Thursday, March 19, 2026
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ये कम टेस्टिंग का खेल है या फिर हकीकत ?

  • आश्चर्य है 10 दिन में अपने आप ही कोविड संक्रमण खत्म होने लगा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर का सबसे ज्यादा असर अप्रैल और मई माह में देखने को मिला। इसमें संक्रमण के साथ ही मौत भी बड़ी तादाद में हुई। इसके चलते हालात यह बन गए थे कि एक दिन में 1200 कोरोना पॉजिटिव मरीज भी आये हैं, जो सरकारी आंकड़ा अपै्रल व मई के आरंभ में था। इन्हीं दो माह में सबसे ज्यादा हालात बिगड़े हैं।

कोरोना संक्रमितों को बेड व आक्सीजन तक अस्पतालों में नहीं मिली। बेड मिल गए तो आॅक्सीजन नहीं मिलने पर कई अस्पतालों में मरीजों ने दम तोड़ दिया था। इसके साथ लोगों को डर के साथ घबराहट भी हो रही थी कि आखिर कैसे हालात पैदा हो गए हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ के दौरे के दो दिन पहले से ही अचानक पॉजिटिव संख्या घट गई। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि स्वास्थ्य विभाग ने सैंपलिंग पर जोर देना बंद कर दिया है।

अप्रैल में 10 से 12 हजार तक हर रोज टेस्टिंग की जा रही थी। मई के शुरू में भी इसी तरह से टेस्टिंग हुई, लेकिन सीएम योगी आदित्यनाथ के दौरे से ठीक दो दिन पहले टेस्टिंग अचानक कम कर दी गई। अब टेस्टिंग संख्या घटी है तो कोरोना पॉजिटिव 400 के करीब हर रोज निकल रहे हैं, जो आंकड़ा 1200 था, वह घट गया।

यह सरकारी आंकड़े में दर्शाया जा रहा है, लेकिन वास्तविक स्थिति घरों में कुछ और है। घरों में अभी भी लोग बड़ी तादाद में कोरोना संक्रमण से ग्रस्त चल रहे हैं। शहर में भी और गांव में भी। गांव में एक सीएचसी को 200 टेस्टिंग करने की ही अनुमति दी गई, इससे ज्यादा नहीं।

यही वजह है कि टेस्टिंग कम तो कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा भी कम ही आएगा। यही सब सरकारी आंकड़ों का खेल चल रहा है। यह अच्छी बात है कि कोरोना संक्रमितों की तादाद कम हो रही है, लेकिन कहां? सरकारी आंकड़ों में या फिर धरातल पर। जो कोरोना किट स्वास्थ्य विभाग ने बांटी है, वो किट दो दी, लेकिन संक्रमित की जांच नहीं की।

इस तरह से जिसने भी बुखार बताया, उसको कोरोना किट शहर में थमाने का काम नगर निगम के कर्मचारी भी कर रहे हैं। यदि किसी को बुखार है तो पहले कोविड-19 की जांच होनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। किट बांटों और जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लो। संक्रमित शहर में घूमकर कितने लोगों को संक्रमित कर रहा है, इससे निगम व स्वास्थ्य विभाग को कोई लेना देना नहीं है। अब हर रोज की टेस्टिंग के आंकड़ों पर दृष्टि डाली जाए तो पांच हजार से ज्यादा लोगों की टेस्टिंग नहीं हो पा रही है।


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