जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: वन विभाग व आरजी पीजी कॉलेज के संयुक्त तत्वाधान में मेरा शहर मेरी पहल के सहयोग से आर्द्रभूमि संरक्षण और प्रबंधन विषय पर कॉलेज परिसर में शनिवार को गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसका शुभारंभ डीएफओ राजेश कुमार व प्राचार्य डॉ. दीपशिखा शर्मा ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप जलाकर किया।
उसके पश्वात आर्द्रभूमियांं पानी में स्थित मौसमी या स्थायी पारिस्थितिक तंत्र और उनमें मौजूद मैंग्रोव, दलदल, नदियां, झीलें, डेल्टा, बाढ़ के मैदान और बाढ़ के जंगल व चावल के खेतों आदि के बारे में जानकारी प्रदान की। डीएफओं राजेश कुमार ने बताया कि आर्द्रभूमियांं हमारे प्राकृतिक पर्यावरण का महवपूर्ण हिस्सा हैं।
ये बाढ़ की घटनाओं में कमी लाती हैं और तटीय इलाकों की रक्षा करती हैं साथ ही प्रदूषकों को अवशोषित कर पानी की गुणवत्ता में सुधार करती हैं। वहीं उन्होंने कहा कि मानव विकास और ग्रह पृथ्वी पर जीवन के लिए महवपूर्ण हैं। एक बिलियन से अधिक लोग जीवित रहने के के लिए आर्द्रभूमियों पर निर्भर हैं।
ये योजना,कच्चे माल,दवाओं के लिए आनुवंशिक संसाधनों और जलविद्युत के महवपूर्ण स्रोत हैं। यूनेस्को के अनुसार आर्द्रभूमि के अस्तित्व पर खतरा उत्पन्न होने से विश्व के उन 40 वनस्पतियों और जीवों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा जो इन आर्द्रभूमि में पाए जाते हैं या प्रजनन करते हैं।
कार्यक्रम में मेरा शहर मेरी पहल के कोषाध्यक्ष एसके शर्मा,कोअर्डिनेटर अंकुश चौधरी,कवि ईश्वर चंद गंभीर,वीणा खंडूरी,भावना बडोला आदि मौजूद रही।
भारत में आर्द्रभूमियों की स्थिति
भारत में लगभग 4.6 प्रतिशत भूमि आर्द्रभूमि के रूप में है जो 15.26 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करती है। भारत में 42 स्थल हैं जिन्हें आर्द्रभूमि के रूप में अंतर्राष्ट्रीय महत्व रामसर स्थल को नामित किया गया है। रामसर स्थलों के रूप में घोषित आर्द्रभूमियों को सम्मेलन के सख्त दिशा निर्देशों के तहत संरक्षण प्रदान किया गया हैं।

