जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि टैगोर भारत की सभ्यतागत चेतना की कालजयी आवाज थे। पश्चिम बंगाल में ‘पोची हे बोइशाख’ के रूप में मनाए जाने वाले इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने गुरुदेव के साहित्य, शिक्षा, कला और दर्शन में असाधारण योगदान को याद किया, जिसने पीढ़ियों को प्रेरित किया।
पीएम मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच X पर पोस्ट करते हुए लिखा कि आज पोची हे बोइशाख के अवसर पर हम गुरुदेव टैगोर को श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं। उन्होंने कहा कि टैगोर केवल कवि ही नहीं, बल्कि विलक्षण चिंतक, लेखक, दार्शनिक, शिक्षाविद और कलाकार भी थे।
मोदी ने आगे कहा कि टैगोर ने मानवता की गहरी भावनाओं और भारतीय संस्कृति के श्रेष्ठ आदर्शों को अपनी रचनाओं के माध्यम से अभिव्यक्त किया। उनके विचार समाज को नए दृष्टिकोण, रचनात्मक ऊर्जा और सांस्कृतिक आत्मविश्वास प्रदान करते रहे। प्रधानमंत्री ने कहा कि हम उन्हें श्रद्धा और कृतज्ञता के साथ याद करते हैं और उनकी विचारधारा भविष्य में भी लोगों को आलोकित करती रहे।
रवींद्रनाथ टैगोर की उपलब्धियां
रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म बंगाली पंचांग के अनुसार 25 बोइशाख 1268 को हुआ था, जो ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार 7 मई 1861 है। वह एशिया के पहले नोबेल पुरस्कार विजेता थे, जिन्हें 1913 में उनकी काव्य कृति गीतांजलि के लिए साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला।
टैगोर ने भारत के राष्ट्रगान जन गण मन और बांग्लादेश के राष्ट्रगान आमार सोनार बांग्ला की रचना भी की। उन्हें भारतीय पुनर्जागरण का प्रमुख स्तंभ माना जाता है। उन्होंने शांति निकेतन में विश्वभारती विश्वविद्यालय की स्थापना की, जो आज भी शिक्षा, संस्कृति और कला का महत्वपूर्ण केंद्र है। उनकी रचनाओं में राष्ट्रवाद, मानवता, प्रकृति और आध्यात्मिकता की गहरी छाप देखने को मिलती है।
जयंती पर विशेष कार्यक्रम
गुरुदेव की जयंती के अवसर पर पश्चिम बंगाल और देशभर में सांस्कृतिक कार्यक्रम, कविता पाठ, गीत और नृत्य प्रस्तुतियों का आयोजन किया जा रहा है। कोलकाता और शांति निकेतन में विशेष कार्यक्रमों के माध्यम से उन्हें याद किया गया।

