जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: भागीरथपुरा क्षेत्र में सप्लाई किए गए जहरीले पानी ने भीषण संकट खड़ा कर दिया है। दूषित पानी पीने से अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है। शुक्रवार सुबह एमवायएच अस्पताल में भर्ती 68 वर्षीय गीताबाई ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है, जबकि स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम अलर्ट मोड पर हैं।
सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र भागीरथपुरा की पान वाली गली है, जहां 20 से अधिक लोग अस्पताल में भर्ती रह चुके हैं। अस्पतालों में कुल 200 से ज्यादा मरीज भर्ती किए गए हैं, जिनमें से करीब 30 की हालत गंभीर बताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग अब तक 5 हजार से अधिक लोगों की जांच कर चुका है।
पानी की जांच रिपोर्ट आई सामने
घटना के बाद नगर निगम द्वारा पानी के सैंपल लिए गए थे, जिनकी जांच रिपोर्ट अब सामने आ गई है। रिपोर्ट के अनुसार क्षेत्र में सप्लाई किया गया पानी पीने योग्य नहीं था। पानी में खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए हैं। रिपोर्ट के बाद अब इलाके में हैजा फैलने की आशंका भी जताई जा रही है, जिसे लेकर स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है।
नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव ने बताया कि पानी के सैंपलों की रिपोर्ट में पानी दूषित पाया गया है। उन्होंने कहा कि कुछ अन्य सैंपलों की रिपोर्ट अभी आनी बाकी है, जिनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री विजयवर्गीय ने ली जिम्मेदारी
इस मामले पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि वे इस घटना के लिए खुद को भी जिम्मेदार मानते हैं। उन्होंने कहा, “मैं इस शहर का जनप्रतिनिधि हूं। रहवासी कई दिनों से गंदे पानी की शिकायत कर रहे थे। भागीरथपुरा के पार्षद ने निगमायुक्त को इसकी शिकायत की थी, जिसकी एक प्रति मुझे भी दी गई थी। मैंने भी इसे निगमायुक्त को भेजा था।”
विजयवर्गीय ने आगे कहा कि सरकार उनकी है और यदि अधिकारियों से गलती हुई है तो उसकी जिम्मेदारी सरकार की भी बनती है।
कब क्या हुआ?
25 दिसंबर से मरीजों के अस्पताल पहुंचने का सिलसिला शुरू हुआ, दो अस्पतालों में 18 मरीज भर्ती हुए।
28 दिसंबर को स्वास्थ्य विभाग की टीम और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय मरीजों से मिलने पहुंचे।
29 दिसंबर को डायरिया से पहली मौत की पुष्टि हुई, शाम तक यह आंकड़ा चार हो गया।
30 दिसंबर को खुलासा हुआ कि बीते चार दिनों से बस्ती में लगातार मौतें हो रही हैं, मृतकों की संख्या 14 पहुंची।
अब कुल मृतकों की संख्या 15 हो चुकी है।
फिलहाल प्रशासन हालात पर काबू पाने के प्रयास में जुटा है, लेकिन दूषित पानी की सप्लाई और बढ़ती मौतों ने सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

