Tuesday, March 24, 2026
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MP News: कफ सिरप के कारण दोनों किडनियां फेल, नागपुर AIIMS में मासूम की दर्दनाक मौत

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: कोल्ड्रिफ कफ सिरप के कारण बच्चों सहित 12 से अधिक लोगों की मौत के मामले में अब बैतूल जिले के चार वर्षीय हर्ष यदुवंशी की भी जान चली गई। 120 दिन तक नागपुर एम्स में इलाज के बाद मासूम हर्ष बीती रात जीवन की जंग हार गया। सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद हर्ष का शव उसके गांव टीकाबरी (बोरदेही) पहुंचा, तो पूरा गांव शोक में डूब गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं स्थानीय ग्रामीणों में जिम्मेदारों के खिलाफ गुस्सा भड़क रहा है।

सर्दी-जुकाम से शुरू हुआ दर्दनाक सफर

हर्ष यदुवंशी, जो बैतूल जिले के ग्राम टिकाबरी का रहने वाला था, को सितंबर 2025 में सर्दी-जुकाम और बुखार की शिकायत हुई थी। 26 सितंबर को उसे छिंदवाड़ा के परासिया क्षेत्र के एक निजी चिकित्सक डॉ. एस.एस. ठाकुर से इलाज कराया गया, जहां उसे कोल्ड्रिफ कफ सिरप दिया गया। सिरप लेने के बाद उसकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी। उल्टी, कमजोरी और पेशाब में दिक्कत के बाद उसे स्थानीय अस्पताल और फिर बड़े मेडिकल सेंटर में भर्ती कराया गया। हालत नाजुक होने पर उसे नागपुर एम्स भेजा गया, जहां अक्टूबर से उसका इलाज चल रहा था। डॉक्टरों ने बताया कि दोनों किडनियां गंभीर रूप से प्रभावित हो गई थीं। 120 दिन के इलाज के बावजूद वह मासूम जिंदगी की जंग हार गया।

शिकायत के बावजूद कार्रवाई में देरी

हर्ष के चाचा, श्याम देवा यदुवंशी ने पहले ही प्रशासन को लिखित शिकायत दी थी, जिसमें उन्होंने आशंका जताई थी कि बच्चे की किडनी फेल होने के पीछे यह संदिग्ध कफ सिरप हो सकता है। इसके बाद 22 नवंबर 2025 को एसडीओपी ने परासिया थाने में दर्ज जहरीले कफ सिरप मामले में हर्ष के केस को शामिल करने के निर्देश दिए थे। पुलिस द्वारा न्यायालय में पेश केस डायरी में हर्ष का मामला क्रमांक 39 पर दर्ज किया गया है और श्रीसन फार्मा द्वारा निर्मित कोल्ड्रिफ सिरप की जब्त बोतल का भी जिक्र किया गया है।

गिरफ्तारी हुई, लेकिन कुछ सवाल अनसुलझे

अब तक इस मामले में 9 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें दवा कंपनी से जुड़े लोग, केमिकल सप्लायर, मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव और मेडिकल स्टोर संचालक शामिल हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि परासिया के उस निजी क्लीनिक के खिलाफ अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई, जहां कई बच्चों में किडनी फेल होने की शिकायतें आईं? पीड़ित पक्ष के वकील संजय पटोरिया का कहना है कि पुलिस डायरी में डॉ. एस.एस. ठाकुर और डॉ. अमित ठाकुर (पिता-पुत्र) के नाम दर्ज हैं, फिर भी क्लीनिक को सील नहीं किया गया और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई, जैसा कि अन्य आरोपियों के साथ हुआ।

परिजनों की एक ही मांग

हर्ष की मौत ने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया है। गांव में शोक का माहौल है, और परिजन बार-बार यह सवाल पूछ रहे हैं, “अगर समय पर कार्रवाई होती, तो क्या हमारा बच्चा बच सकता था?” परिवार ने सरकार से आर्थिक मदद, निष्पक्ष जांच और सभी जिम्मेदारों – चाहे वे डॉक्टर हों, दवा निर्माता या सप्लाई चेन से जुड़े लोग – के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल

यह मामला सिर्फ एक दवा या एक डॉक्टर तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसने दवा की गुणवत्ता जांच, लाइसेंसिंग, निजी क्लीनिकों की निगरानी और मेडिकल स्टोर्स की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जब तक पूरी जांच नहीं हो जाती और जिम्मेदारों को सजा नहीं मिलती, तब तक यह डर लोगों के मन से नहीं जाएगा कि एक साधारण सर्दी-जुकाम की दवा भी जानलेवा साबित हो सकती है।

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