Monday, April 27, 2026
- Advertisement -

धर्म को आचरण और व्यवहार में उतारने की जरूरत

राजेंद्र बज

यह एक स्थापित तथ्य है कि विशुद्ध रूप से धर्म ध्यानी एक बेहतर इंसान के रूप में समाज के बीच रहता है। जिसके व्यक्तित्व एवं कृतित्व की ” खुशबू ” सारे सामाजिक परिवेश को महका देती है। जिसके चलते देव दुर्लभ मानव भव की सार्थकता सिद्ध होती है। धर्म के प्रति आसक्ति भाव आदमी को दया और करुणा के भाव से भर देता है। धर्म के अनुरूप आचरण और व्यवहार एक ऐसे व्यक्तित्व का निर्माण करता है जिससे प्रेरित होकर धरा पर स्वर्ग की अनुभूति की जा सकती है। दरअसल धर्म तो अंतर्मन में धारण करने की विषय वस्तु है। जिसमें किसी भी प्रकार के आडंबर का कोई स्थान नहीं है। हर एक धर्म मानवता का पाठ पढ़ाता है, जिस पर अमल जरूरी है।

धर्म के प्रति श्रद्धा और समर्पण का भाव आदमी की आदमियत के प्रति आश्वस्त करता है। स्वाभाविक रूप से धर्म के प्रति आसक्ति के चलते आदमी कभी अनैतिक नहीं हो सकता। बशर्ते कि धर्म को उसके वास्तविक स्वरूप में अपने आचरण और व्यवहार में आत्मसात किया जाए। एक अर्थ में धार्मिक कट्टरता आदमी के अंतर्मन की असीम धर्मनिष्ठा को रेखांकित करती है। लेकिन, राजनीतिक कारणों के चलते ” धार्मिक कट्टरता ” को एक अलग ही अर्थ में लिया जाने लगा है। यह आश्चर्यजनक है कि धर्म से धर्म का टकराव कैसे हो सकता है? आखिर धार्मिक प्रतिस्पर्धा का क्या अर्थ है ? धर्म की ओट में राजनीति का गंदा खेल क्यों खेला जा रहा है?

दरअसल ऐसे सुलगते सवाल लगातार विकृत होती राजनीति की देन है। वास्तव में होना यह चाहिए कि राजनीति हो तो विशुद्ध रूप से राजनीति ही हो और धर्म हो तो विशुद्ध रूप से धर्म ही हो। लेकिन हो यह रहा है कि एक दूसरे के क्षेत्र में एक दूसरे का हस्तक्षेप बढ़ने लगा है। सैद्धांतिक रूप से लोकतंत्र की राजनीति में व्यापक जनहित के प्रति समर्पित भूमिका के निर्वहन की अपेक्षा की जाती है। दूसरी ओर धर्म में भी आत्म कल्याण के साथ-साथ जन कल्याण की भावना रहा करती है। ऐसी स्थिति में काफी हद तक दोनों के उद्देश्य में समानता दिखाई देती है। धर्म से धर्म की प्रतिस्पर्धा का तो कहीं से कहीं तक सवाल ही नहीं उठना चाहिए। लेकिन इसके उलट हो रहा है।

ऐसी स्थिति में जब अंतिम उद्देश्य लगभग एक समान हो, तो आखिर इसे लेकर व्यर्थ के टकराव की स्थिति निर्मित क्यों हो जाती है? मूल रूप से कोई भी धर्म किसी अन्य धर्म के प्रतिकार की पैरवी नहीं करता। लेकिन धर्म की गलत तरह की व्याख्या के चलते ऐसी स्थिति निर्मित होने लग जाती है कि धर्म और राजनीति दोनों ही अपने मूल स्वरूप को खोने लगते हैं। परिणाम यह निकलता है कि विकृत मानसिकता का विस्तार समाज में अराजकता का वातावरण निर्मित कर देता है। जिसके चलते आए दिन कानून और व्यवस्था पर संकट आने लगता है। बेहतर तो यही है कि धर्म को धर्म रहने दिया जाए और राजनीति को राजनीति।

आम आदमी की धार्मिक भावनाओं को राजनीतिक दृष्टि से भुनाने की मनोवृति एक प्रकार की तुच्छ राजनीति है। जिसके चलते धर्म के वास्तविक स्वरूप और उसके आभामंडल पर विपरीत प्रभाव पड़े बिना नहीं रहता। यही नहीं अपितु राजनीति भी विशुद्ध राजनीति नहीं होकर इतना विकृत स्वरूप धारण कर लेती है कि प्रबुद्ध एवं संभ्रांत वर्ग राजनीति से एक प्रकार की दूरी बना लेता है। इसके चलते राजनीति और भी अधिक बेलगाम होती चली जाती है। यदि धर्म को विशुद्ध रूप से आत्मसात करते हुए किसी भी क्षेत्र में सक्रियता का परिचय दिया जाए, तो निश्चित रूप से समूचे परिवेश में सात्विकता का वातावरण निर्मित होना चाहिए।

दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हो रहा, यह आज से अधिक आने वाले कल में और अधिक चिंता का विषय हो सकता है। बेहतर हो यदि तमाम धर्म के व्याख्याकार अपने-अपने धर्म के सर्वमान्य मूलभूत सिद्धांतों को लिपिबद्ध करते हुए राष्ट्रीय चरित्र का अंग बनाएं। इसके चलते सामाजिक सद्भाव का वातावरण निर्मित किया जा सकता है। अन्यथा अनावश्यक रूप से धर्म से धर्म का टकराव एक दूसरे को काफी हद तक हताहत कर देगा। ऐसी स्थिति में हमारी विश्व वंदनीय रही गौरवशाली संस्कृति इस कदर तहस नहस हो जाएगी कि धर्म के नाम पर अधर्म का वर्चस्व होगा और हम जंगल राज में जी रहे होंगे।

spot_imgspot_img
[tds_leads title_text="Subscribe" input_placeholder="Email address" btn_horiz_align="content-horiz-center" pp_checkbox="yes" pp_msg="SSd2ZSUyMHJlYWQlMjBhbmQlMjBhY2NlcHQlMjB0aGUlMjAlM0NhJTIwaHJlZiUzRCUyMiUyMyUyMiUzRVByaXZhY3klMjBQb2xpY3klM0MlMkZhJTNFLg==" f_title_font_family="467" f_title_font_size="eyJhbGwiOiIyNCIsInBvcnRyYWl0IjoiMjAiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIyMiIsInBob25lIjoiMzAifQ==" f_title_font_line_height="1" f_title_font_weight="700" msg_composer="success" display="column" gap="10" input_padd="eyJhbGwiOiIxNXB4IDEwcHgiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMnB4IDhweCIsInBvcnRyYWl0IjoiMTBweCA2cHgifQ==" input_border="1" btn_text="I want in" btn_icon_size="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIxNyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTUifQ==" btn_icon_space="eyJwb3J0cmFpdCI6IjMifQ==" btn_radius="3" input_radius="3" f_msg_font_family="394" f_msg_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTEiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiJ9" f_msg_font_weight="500" f_msg_font_line_height="1.4" f_input_font_family="394" f_input_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTEiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiJ9" f_input_font_line_height="1.2" f_btn_font_family="394" f_input_font_weight="500" f_btn_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsImxhbmRzY2FwZSI6IjExIiwicG9ydHJhaXQiOiIxMCJ9" f_btn_font_line_height="1.2" f_btn_font_weight="700" f_pp_font_family="394" f_pp_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsImxhbmRzY2FwZSI6IjEyIiwicG9ydHJhaXQiOiIxMSJ9" f_pp_font_line_height="1.2" pp_check_color="#000000" pp_check_color_a="var(--metro-blue)" pp_check_color_a_h="var(--metro-blue-acc)" f_btn_font_transform="uppercase" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjYwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJsYW5kc2NhcGUiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjUwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJsYW5kc2NhcGVfbWF4X3dpZHRoIjoxMTQwLCJsYW5kc2NhcGVfbWluX3dpZHRoIjoxMDE5LCJwb3J0cmFpdCI6eyJtYXJnaW4tYm90dG9tIjoiNDAiLCJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBvcnRyYWl0X21heF93aWR0aCI6MTAxOCwicG9ydHJhaXRfbWluX3dpZHRoIjo3NjgsInBob25lIjp7ImRpc3BsYXkiOiIifSwicGhvbmVfbWF4X3dpZHRoIjo3Njd9" msg_succ_radius="2" btn_bg="var(--metro-blue)" btn_bg_h="var(--metro-blue-acc)" title_space="eyJwb3J0cmFpdCI6IjEyIiwibGFuZHNjYXBlIjoiMTQiLCJhbGwiOiIxOCJ9" msg_space="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIwIDAgMTJweCJ9" btn_padd="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiIsInBvcnRyYWl0IjoiMTBweCJ9" msg_padd="eyJwb3J0cmFpdCI6IjZweCAxMHB4In0=" f_pp_font_weight="500"]

Related articles

यज्ञ और वैदिक कर्मकांड से अधिक फल देता है मोहिनी एकादशी व्रत

पंडित पूरनचंद जोशी हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख माह में...

वोट में ही क्या धरा है?

ये लो कर लो बात। विधानसभा चुनाव का वर्तमान...

ट्रंप के लिए न निगलते न उगलते जैसे बने हालात

भारत के खिलाफ 23-24 अप्रैल की हालिया टिप्पणी और...

जारी है दल बदल की राजनीति

सिद्धांत व विचारविहीन राजनीति करते हुए अपनी सुविधा,लाभ व...

Naagin 7: शो बंद होने वाला है या नहीं? ‘नागिन 7’ पर एकता कपूर ने किया खुलासा

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत...
spot_imgspot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here