Saturday, March 21, 2026
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शहर के अमन को पलीता लगाने के लगातार हो रहे प्रयास

  • खुफिया तंत्र की लगातार खुल रही पोल, कैसे हो कार्रवाई जब भनक तक नहीं

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: यति नरसिंहानंद के बयान के विरोध के नाम पर लगातार शहर के अमन ओ अमान में पलीते का प्रयास किया जा रहा है। वो कौन लोग हैं? जिनको शहर की शांति रास नहीं आ रही है। शहर में नवरात्र व रामलीला मंचनों की धूम हैं। भारी संख्या में लोग इन आयोजनों में जमा हो रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर यति के बयान के विरोध के नाम पर लगातार विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है। जबकि पुलिस प्रशासन के आला अधिकारियों द्वारा बार-बार बताया जा रहा है कि बयान के मामले में मुकदमा पहले ही दर्ज किया जा चुका है।

पुलिस ने कार्रवाई कर दी, लेकिन इसके बाद भी यति के बयान के विरोध के नाम पर माहौल में पलीता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। आला पुलिस अधिकारी भी मान रहे हैं कि सोमवार को मुंडाली में जो कुछ किया गया उसकी अपेक्षा नहीं की गयी था तथा वह संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। वहीं, दूसरी ओर सबसे गंभीर बात यह है कि जितने भी विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं, वे सभी बगैर अनुमति के अचानक किए जा रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि बाकायदा प्लानिंग के तहत ऐसा हो रहा है। शहर के अलग-अलग इलाकों में ये विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। विरोध प्रदर्शनों में जितनी बड़ी संख्या में लोग नजर आते हैं, उससे यह तो स्पष्ट है कि यह केवल संयोग भर नहीं बल्कि कुछ ना कुछ ऐसा है जिसको प्रयोग कहा जा सकता है।

अब तक ये हुए विरोध प्रदर्शन

बीते शुक्रवार को अचानक एक भीड़ इस्लामाबाद की ओर से आयी और सीधे जाकर थाना लिसाड़ीगेट जा घेरा। यह बात अलग है कि पुलिस ने मामले को मैनेज कर लिया। बात को बढ़ने नहीं दिया गया। दो बार थाना लोहिया नगर पर भारी संख्या में लोग जा पहुंचे। यति नरसिंहानंद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने को बाकायदा तहरीर दी गयी। बीती शनिवार को लिसाड़ी में देर रात भारी संख्या में लोग अचानक जमा होते हैं। इसमें आजाद समाज पार्टी के भी लोग होते हैं। बयान के खिलाफ वो प्रदर्शन करते हैं।

वहीं, दूसरी ओर ब्रह्मपुरी से भी लोग सामने आ जाते हैं। इससे पहले कि उनके बीच टकराव हो एक सूचना पर वक्त रहते एसपी सिटी भारी पुलिस फोर्स लेकर वहां पहुंच जाते हैं। दोनों के बीच पुलिस दीवार बनकर खड़ी जाती है। सोमवार को मुंडाली में भी कुछ इसी तर्ज पर लोग जमा होते हैं। यहां केवल जमा ही नहीं होते। विरोध प्रदर्शन, पुलिस पर पथराव व नारेबाजी भी होती है, लेकिन इसकी भनक भी खुफिया सूचना तंत्र के लिए काम करने वालों को नहीं लग पाती।

खुफिया सूचना तंत्र की लगातार खुल रही पोल

बयान के विरोध में प्रदर्शन के नाम पर अब तक जो कुछ सामने आया है, उसने खुफिया सूचना तंत्र यानि एलआईयू की पोल खोलकर रख दी है। अब तक छह बार ऐसा किया जा चुका है, लेकिन एक भी बार भी इसी पूर्व सूचना नहीं दी जा सकी ताकि वक्त रहते पुलिस बंदोबस्त किया जा सकता। जिसके चलते कहा जा रहा है कि जो लोग ऐसा कर रहे हैं वो इस बात का भी लगातार ध्यान रखे हैं कि उनकी प्लानिंग टॉप सीक्रेट रहे और लॉस्ट मूवमेंट तक इसकी भनक तक नहीं लग सके। ऐसा करने में वो पूरी तरह से सफल भी रहे हैं।

सीएम की दो टूक, ना अनर्गल टिप्पणी, ना अराजकता बर्दाश्त होगी

किसी का नाम लिए बगैर सीएम योगी ने मजहब को लेकर बयानबाजी वालों को कड़ी लताड़ ही नहीं लगाई, कठोर कार्रवाई की चेतावनी भी है। इसके अलावा उन्होंने विरोध प्रदर्शन के नाम पर अराजकता फैलाने वालों को भी चेतावनी दी है। सोमवार को सीएम योगी ने कहा है कि किसी भी जाति, मजहब अथवा सम्प्रदाय से जुड़े हुए इष्ट देवी-देवता, महापुरुषों अथवा साधु-संतों के विरुद्ध अपमानजनक टिप्पणी अस्वीकार्य है, लेकिन विरोध के नाम पर अराजकता भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सोमवार को अपने सरकारी आवास पर आगामी पर्व व त्योहारों के दृष्टिगत मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, अपर मुख्य सचिव गृह एवं अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कानून व्यवस्था की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मत तथा सम्प्रदाय आदि की आस्था का सम्मान होना चाहिए। महापुरुषों के प्रति प्रत्येक नागरिक के मन में कृतज्ञता का भाव होना चाहिए, लेकिन इसके लिए न तो किसी को बाध्य किया जा सकता है और न ही किसी पर जबरन थोपा जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि कोई भी व्यक्ति आस्था के साथ खिलवाड़ करेगा

अथवा महापुरुषों, देवी-देवताओं, सम्प्रदाय आदि के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करेगा, तो उसे कानून के दायरे में लाकर कठोरतापूर्वक सजा दिलवायी जाएगी। उन्होंने कहा कि विरोध के नाम पर अराजकता, तोड़फोड़ अथवा आगजनी कतई स्वीकार नहीं की जाएगी, यदि कोई व्यक्ति ऐसा दुस्साहस करेगा तो उसे इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। मुख्यमंत्री ने पुलिस प्रशासन को निर्देश देते हुए कहा  कि शारदीय नवरात्रि तथा विजयादशमी का पर्व हर्षोल्लास, शांति और सौहार्दपूर्ण वातावरण के बीच सम्पन्न होना चाहिए। यह प्रत्येक जनपद तथा प्रत्येक थाने को सुनिश्चित करना होगा।

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