Wednesday, March 18, 2026
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तीन दिन से ज्यादा न रुके विभागों में आरआरटीएस की फाइलें

  • मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने की समीक्षा, जल्द से जल्द परियोजना पूरी करें
  • मेट्रो से तीन गुना तेज होगी आरआरटीएस

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: दिल्ली गाजियाबाद मेरठ रीजनल रैपिड ट्रांसिट सिस्टम (आरआरटीएस) कॉरिडोर के क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। जिसमें मंडल आयुक्त मेरठ, जिलाधिकारी मेरठ एवं गाजियाबाद, उपाध्यक्ष मेरठ एवं गाजियाबाद विकास प्राधिकरण, नगर आयुक्त मेरठ और गाजियाबाद द्वारा एनआईसी वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से भाग लिया गया।

बैठक में आरआरटीएस परियोजना की अभी तक हुई प्रगति से विनय कुमार सिंह, प्रबंध निदेशक, एनसीआरटीसी, नई दिल्ली द्वारा मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया। उनके द्वारा बताया गया कि आरआरटीएस रेल आधारित उच्च गति, उच्च क्षमता, आरामदायक और सुरक्षित रीजनल रेल सेवा है।

यह सड़क जाम, ऊर्जा उपभोग और प्रदूषण को कम करने में मदद करेगी। यह भी बताया कि आरआरटीएस की औसत गति मेट्रो ट्रेन से तीन गुना तेज होगी। कुल 82.15 किमी लंबी इस परियोजना में 15 आरआरटीएस स्टेशन है तथा 13 मेट्रो स्टेशन को भी समाहित किया गया है।

परियोजना के अंतर्गत सभी सिविल और प्रणाली कांट्रेक्ट फाइनल कर दिए गए हैं और पूरे कॉरिडोर पर कार्य तेजी से प्रगति पर है। बताया गया कि प्रत्येक पांच मिनट पर ट्रेन की सुविधा स्टेशनों पर उपलब्ध रहेगी तथा प्रत्येक मौसम में निर्बाध रूप से रेल सेवा कार्य करेगी।

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परियोजना में मल्टीमॉडल एकीकरण सम्मिलित किया गया है। बताया गया कि वर्तमान में बेगम पुल मेरठ से इंदिरा गांधी हवाई अड्डे के लिए 3.30 से चार घंटे का समय लगता है जबकि रैपिड रेल से यह दूरी सिर्फ 75 मिनट में तय की जा सकेगी।

इसी प्रकार दिल्ली एम्स हॉस्पिटल के लिए दो से तीन घंटे लगते हैं, जबकि 60 मिनट में वहां पहुंचा जा सकेगा। समीक्षा के उपरांत मुख्यमंत्री द्वारा निर्देश दिए गए कि यह क्षेत्र के विकास के दृष्टिगत अत्यंत महत्वपूर्ण परियोजना है तथा इसके निर्माण से क्षेत्र में विकास की अपार संभावनाएं विकसित हो सकेंगी।

प्रत्येक अधिकारी और विभाग इस परियोजना को विशेष प्राथमिकता प्रदान करें तथा जो भी कार्य प्रस्तावित एवं लंबित हैं, उनमें विशेष रुचि लेकर न्यूनतम समय में तत्परतापूर्वक पूर्ण कराएं। मुख्यमंत्री द्वारा विशेष रूप से कहा गया कि परियोजना से संबंधित कोई पत्रावली किसी विभाग में तीन दिन से अधिक लंबित न रहे। अंत में आरटीएस अधिकारियों द्वारा आयुक्त मेरठ मंडल एवं राज्य सरकार को निरंतर सहयोग के लिए धन्यवाद दिया गया।

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10 करोड़ दिये, फिर भी मेट्रो की उम्मीद अधूरी

मेट्रो के लिए मेरठ विकास प्राधिकरण ने दस करोड़ दिये थे, लेकिन शहर में मेट्रो की उम्मीद सिरे नहीं चढ़ सकी। धरातल पर भी मेट्रो के प्रोजेक्ट पर काम नहीं हो पा रहा है। देखा जाए तो मेट्रो का सपना शहर के लोगों को कागजों पर दिखाया गया, लेकिन जमीन पर प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। बाद में मेट्रो के बाद यह तथ्य भी सामने आया कि मिनी मेट्रो चलाई जाएगी, उस पर भी बात आगे नहीं बढ़ी हैं।

यूपी में भाजपा की सरकार को चार वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन इन चार वर्षों के भीतर मेट्रो के प्रोजेक्ट पर कितनी गंभीरता से कदम आगे बढ़े हैं, वह इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि एमडीए से आठ वर्ष पहले 10 करोड़ रुपये प्रोजेक्ट की डीपीआर व अन्य कार्यों के लिए दिये गए थे, लेकिन इसके बाद एमडीए के खजाने को तो खाली कर दिया, मगर इस दिशा में आगे सरकार नहीं बढ़ पायी हैं।

सिर्फ और सिर्फ शासन स्तर पर प्रत्येक माह मेट्रो को लेकर मीटिंग तो की जाती है। कार्यों की समीक्षा भी होती हैं, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं है। यही नहीं, बेगमपुल पर ओवरब्रिज बनना था, जो इस वजह से पेडिंग डाल दिया गया कि यहां से मेट्रो निकलेंगी, उसके साथ ही ओवरब्रिज भी बनाया जाएगा।

तत्कालीन कमिश्नर डा. प्रभात कुमार ने ओवरब्रिज बनाकर बेगमपुल को जाम से मुक्ति के लिए पहल की थी, लेकिन तब कहा गया था कि मेट्रो के साथ ही ओवरब्रिज का प्लान किया है। मेट्रो ने इसमें भी अवरोध पैदा कर दिया। मेट्रो कागजों को छोड़कर जमीन पर नहीं उतरी, फिर भी तमाम अड़चन पैदा हो रही है।

शहर की आबादी 20 लाख के करीब हैं, ऐसे में मेट्रो का प्लान सपा सरकार में किया गया था। तब इसकी डीपीआर भी बन गई थी। डीपीआर फाइनल हो गई थी, लेकिन प्रदेश में योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के मुख्यमंत्री की कमान संभाली तो इसके बाद उम्मीद जगी थी कि क्रांतिधरा पर मेट्रो दौड़ेगी, लेकिन मेट्रो प्रोजेक्ट ही ठंडे बस्ते में चला गया।

कानपुर व आगरा जैसे शहरों में मेट्रो चलाने के लिए प्रोजेक्ट आगे बढ़ गये हैं, वहां काम तेजी से चल रहा है, लेकिन मेरठ में मेट्रो का देखा जाए तो नहीं चलाने के लिए शासन स्तर से निर्णय लिया जा चुका हैं। सिर्फ मिनी मेट्रो की बात की जा रही है, इसमें भी धरातल पर कोई काम नहीं हो रहा हैं। सिर्फ और सिर्फ बात की जा रही है।

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