- राज्य मंत्री डॉ. धर्म सिंह सैनी के समक्ष कलक्ट्रेट में एक युवती ने केरोसिन डालकर किया आत्मदाह का प्रयास
- घंटों तक समारोह में रहा हंगामा, युवती को अधिकारियों ने किया समझाने का प्रयास
- एक साल से जमीन कब्जा मुक्त कराने के लिए काट रही थी अधिकारियों के चक्कर
मुख्य संवाददाता |
बागपत: एक तरफ सरकार के चार वर्ष पूर्ण होने का जश्न और सरकार के कार्यों का बखान चल रहा था वहीं दूसरी ओर एक युवती न्याय नहीं मिलने से गुस्से में थी। कार्यक्रम समाप्ति की ओर बढ़ा तो युवती के सब्र का बांध टूट गया और उसने लोकमंच के समक्ष प्रभारी मंत्री डॉ. धर्म सिंह सैनी के समक्ष अपने ऊपर केरोसिन डालकर आत्मदाह का प्रयास किया। युवती के हाथों से बड़ी मशक्कत के बाद माचिस को छीना गया। घंटों तक युवती नहीं मानी। बाद में अधिकारियों ने समझाया और कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। जिसके बाद वह शांत हुई।
बेटियों की सुरक्षा के दावे, भरष्टाचार मुक्त प्रदेश, जमीनों को कब्जा मुक्त करने का संदेश प्रदेश के राज्यमंत्री डॉ. धर्म सिंह सैनी बागपत कलक्टेट लोकमंच पर आयोजित कार्यक्रम में दे रहे थे। सरकार के चार वर्ष पूर्ण होने पर वह समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर आए थे। कार्यक्रम में उनके संबोधन के बाद प्रमाण पत्रों का वितरण हुआ। उसके बाद ट्राइसाइकिल वितरित की गई।
इसी बीच खेकड़ा तहसील के फखरपुर गांव निवासी दिव्यांग महिला बृजेश की बेटी बिपाशा ने समारोह में राज्यमंत्री के समक्ष अपने ऊपर केरोसिन तेल डालकर आत्मदाह का प्रयास किया। इस दृश्य को देखकर सभी हैरान रह गए और युवती के हाथ से मशक्कत के बाद माचिस को छीना गया। युवती आत्मदाह करने की जिद पर अड़ी रही। उसकी पीड़ा इतनी थी कि वह एक साल से अपनी सवा दो बीघा जमीन कब्जा मुक्त कराने के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रही है।
युवती का आरोप था कि गांव के ही एक दबंग ने एक साल से उसकी जमीन को कब्जा रखा है। वह अधिकारियों के चक्कर काटकर थक चुकी है, लेकिन उसकी जमीन की पैमाइश तक करने की जहमत अधिकारी नहीं उठा रहे हैं। अधिकारियों पर उसने भरष्टाचार का आरोप तक लगा दिया। महिला पुलिस कर्मियों ने उसे काफी समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह नहीं मानी।
इसी बीच प्रभारी मंत्री वहां से चले गए। उन्होंने बेटी के दुख को सुनना भी जरूरी नहीं समझा। अब सवाल यह है कि आखिर मंत्री वहां से क्यों बिना किसी समाधान के चले गए? क्यों उस बेटी का दर्द उन्होंने सांझा करने का प्रयास नहीं किया, जो जनसमूह के सामने आत्मदाह करने का प्रयास कर रही थी। मंत्री के इस रवैये से वहां मौजूद लोगों में भी नाराजगी देखने को मिली।
सवाल यह है कि बेटियों को सुरक्षित करने के इन दावों की पोल चंद सेकेंड में खुद ही मंत्री खोलकर चले गए। वह चंद मिनट भी उस बेटी की समस्या को नहीं सुन सके, जो एक साल से अधिकारियों के चक्कर काट रही थी। बाद में डीएम, एडीएम ने उसे समझाया और कार्रवाई का भरोसा दिया। डीएम ने बताया कि युवती की माता को ट्राइसाइकिल वितरित की गई है। वह भी साथ आई थी। उसकी समस्या के लिए अधिकारियों को पहले ही निर्देशित कर दिया गया था।

