- इसके चलते हवाई पट्टी को लेकर नहीं हो सका कोई निर्णय
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: हवाई पट्टी का विस्तार करने से संबंधित प्रस्ताव पर चर्चा करने के लिए बुधवार को लखनऊ में बैठक बेनतीजा रही। राज्यसभा सांसद डा. लक्ष्मीकांत वाजपेई का कहना है कि अभी कोई निर्णय नहीं हो सका है, चर्चा जरूर हुई है। बैठक में कई अधिकारी नहीं पहुंच सके, जिसके कारण कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका।
परतापुर हवाई पट्टी का विस्तार करके यहां से 72 सीटर विमान उड़ाने का दावा पिछले 10 वर्षों से किया जा रहा है। वर्तमान में यहां 280 मीटर चौड़ा और 2280 मीटर लंबा रनवे है। जिला प्रशासन की ओर से हवाई पट्टी के विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। शासन पैसा जारी करेगा, उसी से भूमि अधिग्रहण करेंगे। एयरपोर्ट अथारिटी आफ इंडिया भूमि मिलने की प्रतीक्षा कर रही है।
भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व राज्यसभा सदस्य डा. लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने बताया कि लखनऊ में हुई बैठक में हवाई पट्टी को लेकर चर्चा हुई, लेकिन कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका। निशुल्क भूमि उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है। एटीआर 72 के लिए जितनी लंबी पट्टी की आवश्यकता होती है, वह 2280 मीटर लंबी और 210 मीटर लंबी भूमि उपलब्ध है। कुछ लोगों की जमीन खरीदने के लिए 23 करोड़ रुपये की आवश्यकता है, ताकि एयरपोर्ट अथोरिटी आॅफ इंडिया के नाम बैनामा हो सके। इससे विवाद समाप्त हो जाएगा।
इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए अतिरिक्त भूमि चाहिए
मेरठ में इंटरनेशनल एयरपोर्ट निर्माण के लिए अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता होगी। मौजूदा उपलब्ध भूमि पर ही 72 सीटर विमान उड़ाने की योजना पर फोकस किया जा रहा है। मेरठ विकास प्राधिकरण के साथ साथ किसानों से चार हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। मुआवजा के लिए धन की जरूरत है। प्राधिकरण को 18 हेक्टेयर जमीन का बैनामा करना है। यह भूमि 22 करोड़ की है, पर वर्तमान में इसकी कीमत करीब 100 करोड़ है। बैठक में तय होना था कि भूमि का बैनामा कराने की एवज में प्राधिकरण को 22 करोड़ मिलेंगे
या 100 करोड़, लेकिन लखनऊ में हुई बैठक बे नतीजा रही। बैठक में हवाई पट्टी को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका। तकनीकी सर्वे भी कर चुका है। एएआई हवाई पट्टी का विस्तार करके 72 सीटर विमान उड़ाने के लिए अपनी सहमति दे चुकी है। वहीं, हवाई पट्टी विस्तार के लिए जिस भूमि की जरूरत है। उसे लेकर नौ मुकदमे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। यही कारण है कि कार्रवाई आगे नहीं बढ़ रही है। अब राज्य सरकार से मुआवजा की राशि को कोर्ट में जमा कराकर भूमि पर कब्जा लेने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है।

