- स्वर्गीय रामावतार त्यागी स्मृति सम्मान से दो साहित्यकार संम्मानित हुए
जनवाणी संवाददाता |
नजीबाबाद: युग हस्ताक्षर साहित्य संस्था की ओर से आयोजित सम्मान समारोह में दो साहित्यकारों को संम्मानित किया गया। उनकों शाल ओढ़ाकर व प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान साहित्यकारों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर सभी का मनमोह लिया।
स्वर्गीय रामावतार त्यागी की पुण्यतिथि पर आयोजित कर्यक्रम में रिटायर्ड आयकर अधिकारी प्रताप सिंह की अध्यक्षता व निशा अग्रवाल के संचालन में आयोजित सम्मान समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि महेंद्र अश्क ने किया।
कवियत्री अंजली गोयल ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। युग हस्ताक्षर के अध्यक्ष जितेंद्र कक्कड़ ने रामावतार त्यागी के जीवन परिचय, साहित्य सफर के पूर्ण विवरण से साहित्यकारों को अवगत करवाया। साहित्य कार अजय जैन ने कहा कि अपने दर्द भरे गीतों से जीत लिया जिसने सबका मन, ऐसे रामावतार त्यागी को कोटि कोटि नमन।
भगीरथ सिंह ने कहा दास बनकर तेरा घर से बेघर हुआ, किस ठौर पर अब मैं जाकर पडूँ। भला हूँ बुरा जो भी तेरा हूँ मैं गिले शिकवे बता फिर मैं किस से करूँ। त्यागी अशोक कृष्णम ने देखते भालते क्या से क्या हो गया, वो धरा थी वो अब गगन हो गय,अंधेरे जो सर को उठाने लगे, वो स्वयं जल उठा और किरन हो गया। मौसूफ वासिफ ने जाने किस ने मुझे सम्भाला था, मैं अपनी नजरों में गिर गया था। प्रदीप डेजी ने रामावतार त्यागी जी का जीवन हर पल गीत बना। जो भी उनको जान गया वो ही बस उनका मीत बना।
इसके अलावा निशा अग्रवाल ने कहा कि नारी का कोमल अंतर्मन कौन कब कहां छू पाया है,सबने केवल भोग्या समझा,मन छोड़ा तन सहलाया है।जितेंद्र जैन ने कहा कि गुरु से शिष्य की कौन सी बात अनजानी है। सागर को मालूम है,बून्द में कितना पानी है।प्रमोद कुमार शर्मा ने कहा समय अच्छा नहीं है निकल जाएगा।है अंधेरा घना जो भी ढल जाएगा।
इनके अलावा प्रमोद कुमार शर्मा, कुमुद कुमार, जितेंद्र जैन, राजेश मिश्रा राजू, अर्चना चौहान, अंजलि गोयल अंजू, बेगराज यादव, अजय जोहरी,. मंजू मधुर ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर सभी का मनमोह लिया। सम्मान समारोह में श्याम तिवारी, अशोक अग्रवाल, संजीव एकल, कुमार मोनू रुबा, जयप्रकाश शर्मा, मनजीत कौर, नरेश सिंह राजेश मिश्रा राजू, इंजीनियर आदि ने भी अपने विचार रखे।

