नमस्कार,दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। रोशनी, आस्था और समृद्धि का महापर्व दिवाली इस वर्ष 20 अक्टूबर 2025 को पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि इस दिन प्रदोष काल और निशीथ काल दोनों में स्थित है, जो लक्ष्मी पूजन के लिए अत्यंत शुभ संयोग मानी जा रही है।
लक्ष्मी पूजन का सर्वोत्तम समय
पंचांग के अनुसार, प्रदोष काल 20 अक्टूबर को शाम 5:46 बजे से रात 8:18 बजे तक रहेगा। इस दौरान मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा विधिपूर्वक करने से घर में धन, सुख और समृद्धि का स्थायी वास होता है। विशेष रूप से, शाम 7:08 बजे से 8:18 बजे तक का समय “महा-शुभ मुहूर्त” माना गया है।
क्यों महत्वपूर्ण है प्रदोष काल में पूजन?
प्रदोष काल वह समय होता है जब दिन और रात का संधिकाल होता है और ब्रह्मांड में सात्विक ऊर्जा का प्रवाह उच्चतम स्तर पर होता है। दिवाली की रात, इसी समय देवी लक्ष्मी अपने वाहन उल्लू पर सवार होकर पृथ्वी लोक में भ्रमण करती हैं और उन्हीं घरों में प्रवेश करती हैं जहां स्वच्छता, दीपों की रौशनी और श्रद्धा-भक्ति का वातावरण होता है।
दिवाली और लक्ष्मी पूजन का आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व?
लक्ष्मी पूजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मानसिक और आर्थिक उन्नति का भी माध्यम है।
भगवान गणेश की पूजा के साथ की गई आराधना जीवन में विवेक, निर्णय शक्ति और संतुलन प्रदान करती है।
व्यापारी वर्ग इस दिन अपने नए खाता-बही की पूजा कर व्यापार में उन्नति की कामना करते हैं।
अमावस्या की रात दीप जलाकर किया गया पूजन जीवन से नकारात्मक ऊर्जा और अज्ञान के अंधकार को दूर करता है।
लक्ष्मी पूजन से प्राप्त होने वाले लाभ?
आर्थिक समृद्धि और धन की प्राप्ति
मन की शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार
परिवार में सौहार्द और सुख-शांति का वातावरण
व्यापार और व्यवसाय में नई शुरुआत और प्रगति
विशेष तिथियां ?
अमावस्या तिथि प्रारंभ: 20 अक्टूबर 2025, दोपहर 3:44 बजे
अमावस्या समाप्त: 21 अक्टूबर 2025, शाम 5:54 बजे
लक्ष्मी पूजन शुभ मुहूर्त: 20 अक्टूबर 2025, शाम 7:08 बजे से 8:18 बजे तक
इस दिवाली, अपने घर को दीपों की रोशनी, स्वच्छता और श्रद्धा से सजाएं, और शुभ मुहूर्त में लक्ष्मी-गणेश पूजन कर धन, वैभव और सुख-समृद्धि का स्वागत करें

