नीतू गुप्ता
कहा जाता है अगर पेट खराब तो पूरा स्वास्थ्य खराब क्योंकि हमारे स्वास्थ्य का केंद्र हमारा पेट होता है। अगर पाचनतंत्र दुरूस्त है तो हमारा शरीर ठीक है। अगर पाचन तंत्र सुस्त है तो हमारा खाया भोजन शरीर को लाभ न पहुंचाकर नुकसान पहुंचाता है। पेट खराब होने पर हमारे शरीर के अन्य अंग भी प्रभावित होते हैं जैसे ह्नदय, मस्तिष्क, त्वचा शरीर में हार्मोंस का स्तर आदि। पाचन प्रणाली सुचारू न होने से शरीर में विषैले तत्वों की मात्र बढ़ जाती है जिससे हमारा इम्यून सिस्टम खराब हो जाता है और हम बार-बार बीमार पड़ते हैं।
पेट फिट रखने के लिए
’ खाना निश्चित समय पर शांत मन से खाएं।
’ खाने को धीरे-धीरे चबा कर खाएं और मुख्य तीन आहार जो हम लेते हैं, उन्हें ठूंस ठंूस कर न खाएं बल्कि थोड़ा-थोड़ा कर दिन में उसे मिनी मील के रूप में खाएं। मात्र उतनी ही रखें जितना आपका कुल आहार है।
’ मौसमी फल-सब्जियों का सेवन करें क्योंकि इन्हें पचाना आसान होता है और मौसम अनुसार शरीर को पौष्टिकता भी मिलती है।
’ अधिक तले हुए, ज्यादा मसालेदार भोजन का सेवन न करें।
’ खाना पचाने के लिए शरीर का सक्रिय रहना जरूरी है। ’ ’ नियमित रूप से व्यायाम करें।
’ धूम्रपान, मद्यपान, सॉफ्ट ड्रिंक्स, चाय-काफी से दूर रहें, अगर लें तो बहुत ही सीमित मात्र में लें।
’ तनाव में भोजन न करें। यह शरीर को नुकसान पहुंचाता है और कब्ज होना भी तनाव में रहने का मुख्य कारण है। इसलिए तनाव से दूर रहने का प्रयास करें।
’ रेशेदार भोजन का सेवन करें, यह कब्ज को दूर रखता है और मोटापा कम करने में मदद करता है।
’ लंबे समय तक कब्ज रहने से गैस की समस्या होती है। इस समस्या को प्रारंभ से ही कंट्रोल करें।
’ दिनभर में एक दो गिलास गुनगुना पानी लें। हो सके प्रात:काल एक गिलास लें।
’ खाने के तुरंत बाद टहलें, ताकि खाना पच सके और पेट फूलने की समस्या से भी बचाव हो सके।
’ अपने उठने-सोने, खाने-पीने का समय निश्चित करें।
पेट की बीमारियां
कब्ज:-कब्ज कई बीमारियों की जड़ है। इसका अर्थ है ठीक से पेट का साफ न होना। बड़ी आंत से खाया हुआ खाना मल के रूप में कठिनाई से बाहर आता है। बड़ी आंत अवरूद्ध हो जाति है जिससे कई घातक बीमारियां हो सकती हैं। इसका प्रमुख कारण है खाने-पीने की गलत आदतें, गलत लाइफस्टाइल, हारमोन संबंधी गड़बड़ियां या दवाइयों के साइड इफेक्ट आदि। कारण जानकर समय रहते इसका इलाज कराएं।
पेट फूलना:-गैस होने पर भी पेट फूलना महसूस होता है और हर्निया के कारण पेट भी फूल सकता है। कई बार हम अधिक वसा वाला खाना खा लेते हैं। उससे भी पेट फूल सकता है।
डायरिया:-जब बड़ी आंत में मौजूद खाने से तरल पदार्थ ठीक से अवशोषित नहीं हो पाते या अतिरिक्त तरल भी बड़ी आंत में पहुंच जाता है तो मल पतला निकलता है। दो बार पतला मल निकलना साधारण बात है। अगर दिन में उससे अधिक बार पतला मल निकलता है तो हमारे अंदर पानी की कमी हो सकती है। ज्यादा पानी कम होने से रोगी की स्थिति बिगड़ सकती है। ओआरएस का घोल लें। छाछ, नींबू पानी, नारियल पानी का सेवन थोड़़ी थोड़ी देर में करें। डायरिया पाचन मार्ग के संक्र मण से भी हो सकता है। डाक्टर से संपर्क कर उचित इलाज कराएं।
कोलाइटिस:-बड़ी या छोटी आंत में छाले पड़ जाने पर कुछ भी खाते समय जलन होती है। यह इसका मु?य लक्षण है। जलन शांत करने के लिए बार-बार पानी पीना पड़ता है। कोलाइटिस से बड़ी आंत में सूजन भी हो सकती है। छाले फटने पर कभी कभी मल के साथ रक्त भी बाहर आता है। डाक्टर से परामर्श उचित इलाज करवाना जरूरी है। इलाज में देरी से बीमारी बढ़त सकती है, जिससे परेशानी होगी

