टूबर, नवंबर में खुशनुमा सुहावना मौसम होता है। यदा कदा हवा से ठंडी सिरहन होती है। इतने सब उतार-चढ़ाव के बाद भी हमारी दिनचर्या एवं खानपान, रहन-सहन गर्मी जैसा रहता है। हम उसमें ऋतु के अनुरूप बदलाव नहीं लाते जबकि वर्षाकाल के समय शरीर नाजुक होता है जिसमें अनेक रोगों के साथ एलर्जिक बीमारियों व जोड़ों में दर्द की शुरूआत होती है।

एलर्जिक बीमारियां

वर्षा काल में तापमान में कमी के कारण, बैक्टीरिया, वायरस अर्थात जीवाणुओं, कीटाणुओं को पनपने का अवसर मिलता है। तब शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी के कारण इनका प्रभाव बढ़ जाता है जिससे हर कोई संक्रमित होता है। इस समय गले की एलर्जी और सांस लेने की तकलीफ बढ़ जाती है। खांसी, जुकाम जल्द पकड़ता है। अस्थमा का दौरा पड़ने लगता है। एलर्जी के कारण ही त्वचा में दाने व रेशेज होते हैं। आंखों के लाल होने व उनमें खुजली की शिकायत बढ़ जाती है।

एलर्जी से बचाव

वर्षाकाल में धूप की कमी के कारण घरों में सीलन बढ़ जाती है। कपड़े ठीक से सूख नहीं पाते हैं। इससे उनमें छिपे जो एलर्जी तत्व होते हैं, उनकी सक्रि यता बढ़ जाती है, अतएव जब भी मौसम खुले एवं धूप निकले, कपड़ों को धूप दिखाएं। इससे इनकी सीलन खत्म होगी। दिन में तीन चार बार आंखों को साफ पानी से धोएं। धूप का चश्मा पहनें। तेज हवा-पानी से बचें। खानपान, पौष्टिक व संतुलित हो। इससे रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ेगी। हर रोज गुनगुने पानी से नहाएं। ज्ञात एलर्जिक तत्वों से दूर रहें।

जोड़ों में दर्द

यूं तो जब भी ऋतु परिवर्तन होता है तब जोड़ों में पीड़ा की परेशानी बढ़ जाती है। इनमें वर्षाकाल ऐसा होता है जिसमें यह परेशानी और अधिक होती है। कमर दर्द, पीठ दर्द, गर्दन में दर्द, हाथ पैर में अकड़न होती है। गठिया एवं हड्डी रोग वालों की परेशानी बढ़ जाती है। वृद्ध एवं महिलाएं इससे ज्यादा पीड़ित होती हैं।

जोड़ों में दर्द से बचाव

बारिश के पानी में ज्यादा न भीगें। यदि भीगे हैं तो जल्द शरीर सुखा लें। जब भी नहाएं, नमक मिले गुनगुने पानी से नहाएं। ए सी, कूलर की ठंडी हवा से बचें। ठंडी जगहों पर न जाएं। ठंडा पानी, कोल्ड ड्रिंक्स, आइसक्र ीम आदि न लें। बासी चीजें न खाएं। पंखे के सीधे नीचे न रहें। कपड़े धुले, साफ व सूखे पहनें। रात में ठंड होने पर चादर उपयोग करें।

बारिश में बचाव

ज्यादा भीगने के बाद बदन व सिर सुखाकर सूखे कपड़े पहन लें। हल्दी मिला गर्म दूध, अदरक वाली चाय या काफी पिएं। गले में खराश की स्थिति में गरम पानी या नमक मिले गर्म पानी से एक दो बार गरारे करें। श्वांस एवं हड्डी के रोगी ज्यादा भीगनें से बचें।

छाती में जकड़न

वर्षाकाल में वातावरण में नमी के कारण बच्चों, बूढ़ों एवं श्वांस के रोगियों को ठंड लग जाती है। जल्द सर्दी-जुकाम हो जाता है। सांस लेने में परेशानी होती है। सांस नली में कफ जम जाता है।

एलर्जिक बीमारियों की बरसात

पानी में भीगने एवं ठंडी हवाओं से बचें। खुले एवं धूप वाले स्थान पर रहें। गुनगुने पानी से नहाएं। साफ व सूखे कपड़े पहनें। सुबह शाम स्वच्छ हवा में घूमें। भोजन ताजा पौष्टिक हो। कम मात्र में भोजन करें। भोजन सुपाच्य हो पर भारी कदापि न हो।

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