Wednesday, March 4, 2026
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बैंकों की हड़ताल से दो दिन में 400 करोड़ का नुकसान

  • 200 करोड़ से ऊपर के चेक अटके, लोग रहे परेशान
  • जनपद की 300 शाखाओं में लटके रहे ताले

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: बैंकों की हड़ताल से मेरठ में दो दिनों में करीब 400 करोड़ का व्यापार प्रभावित हुआ। मंगलवार को दूसरे दिन भी बैंककर्मी हड़ताल पर रहे और बैंकों के निजीकरण का विरोध किया। सभी शाखाओं के बैंककर्मी मंगलवार को कैंट स्थित इंडियन बैंक की शाखा पर पहुंचे ओर विरोध प्रकट किया। इस दौरान दो दिनों तक मेरठ जनपद की करीब 300 शाखाओं पर ताले लटके रहे।

यूनाइटेड फोरम आॅफ बैंक यूनियन्स की ओर से बैंककर्मियों ने हड़ताल की। बैंककर्मियों ने केन्द्रीय वित्तमंत्री द्वारा किन्ही दो बैंकों का निजीकरण किये जाने के प्रस्ताव का विरोध किया। इसी को लेकर हड़ताल की गई। इसे लेकर फॉरम की ओर से कैंट स्थित इंडियन बैंक पर धरना हुआ।

जिसमें नौ संगठनों के बैंकों में कार्यरत कर्मचारी व अधिकारी शामिल हुए और उन्होंने इस प्रस्ताव का विरोध किया। इस दौरान यूएफबीयू के समन्वयक साथी प्रशांत शर्मा ने कहा सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों का निजीकरण करने की बजाये सरकार अशोध्य ऋणों की वसूली के लिये त्वरित कार्रवाई कराये। जान बूझकर बैंकों की अदायगी न करने वाली पूंजीपतियों को अपराधी घोषित कर कानूनी कार्रवाई कराये।

सहायक महामंत्री सीएम गौतम ने कहा कि सरकार द्वारा बनाई जा रही आर्थिक नीतियों तथा श्रम सुधार कानून जन विरोधी है। इस मौके पर राजकुमार महेन्द्र, ललित कुमार, अजय जैन, ओमबीर, नरेश, विनोद, सुरेन्द्र, दिनेश, आशुतोष, आनंद, सावन कुमार आदि संख्या में अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।

करोड़ों का व्यापार प्रभावित

बैंकों की दो दिन की हड़ताल से अगर मेरठ जनपद की बात करें तो दो दिनों लगभग 400 करोड़ के आस-पास व्यापार प्रभावित हुआ। एक दिन में 150 करोड़ से भी ऊपर के चेक अटके रहे। जनपद की 300 से भी अधिक शाखाओं में किसी प्रकार का कार्य नहीं किया गया। लेन-देन के सभी कार्य प्रभावित हुआ। यूएफबीयू के प्रशांत शर्मा ने बताया कि हड़ताल के कारण 300 करोड़ से भी अधिक का व्यापार प्रभावित हुआ है।

एटीएम तलाशते रहे लोग

महीने के दूसरे शनिवार फिर रविवार को बैंक बंद रहे। उसके बाद दो दिनों की हड़ताल लोगों में दोहरी मार पड़ी। लोग पैसे निकालने के लिये एटीएम के ही चक्कर लगाते रहे, लेकिन एटीएम भी एक हद तक ही रुपये देते हैं। रुपये खत्म होने के बाद लोग बिना रुपये निकाले ही एक एटीएम से दूसरे एटीएम का चक्कर लगाते रहे, लेकिन ज्यादात एटीएम के हालात काफी हद तक खराब हो चुके थे। लोग दिनभर पैसे निकालने के लिये परेशान घूमते रहे।

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