नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। सनातन परंपरा में सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवता और ग्रह को समर्पित है। गुरुवार का दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और बृहस्पति ग्रह की पूजा के लिए विशेष शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किए गए उपाय भाग्य को चमकाते हैं, आर्थिक उन्नति का मार्ग खोलते हैं और जीवन के अशुभ प्रभावों को दूर करते हैं। बृहस्पति को ज्योतिष शास्त्र में गुरु, धर्म, ज्ञान, संतान सुख और धन-संपत्ति का कारक माना गया है। कुंडली में बृहस्पति की स्थिति कमजोर होने पर व्यक्ति को दरिद्रता, शिक्षा में रुकावट और दांपत्य जीवन की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
पीले वस्त्र और दान
गुरुवार के दिन पीले वस्त्र धारण करने और पीले रंग की वस्तुएं दान करने से बृहस्पति ग्रह प्रसन्न होते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गरीबों को चना दाल, हल्दी, पीले कपड़े या केला दान करने से दुर्भाग्य दूर होता है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।
विष्णु-लक्ष्मी पूजन
गुरुवार को भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की संयुक्त उपासना करना अत्यंत फलदायी माना गया है। सुबह स्नान कर विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने और देवी लक्ष्मी को कमल पुष्प अर्पित करने से जीवन में आर्थिक संकट समाप्त होते हैं।
पीपल और केले के वृक्ष की पूजा
ज्योतिष मान्यता के अनुसार गुरुवार को केले के पेड़ की जड़ में जल चढ़ाना और दीपक प्रज्वलित करना शुभ होता है। वहीं, पीपल के पेड़ की पूजा कर उसके नीचे शुद्ध घी का दीपक जलाने से बृहस्पति की कृपा प्राप्त होती है और घर में दरिद्रता दूर होती है।
गुरु मंत्र और गायत्री जप
जिन जातकों की कुंडली में बृहस्पति पीड़ित या कमजोर हो, उन्हें गुरुवार के दिन गुरु बीज मंत्र— “ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः”—का 108 बार जप करना चाहिए। साथ ही गायत्री मंत्र का जप भी अत्यंत शुभ माना गया है। इससे भाग्य जाग्रत होता है और शिक्षा, करियर तथा पारिवारिक जीवन में उन्नति मिलती है।
बेसन और गुड़ का भोग
गुरुवार को प्रसाद के रूप में बेसन के लड्डू या गुड़-चना अर्पित करने से विष्णु-लक्ष्मी प्रसन्न होते हैं। यह भोग मंदिर में अर्पित करने के साथ-साथ ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान करने से घर में धन की वृद्धि होती है।
व्रत और कथा श्रवण
गुरुवार का व्रत करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। व्रती को इस दिन पीले रंग का भोजन करना चाहिए और नमक का परहेज रखना चाहिए। व्रत के साथ बृहस्पतिवार व्रत कथा का श्रवण करने से बाधाओं का निवारण होता है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

