Friday, March 20, 2026
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सहारा की संपत्तियों पर Supreme Court में बड़ी याचिका, अदाणी प्रॉपर्टीज को बेचने की तैयारी, एम्बी वैली और लखनऊ सहारा शहर शामिल

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: सहारा समूह की कंपनियों के भविष्य से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। समूह की नीति निर्धारण इकाई सहारा इंडिया कमर्शियल कॉरपोरेशन लिमिटेड (SICCL) ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए अपनी प्रमुख संपत्तियों को अदाणी प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड को बेचने की अनुमति मांगी है। इसमें महाराष्ट्र की प्रसिद्ध एम्बी वैली और लखनऊ स्थित सहारा शहर जैसी बड़ी संपत्तियां शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर, सुनवाई संभवतः 14 अक्टूबर को

सहारा समूह की ओर से अधिवक्ता गौतम अवस्थी के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कोर्ट से अनुमति मांगी गई है कि 6 सितंबर 2025 की टर्म शीट में निर्धारित शर्तों के अनुसार संपत्तियां अदाणी ग्रुप को बेची जा सकें।

अब तक कितने करोड़ की संपत्तियां बेची जा चुकीं?

याचिका में बताया गया है कि सेबी-सहारा रिफंड खाते में अब तक लगभग 16,000 करोड़ रुपये की राशि सहारा समूह द्वारा अपनी चल-अचल संपत्तियां बेचकर जमा की जा चुकी है। समूह पर कुल 24,030 करोड़ रुपये की देनदारी है।

SEBI की असफलता पर भी सवाल

याचिका में यह भी कहा गया है कि प्रतिष्ठित रियल एस्टेट ब्रोकरों की मदद के बावजूद, SEBI संपत्तियों की बिक्री में सफल नहीं हो सका, जबकि सहारा समूह ने कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए कठिन प्रयासों से यह राशि जुटाई है।

सुब्रत रॉय के निधन के बाद फैसले में बदलाव

सहारा समूह ने बताया कि नवंबर 2023 में सुब्रत रॉय के निधन के बाद समूह का नेतृत्व रिक्त हो गया। दिवंगत सुब्रत रॉय के परिवार के सदस्य प्रबंधन या संचालन में शामिल नहीं थे, लेकिन अब निवेशकों के हित को ध्यान में रखते हुए संपत्तियों को शीघ्र और उचित मूल्य पर बेचने का फैसला लिया गया है।

जांच एजेंसियों की पूछताछ से जटिल हुई प्रक्रिया

याचिका में बताया गया है कि जांच एजेंसियों द्वारा सुब्रत रॉय के परिवार और अधिकारियों से पूछताछ किए जाने के कारण खरीदारों का भरोसा कमजोर पड़ा और संपत्तियों की बाजार क्षमता प्रभावित हुई है।

कुछ व्यक्तियों द्वारा संपत्ति बेचने की कोशिशों पर चिंता

सहारा ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि कुछ लोगों ने बिना अधिकार पुराने बोर्ड प्रस्तावों का हवाला देकर संपत्तियां बेचने की कोशिश की है, जिस पर रोक लगाने के लिए न्यायालयों में शिकायत दर्ज की गई है।

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