नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वगत और अभिनंदन है। आज 7 नवंबर शनिवार को देशभर में छोटी दिवाली यानी नरक चतुर्दशी और रूप चौदस का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। दिवाली से एक दिन पहले मनाए जाने वाले इस त्योहार का हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने राक्षस नरकासुर का वध करके लोगों को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी। इसी विजय की खुशी में घरों में दीपक जलाने और विशेष पूजा-अर्चना करने की परंपरा है।
छोटी दिवाली पर मां लक्ष्मी, भगवान गणेश, भगवान श्रीकृष्ण, मां काली, हनुमान जी और यमराज की पूजा की जाती है। इसके अलावा इस दिन यम दीपदान का भी विशेष महत्व माना जाता है। हालांकि, इस साल भद्रा काल को लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल हैं। ऐसे में आइए जानते हैं छोटी दिवाली 2026 पर पूजा-पाठ, दीपदान, यम दीप और लक्ष्मी पूजन के शुभ मुहूर्त के बारे में।
छोटी दिवाली 2026 पर भद्रा काल कब से कब तक रहेगा?
पंचांग के अनुसार, 7 नवंबर को भद्रा काल सुबह 10 बजकर 48 मिनट से शुरू होकर रात 11 बजकर 06 मिनट तक रहेगा। हालांकि, इस बार भद्रा का निवास पाताल लोक में बताया जा रहा है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब भद्रा का वास पाताल लोक में होता है, तो पृथ्वी लोक पर उसका अशुभ प्रभाव नहीं माना जाता। इसलिए छोटी दिवाली पर भद्रा के कारण पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में बाधा की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। श्रद्धालु निर्धारित शुभ मुहूर्त में पूजा और दीपदान कर सकते हैं।
छोटी दिवाली 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर 2026 को सुबह 10 बजकर 47 मिनट से शुरू हो रही है। इस तिथि का समापन 8 नवंबर 2026 को सुबह 11 बजकर 27 मिनट पर होगा।
छोटी दिवाली पर पूजा और दीपदान के प्रमुख शुभ समय इस प्रकार हैं:
संध्या दीपदान और यम दीप जलाने का समय: शाम 5:32 बजे से 6:48 बजे तक।
लक्ष्मी पूजन और हनुमान पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 5:41 बजे से 7:18 बजे तक।
निशिता काल पूजा मुहूर्त: रात 11:39 बजे से 8 नवंबर की रात 12:31 बजे तक।
श्रद्धालु अपनी धार्मिक परंपराओं के अनुसार इन शुभ समयों में पूजा-अर्चना और दीपदान कर सकते हैं।
छोटी दिवाली 2026 पर राहुकाल का समय
ज्योतिष शास्त्र में राहुकाल को शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। इसलिए पूजा-पाठ या किसी नए मांगलिक कार्य की शुरुआत करते समय राहुकाल का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।
7 नवंबर 2026, शनिवार को राहुकाल सुबह 9 बजकर 21 मिनट से 10 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। इस दौरान नए शुभ कार्यों की शुरुआत करने से बचना उचित माना जाता है।
छोटी दिवाली पर कितने दीपक जलाना शुभ होता है?
नरक चतुर्दशी के दिन दीपदान की विशेष परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छोटी दिवाली पर 14 दीपक जलाना बेहद शुभ माना जाता है। हालांकि, अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में अपनी परंपराओं के अनुसार 5, 7, 11 या 13 दीपक जलाने की भी मान्यता है।
इस दिन घर के मुख्य द्वार, आंगन, पूजा स्थल और घर के अन्य प्रमुख स्थानों पर दीपक जलाए जाते हैं। मान्यता है कि दीपदान करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और नकारात्मकता दूर होती है।
छोटी दिवाली पर यम दीपदान कैसे करें?
नरक चतुर्दशी के दिन यमराज के नाम से दीपदान करने की प्राचीन परंपरा है। इसे यम दीपदान कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि विधि-विधान से यम दीप जलाने से परिवार पर यमराज की कृपा बनी रहती है और अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।
यम दीपदान करने की सरल विधि इस प्रकार है:
- शाम के समय एक चौमुखी मिट्टी का दीपक लें।
- दीपक में सरसों का तेल भरें और चारों दिशाओं में बातियां लगाएं।
- दीपक को श्रद्धापूर्वक प्रज्वलित करें।
- इसे घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर रखें।
- भगवान यमराज का स्मरण करते हुए परिवार की सुख-शांति, अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना करें।
छोटी दिवाली यानी नरक चतुर्दशी का धार्मिक महत्व
छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध करके देवताओं और आम लोगों को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई थी। इसी विजय के उपलक्ष्य में दीप जलाकर खुशियां मनाने की परंपरा शुरू हुई।
इस पर्व पर दीपदान के साथ-साथ अभ्यंग स्नान का भी विशेष महत्व है। रूप चौदस के अवसर पर सुबह शरीर पर तेल लगाकर स्नान करने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे सौंदर्य, आरोग्य और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
धार्मिक विश्वास के अनुसार, नरक चतुर्दशी पर विधि-विधान से स्नान, पूजा और दीपदान करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। यही वजह है कि छोटी दिवाली को प्रकाश, स्वच्छता, सकारात्मकता और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है।

