जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से अपना कद बढ़ाने वाले शुभेंदु अधिकारी अब भाजपा के सबसे प्रमुख चेहरे के रूप में राज्य के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। 2021 में नंदीग्राम और 2026 में भवानीपुर में ममता बनर्जी को पराजित करने के बाद शुभेंदु ने सत्ता संभालने से पहले ‘मैं नहीं, हम’ के सिद्धांत पर आधारित सामूहिक नेतृत्व का संकेत दिया है।
कोलकाता के न्यू टाउन स्थित विश्व बांग्ला कन्वेंशन सेंटर में भाजपा विधायक दल की बैठक के बाद उन्होंने साफ किया कि उनकी सरकार संगठन और सामूहिक नेतृत्व पर आधारित होगी।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और परिवारिक विरासत
करीब पांच साल पहले तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए शुभेंदु अधिकारी बंगाल के प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता शिशिर अधिकारी पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद रह चुके हैं। उनके भाई दिव्येंदु और सैमेंदु भी सक्रिय राजनीतिज्ञ हैं।
शुभेंदु ने 1998 से 2020 तक तृणमूल कांग्रेस के साथ राजनीतिक सफर तय किया। ममता सरकार में वह परिवहन और सिंचाई मंत्री रहे और 2009 से 2014 तक तमलुक निर्वाचन क्षेत्र से सांसद भी रह चुके हैं। दिसंबर 2020 में भाजपा में शामिल होने के बाद उनका राजनीतिक प्रभाव तेजी से बढ़ा। रवींद्र भारती विश्वविद्यालय से मास्टर्स की डिग्री प्राप्त शुभेंदु ने शादी नहीं की है।
नंदीग्राम आंदोलन से उभरे नेता
2007-08 में नंदीग्राम में इंडोनेशिया के सलीम ग्रुप के विशेष आर्थिक जोन परियोजना के खिलाफ जबरन भूमि अधिग्रहण के विरोध ने शुभेंदु को राजनीतिक रूप से पहचान दिलाई। उन्होंने इस आंदोलन का नेतृत्व किया, जिसमें 14 मार्च 2007 को पुलिस फायरिंग में 14 लोग मारे गए। इस घटना ने 34 साल के वाम शासन का अंत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भ्रष्टाचार और केसों की जांच के लिए आयोग
मुख्यमंत्री पद संभालने से पहले शुभेंदु ने कई बड़े संकेत दिए। उन्होंने कहा कि राज्य में संस्थागत भ्रष्टाचार, सरकारी धन के कथित दुरुपयोग, संदेशखाली प्रकरण और आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल मामलों की जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में आयोग गठित किया जाएगा।
‘चरैवेति’ का मंत्र, विकास और प्रशासन में तेजी
शुभेंदु ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का विचार ‘चरैवेति’ (आगे बढ़ते रहो) केवल शब्द नहीं, बल्कि शासन और जीवन के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत होगा। उनका उद्देश्य राज्य में विकास कार्यों की गति बढ़ाना, प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाना और योजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू करना है।
ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शपथ समारोह
कोलकाता का ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड पहली बार भाजपा सरकार के शपथ ग्रहण का साक्षी बनेगा। यह मैदान 75 वर्षों से सत्ता के उत्थान और पतन का प्रतीक रहा है। 1955 में सोवियत नेताओं की सभा, बांग्लादेश के गठन के बाद शेख मुजीबुर रहमान और इंदिरा गांधी की सभा, वाम मोर्चा का प्रतीक और तृणमूल रैलियों का मंच—यह सभी ऐतिहासिक पल इसी ग्राउंड से जुड़े हैं।
बंगाली संस्कृति और व्यंजनों का रंग
रवींद्र जयंती के अवसर पर शपथ समारोह में बंगाल की संस्कृति झलकेगी। रवींद्र संगीत की प्रस्तुति, बंगाली धोती पहन कर नेता और मेहमानों के लिए झालमुड़ी, सीताभोग और मिहिदाना जैसे व्यंजन समारोह का हिस्सा होंगे।

