- क्षेत्र में दिनोंदिन बढ़ रहा बंदरों को उत्पात, बंदर आए दिन लोगों को बना रहे निशाना
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: क्षेत्र में बंदरों का उत्पाद दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। स्थिति यह है कि लोगों का घरों से निकलना तो मुश्किल हो गया है। आए दिन किसी न किसी पर हमला कर काट लेते हैं। वहीं घरों की छतों पर सामान, कपड़े आदि को भी नुकसान पहुंचाते हैं।
शहर की कोई भी ऐसी कॉलोनी या इलाका नहीं है, जहां पर बंदरों का आतंक नहीं है। शहर के सेक्टर, कॉलोनियों और बड़े भवनों में सैकड़ों बंदरों की भरमार हैं। घरों पर सारा दिन बंदरों का आतंक रहता है। जिससे लोग काफी परेशान हैं। उन्होंने इसके लिए नगर निगम कोई कार्रवाई नहीं कर रही और न ही ठेकेदार बंदर पकड़ने को आ रहा है।
बंदरों के उत्पात से लोगों का जीना दूभर हो गया है। तड़के से ही बंदर झुंड में घरों, स्कूल के आंगन से रास्तों व बाजार में उछल कूदकर लोगों पर झपट्टा मार रहे हैं। इससे निरंतर दुर्घटना का खतरा बना रहता है। कैंट के लालकुर्ती मैदा मोहल्ला में शनिवार को अचानक बंदरों ने हमला कर दिया। बंदरों के हमले की चपेट में आकर एक महिला व एक राहगीर गंभीर रूप से जख्मी हो गए।
यहां कई मकानों को बंदरों के इस गिरोह ने अपना निशाना बनाया। अचानक दो दर्जन से ज्यादा बंदरों का झुंड कहीं से आ गया। ऐसा लगता था मानों कोई इन्हें इस इलाके में छोड़कर गया हो। बंदरों के इस झुंड ने मैदा मोहल्ला के घरों में आतंक बरपाना शुरू कर दिया। जिस भी घर में घुस गए वहां कोहराम मचा दिया। इनके आतंक का शिकार होने वालों में भार्गव दंपति का परिवार भी शामिल है।
सीनियर सिटीजन सुबोध भार्गव व उनकी पत्नी पूनम भार्गव के यहां बंदरों ने जमकर कहर बरपाया। पूनम हमले में बुरी तरह से जख्मी हो गयीं। सीनियर सिटीजन होने की वजह से सुबोध भार्गव भी बेबस नजर आए। किसी तरह कोशिश कर बंदरों के हमले से घायल पूनम को लेकर वह कैंटोन्मेंट अस्पताल पहुंंचे। लेकिन वहां जाकर भी उन्हें निराश ही होना पड़ा।
बंदरों के हमले से बचने के लिए पुलिस के पास मदद को पहुंचे, लेकिन लालकुर्ती पुलिस ने भी उन्हें वन विभाग की ओर जाने वाला रास्ता दिखाकर खाली हाथ लौटा दिया। वन विभाग पहुंचे तो वहां से भी निराशा ही हाथ लगी। डीएम की मीटिंग में अफसरों के व्यवस्त होने की बात कहकर वहां भी सुबोध भार्गव निराश होकर लौट आए। उन्हें इस सिस्टम से भारी शिकायत है।

