जनवाणी संवाददाता |
सहारनपुर: सहारनपुर में रविवार तापमान सामान्य रहने के बावजूद शहर की वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 322 दर्ज की गई, जो कि बेहद खराब श्रेणी में आती है। खराब हवा, बढ़ती ठंड और नमी के कारण आम जनजीवन प्रभावित हुआ है, वहीं ग्रामीण इलाकों में पाला पड़ना शुरू होने से किसानों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं।
मौसम विभाग के अनुसार रविवार को शहर का अधिकतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं आर्द्रता 69 प्रतिशत दर्ज की गई, जिससे वातावरण भारी बना रहा। सुबह और देर शाम धुंध व स्मॉग की स्थिति देखने को मिली, जिससे दृश्यता में कमी आई और सांस लेने में दिक्कत महसूस की गई।
हवा की गुणवत्ता बनी सबसे बड़ी चिंता
एक्यूआई 322 का स्तर सीधे तौर पर स्वास्थ्य के लिए खतरनाक माना जाता है। इस स्तर पर लंबे समय तक खुले वातावरण में रहने से सांस, हृदय और आंखों से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं। शहर में वाहनों का धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन और हवा की रफ्तार कम होने के कारण प्रदूषण वातावरण में ही जमा रहा।
ग्रामीण क्षेत्रों में पाले से खेती पर खतरा
रात के समय तापमान गिरने से जिले के ग्रामीण इलाकों में पाला पड़ना शुरू हो गया है। खेतों में जमी सफेद परत ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पाले का असर आलू, सरसों, मटर, सब्जियों और गेहूं की शुरुआती फसल पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। किसान पहले से ही मौसम की अनिश्चितता से जूझ रहे हैं और अब पाले के कारण नुकसान का डर सता रहा है।
डॉक्टरों ने दी स्वास्थ्य को लेकर चेतावनी
खराब हवा और बदलते मौसम को लेकर चिकित्सकों ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
डॉ कलीम अहमद ने बताया, “प्रदूषण और ठंड के कारण अस्थमा, एलर्जी और सांस की बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ सकती है।”
डॉ संजीव मिगलानी ने कहा, “बच्चों और बुजुर्गों को इस मौसम में विशेष देखभाल की जरूरत है, क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है।”
डॉ पी.डी. गर्ग ने स्वास्थ्य को लेकर चेताया, “खराब एक्यूआई के कारण ब्लड प्रेशर, हार्ट और सांस के मरीजों की समस्याएं बढ़ सकती हैं। ऐसे मरीज नियमित दवाएं लें और मॉर्निंग वॉक फिलहाल टालें।”
डॉ परवीन शर्मा का कहना है, “सुबह और देर शाम प्रदूषण ज्यादा रहता है। जरूरी होने पर ही बाहर निकलें और मास्क का प्रयोग करें।
”डॉ अभिनव गर्ग ने कहा, “एक्यूआई का स्तर बेहद खतरनाक है। ऐसी हवा में सांस लेना फेफड़ों और हृदय रोगियों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।”
सावधानी ही बचाव
विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक हवा की गति नहीं बढ़ती या मौसम में बदलाव नहीं आता, तब तक प्रदूषण से राहत मिलना मुश्किल है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों से अपील की गई है कि वे अनावश्यक बाहर न निकलें, मास्क का उपयोग करें और घर के अंदर साफ हवा बनाए रखने के उपाय अपनाएं

