Wednesday, March 25, 2026
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उपराष्ट्रपति पद को लेकर Akhilesh Yadav का तीखा तंज, बोले, “अब इंडिया ब्लॉक तय करेगा”, चुनाव आयोग पर भी साधा निशाना

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: दिल्ली में समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव ने महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन को एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बनाए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए जहां विपक्ष की एकजुटता की बात कही, वहीं चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप भी लगाए।

उपराष्ट्रपति पद पर सपा प्रमुख की टिप्पणी

अखिलेश यादव ने तंज भरे लहजे में कहा “उपराष्ट्रपति का पद खाली है। पहले जो उपराष्ट्रपति थे, वो अब कहां हैं? एक नया उपराष्ट्रपति चुना जाएगा। यह अच्छी बात है। हम क्या फैसला लेंगे, यह अलग बात है। हम बैठकर तय करेंगे।” उन्होंने संकेत दिया कि उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर इंडिया ब्लॉक में बातचीत होगी और वही कोई साझा निर्णय लेगा।

राजनाथ सिंह से बातचीत के संकेत

सपा प्रमुख ने केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को वरिष्ठ नेता बताते हुए कहा “वह उत्तर प्रदेश से हैं, अगर वह बात करेंगे तो हम भी बात करेंगे। जरूरत होगी तो बातचीत जरूर करेंगे।” हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि सपा की राजनीतिक लाइन स्पष्ट है और वह किसी भी फैसले पर इंडिया ब्लॉक की सहमति से ही आगे बढ़ेगी।

चुनाव आयोग पर तीखा हमला

अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए “चुनाव आयोग जानबूझकर पिछड़ी जातियों के वोट काटता है। “मीडिया में यह दिखाया जाता है कि उन्हें पिछड़ों का समर्थन मिल रहा है, जबकि सच्चाई उलट है। “हमारी मांग सिर्फ इतनी है कि किसी एक डीएम को सस्पेंड कर दिया जाए, तो पूरे देश में वोट नहीं कटेगा।”

उन्होंने कहा कि 2017 में चुनाव आयोग ने अधिकारी हटाए, लेकिन 2019, 2022 और 2024 में एक भी नहीं। इससे स्पष्ट है कि आयोग भाजपा के दबाव में काम कर रहा है।

फर्जी वोटिंग और BLO पर सवाल

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि छिबरामऊ में भाजपा विधायक ने 400 फर्जी वोट डलवाए, जिनमें से सपा ने 200 से अधिक फर्जी वोट हटवाए।

उन्होंने यह भी मांग की कि BLO और पीठासीन अधिकारियों की नियुक्ति जाति के आधार पर न की जाए, क्योंकि यह निष्पक्षता को प्रभावित करता है।

ममता बनर्जी की हार पर भी उठाए सवाल

सपा प्रमुख ने कहा “जब ममता दीदी विधानसभा चुनाव हारी थीं, तब चुनाव आयोग सीधे थाना प्रभारी और पुलिस अधिकारियों से बात कर रहा था।” यह टिप्पणी चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर एक बार फिर सवाल खड़े करती है।

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